रात 8 बजे अजित पवार ने विधायकों को किया फोन, पूछा- मेरे साथ हो या चाचा के साथ?

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    Maharashtra: Ajit Pawar called the MLAs and asked - be with me or with uncle? । वनइंडिया हिंदी

    मुंबई। महाराष्ट्र में जब शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस प्रदेश में सरकार बनाने को लेकर चर्चा कर रहे थे, उसी दौरान अजित पवार भाजपा के साथ हाथ मिलाने को लेकर अलग ही योजना बना रहे थे। शुक्रवार रात 8 बजे तीनों ही दलों की जब बैठक हो रही थी तो किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि अगली सुबह देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद की शपथ ले लेंगे और अजित पवार उप मुख्यमंत्री बन जाएंगे। पूर्व मुख्यमंत्री की मानें तो शुक्रवार रात 8 बजे ही अजित पवार या फिर उनके कार्यालय की ओर से उनके भरोसेमंद एनसीपी विधायकों से पूछा जाने लगा था कि वह अजित पवार के साथ हैं या फिर शरद पवार के साथ।

    तमाम विधायकों को फोन कर पूछा

    तमाम विधायकों को फोन कर पूछा

    एक दर्जन से अधिक विधायकों को फोन करके उनसे उनकी राय पूछी गई थी। जिन लोगों ने कहा कि वह अजित पवार के साथ हैं उन्हें एनसीपी नेता धनंजय मुंडे के घर पर शनिवार को सुबह पहुंचने के लिए कहा गया था। जब तमाम फोन लाइन व्यस्त थी उस वक्त देवेंद्र फडणवीस सने राजभवन में सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया था। फडणवीस ने बताया कि उनके पास 173 विधायकों का समर्थन है। उनकी खुद की पार्टी के 105 विधायक, एनसीपी के 54 और 14 निर्दलीय विधायकों का उनके पास समर्थन है।

    कुछ इस तरह से बनी योजना

    कुछ इस तरह से बनी योजना

    रात को तकरीबन 12.30 बजे राज्यपाल बीएस कोश्यारी को अजित पवार ने 54 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंप दिया, जिसके बाद फडणवीस के पत्र के आधार पर राज्यपाल इस बात के लिए राजी हो गए थे कि प्रदेश में स्थिर सरकार बनाई जा सकती है। जिसके बाद राज्यपाल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश कर दी। जिसके बाद सुबह 5.47 बजे राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया और सुबह 6 बजे देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को मैसेज किया गया कि आप राजभवन पहुंच जाइए जहां सुबह 8 बजे शपथ ग्रहण समारोह होगा।

    सरकार गठन में देरी से नाराज थे अजित

    सरकार गठन में देरी से नाराज थे अजित

    दरअसल अजित पवार प्रदेश में सरकार के गठन में हो रही देरी से नाराज थे। अजित पवार के फोन के बाद 11 एनसीपी विधायक धनंजय मुंडे के घर पर सुबह 7 बजे पहुंच गए और वहां पहुंचते ही वह राजभवन के लिए रवाना हो गए। इस पूरे घटनाक्रम से ना सिर्फ शीर्ष नेता बल्कि बड़े अधिकारियों को भी भनक नहीं लग सकी। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि हमे इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं थी।

    काफी समय से कर रहे थे कोशिश

    काफी समय से कर रहे थे कोशिश

    पूर्व मुख्यमंत्री की मानें तो एनसीपी को तोड़ने और फडणवीस से हाथ मिलाने की काफी लंबे समय से कोशिश कर रहे थे। प्रदेश में एनसीपी-शिवसेना और कांग्रेस की सरकार बनने में हो रही देरी की वजह से अजित पवार ने भाजपा के साथ मिलकर प्रदेश में सरकार बनाने की योजना बना। अजित पवार के प्रस्ताव को देवेंद्र फडणवीस ने स्वीकार कर लिया और सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया।

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