MahaKumbh: धनखड़ ने पढ़ा राष्ट्रपति का अभिभाषण, विपक्ष ने की नारेबाजी, लगाए 'शर्म करों शर्म करों' के नारे
MahaKumbh Stampede: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 31 जनवरी को संसद के संयुक्त बैठक में अपना अभिभाषण दिया। इस दौरान राज्यसभा में उपराष्ट्रपि जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रपति के अभिभाषण को अंग्रेजी में पढ़ते हुए महाकुंभ भगदड़ का जिक्र किया, तो विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी और 'शर्म करों शर्म करों' के नारे भी लगाए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में 29 जनवरी को प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ का जिक्र करते हुए दुख जताया। साथ ही, कहा कि यह घटना बहुत दुखद है और उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि महाकुंभ भारत की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस घटना में लोगों की मौत पर दुख प्रकट किया। आपको बता दें कि इसी दौरान भगदड़ हुई, जिसमें कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई और 60 अन्य घायल हो गए। इस हादसे पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार घटना में मरने वालों की सही संख्या छिपा रही है।
इस दौरान जब धनखड़ ने महाकुंभ भगदड़ का जिक्र किया तो विपक्षी सांसदों ने 'शर्म करो, शर्म करो' के नारे लगाए। इससे पहले जब राष्ट्रपति ने पूर्वोत्तर राज्यों का जिक्र किया तो कुछ सांसदों ने 'मणिपुर, मणिपुर' के नारे लगाए। इन व्यवधानों ने संसद के भीतर तनाव को उजागर किया।
व्यवधान समाप्त करने पर दिया जोर
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने संसद में व्यवधान समाप्त करने के महत्व पर जोर दिया। बजट सत्र शुरू होने से पहले बोलते हुए उन्होंने राजनीतिक दलों के बीच रचनात्मक संवाद और सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संसदीय कार्यवाही में व्यवधानों की जगह सार्थक चर्चा होनी चाहिए।
सहयोगात्मक विरोध का आह्वान
राष्ट्रीय महिला आयोग के 33वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने सहयोगात्मक विपक्ष की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संसद को व्यवधानों के बजाय बहस और चर्चा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस दृष्टिकोण से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और शासन को लाभ होगा।












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