VOTE FOR NOTA: 'मैं सामान्य वर्ग से हूं, वोट मांगकर शर्मिंदा ना करें'

भोपाल। देश के चार राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और आरक्षण से लेकर एससी-एसटी वर्ग के लिए बने नए कानून से सामान्य वर्ग इस बार बहुत नाराज दिखाई दे रहे हैं। खासकर मध्यप्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में सवर्ण जाति के वोटरों का गुस्सा बीजेपी के खिलाफ देखने को मिल सकता है। राजस्थान और मध्यप्रदेश चुनावों में इस बार सबसे ज्यादा नोटा का प्रयोग देखने को मिल सकता है और जिसका नुकसान दोनों राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी को हो सकता है।

मध्य प्रदेश: मैं सामान्य वर्ग से हूं, वोट मांगकर शर्मिंदा


मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सवर्ण समाज के लोगों ने अपने घरों के बाहर बोर्ड और पोस्टर्स लगा दिए हैं जिन पर लिखा है कि राजनैतिक दल वोट मांगकर शर्मिंदा ना करें। मध्यप्रदेश में अगले महीने 28 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। इन दिनों भोपाल में कई घरों के बाहर लोगों ने पोस्टर्स लगाए हैं जिन पर लिखा है, 'मैं सामान्य वर्ग से हूं कृपया कोई भी राजनैतिक दल वोट मांग कर शर्मिंदा ना करें। VOTE FOR NOTA' मध्य प्रदेश में इस प्रकार के पोस्टर घरों के मेनगेट और दिवारों पर देखे जा सकते हैं। नोटा आंदोलन ने बीजेपी को सबसे ज्यादा परेशान करके रखा है।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए भोपाल के स्थानीय लोगों ने कहा कि एससी/एसटी आरक्षण अब हटा देना चाहिए। इस सामान्य वर्ग पर बड़े स्तर पर प्रभाव पड़ रहा है। अगर यह जारी रहा तो हम आगामी चुनावों में नोटा को वोट देंगे।

मध्यप्रदेश और राजस्थान में खासकर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। यहां तक कि बीजेपी को कई सालों से वोट देते आ रहे वोटर्स इस बार अपना विचार बदल सकते हैं। आरक्षण और एससी-एसटी वर्ग के लिए नई कानून से सवर्ण जाति के लोग नाराज दिखाई दे रहे हैं। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने तो हाल ही में एक बयान दिया था कि कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता।

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