BJP ने महाराष्ट्र कांग्रेस पर मुस्लिम आरक्षण व RSS प्रतिबंध का वादा करने का आरोप लगाया
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में मतदान के चंद दिन शेष रह गए हैं। सभी 288 सीटों पर 20 नवंबर को मतदान होगा। 23 नवंबर को नतीजे आएंगे। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र कांग्रेस ने एक मुस्लिम संगठन को उसकी माँगों को पूरा करने का आश्वासन दिया है, जिसमें नौकरियों और शिक्षा में मुसलमानों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध शामिल है। यदि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन को चुना गया तो कांग्रेस अपना वादा पूरा करेगी।
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भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड (एआईयूबी) ने एमवीए नेताओं के साथ संवाद किया है। उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनााव2024 में एमवीए को सशर्त समर्थन की पेशकश की है। कथित तौर पर एआईयूबी के पत्र में वक्फ बिल का विरोध और रोजगार और शिक्षा क्षेत्रों में मुसलमानों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण जैसी माँगें शामिल हैं।
विवादास्पद माँगें
प्रसाद ने इन माँगों की आलोचना करते हुए उन्हें विभाजनकारी बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि इससे राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुँच सकता है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रतिक्रिया पर चिंता व्यक्त की, जिसने कथित तौर पर चुने जाने पर इन माँगों को पूरा करने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया था। प्रसाद ने ऐसे प्रस्तावों के प्रति भाजपा के विरोध पर जोर दिया, वह जिसे "तथाकथित INDIA गठबंधन" के रूप में व्यक्त किया, राष्ट्रीय एकता से अधिक वोटों को प्राथमिकता देने के लिए।
संवैधानिक चिंताएँ
प्रसाद ने तर्क दिया कि धर्म के आधार पर 10 प्रतिशत कोटा देना असंवैधानिक है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए मौजूदा आरक्षण कम हो जाएंगे। उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से उनके रुख पर सवाल किया।
शिवसेना UBT की आलोचना
भाजपा नेता ने शिवसेना UBT की भी आलोचना करते हुए दावा किया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में यह अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है। प्रसाद ने ठाकरे पर अपने पिता की विरासत, बालासाहेब ठाकरे को भूलने का आरोप लगाया, जिन्होंने इसी तरह के मुद्दों का विरोध किया था। उन्होंने शिवसेना UBT के भीतर कथित ideological बदलाव पर निराशा व्यक्त की।
शरद पवार का मौन
प्रसाद ने इस मामले पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता शरद पवार के मौन पर सवाल उठाया। उन्होंने पवार की संवैधानिक सीमाओं की समझ पर प्रकाश डाला और उनसे एआईयूबी की माँगों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। प्रसाद ने पवार को चुनौती दी कि वह चुनावी लाभ के लिए कितना आगे जाएँगे।












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