महाराष्ट्र में नहीं बनी 9 नवंबर तक नई सरकार तो क्या होगा?

Recommended Video

    Maharashtra : Devendra Fadnavis को सरकार बनाने का Invitation दे सकते हैं Governor । वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कवायद लगातार जारी है। प्रदेश में मौजूदा सरकार का कार्यकाल 9 नवंबर को खत्म हो रहा है। लिहाजा नई सरकार का गठन 8 नवंबर तक होना जरूरी है। ऐसे में विशेषज्ञों की मानें तो राज्यपाल के पास इस बात का अधिकार है कि वह प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए कुछ और दिन का समय दे सकते हैं। लेकिन प्रदेश के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा था कि अगर सरकार बनाने का दावा पेश करने में देरी होती है कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग सकता है। जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का मौका दिया जाता है तो उसे दो बार फ्लोर टेस्ट का मौका मिलेगा, पहला फ्लोर टेस्ट स्पीकर के चयन के दौरान जबकि दूसरा फ्लोर टेस्ट विश्वास प्रस्ताव पेश करते समय देना होगा।

    10 नवंबर 2014 को बनी थी सरकार

    10 नवंबर 2014 को बनी थी सरकार

    बता दें कि मौजूदा महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 10 नवंबर 2014 को शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पीबी सावंत का कहना है कि तबतक राष्ट्रपति शासन लगाने की जरूरत नहीं जबतक राज्यपाल सरकार बनाने के सभी मौजूद विकल्पों पर विचार ना कर लें। राज्यपाल को पहले सबसे बड़े राजनीतिक दल को न्योता देना होता है और उसे सरकार बनाने का मौका मिलता है ताकि वह सदन में फ्लोर टेस्ट साबित कर सके। उन्होंने कहा कि संविधान इस पूरी प्रक्रिया के कार्यकाल को लेकर विशेष रूप से कुछ नहीं कहता है, लेकिन इसे एक खास समयसीमा के भीतर किया जाना चाहिए।

    क्या कहना है विशेषज्ञों का

    क्या कहना है विशेषज्ञों का

    जस्टिस सावंत ने कहा कि नई विधानसभा मौजूदा विधानसभा के कार्यकाल के खत्म होने से पहले अस्तित्व में आ जानी चाहिए, लेकिन इसे कुछ और दिन का मौका दिया जा सकता है। यही नहीं नई सरकार के गठन से पहले नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह प्रो टेम स्पीकर की नियुक्ति करके की जा सकती है। कानून एवं न्यायपालिका विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं है कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। खुद राज्यपाल भी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता देंगे। मौजूदा विधानसभा का सत्र खत्म होने के बाद भी कुछ दिन का समय दिया जा सकता है।

    1999 में भी ऐसा हुआ था

    1999 में भी ऐसा हुआ था

    प्रदेश विधानसभा के पूर्व मुख्य सचिव अनंत कालसे ने बताया कि इससे पहले 1999 में भी इस तरह की स्थिति पैदा हुई थी, जब कांग्रेस और एनसीपी ने सरकार बनाने के लिए अतिरिक्त समय लिया था, दोनों दलों के बीच मंत्रालयों के बंटवारे में हुई देरी की वजह से उस वक्त विलंब हुआ था।

     शिवसेना खड़ी कर सकती है मुश्किल

    शिवसेना खड़ी कर सकती है मुश्किल

    वहीं वरिष्ठ भाजपा नेता का कहना है कि प्रदेश में विधानसभा का स्पीकर नियुक्त करने के लिए उस पार्टी को अपना बहुमत साबित करना होता है जो पूर्ण बहुमत होने का दावा करती है। मौजूदा समय में माना जा रहा है कि शिवसेना अपने उम्मीदवार को बतौर विधानसभा स्पीकर के लिए आगे बढ़ा सकती है और एनसीपी व कांग्रेस से समर्थन की अपील कर सकती है, जिससे कि वह भाजपा के लिए शर्मिंदगी की स्थिति खड़ी कर सके। बता दें कि विधानसभा स्पीकर का चुनाव सीक्रेट बैलेट के जरिए वोटिंग से होता है। ऐसे में अगर भाजपा अपना स्पीकर देने में विफल होती है तो यह पार्टी के लिए बड़ा झटका होगा। दूसरा फ्लोर टेस्ट सरकार के गठन के बाद विश्वास प्रस्ताव के दौरान होगा।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+