तू बड़ा याद आएगा: खामोश हो गया जू स्टार चिंपैंजी जैसन, अकेली रोती रह गई उसकी साथी 'निकिथा'
तू बड़ा याद आएगा: खामोश हो गया जू स्टार चिंपैंजी जैसन, अकेली रोती रह गई उसकी साथी 'निकिथा'
लखनऊ, 22 जुलाई: लखनऊ चिड़ियाघर (जू) का सबसे बड़ा स्टार चिंपैंजी जेसन का निधन हो गया है। लखनऊ के चिड़ियाघर में दो चिंपैंजी में से एक जेसन का मंगलवार को निधन हुआ, जिसके बाद से चिड़ियाघर में खामोशी छाई हुई है। जेसन की मौत के बाद से उसकी महिला साथी 'निकिथा' अकेली रह गई है और रोती हुई है। जेसन की उम्र 35 साल की थी। बढ़ती उम्र की वजह से चिंपैंजी जेसन मंगलवार को सुस्त सा दिख रहा था और सुबह से ही उसने खाना-पिना छोड़ दिया था। जिसके बाद लखनऊ जू के डॉक्टरों और बरेली के आईवीआरआई के विशेषज्ञों की इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

नम आंखों से दी गई जेसन को आखिरी विदाई
जेसन की मौत के बाद चिड़ियाघर में मातम छा गया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने शव पर फूल-माला चढ़ाकर जेसन को आखिरी विदाई दी है। बुधवार (20 जुलाई) को जेसन का अंतिम संस्कार किया गया था। जेसन के अंतिम संस्कार के वक्त पूरा जू स्टाफ गमगीन था। जू स्टाफ का कहना है कि जेसन उनका सबसे प्यारा और दुलारा वन्यजीव था। दिसको श्रद्धांजलि देते वक्त हमारी आंखें नम हो गई थीं।

स्वीडन में हुआ था जेसन का जन्म
जेसन का जन्म 90 के शुरुआती दशक में स्वीडन के जू में हुआ था। वहां से वह साथी निकिथा के साथ हवाई मार्ग से मैसूर जू लाया गया था। साल 2007 में जेसन और निकिथा दोनों एक एक्सचेंज में लखनऊ के चिड़ियाघर पहुंचे थे। जेसन लखनऊ के जू में आते ही अपने चुलबुले अंदाज से सबका चहेता बन गया था। जेसन की डिमांड देखने के बाद जू प्रशासन से उसे मुख्य द्वार के शुरुआती बाड़े में शिफ्ट किया था।

कैसे हुई चिंपैंजी जेसन की मौत
19 जुलाई की सुबह जू के केयरटेकर ने पाया कि जेसन निष्क्रिय है और खाना नहीं खा रहा है। चिंपैंजी की जांच पशु चिकित्सकों द्वारा की गई, जिन्होंने इसे अस्वस्थ पाया और चिड़ियाघर निदेशक को सूचित किया। पशु चिकित्सकों ने सलाह के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली के विशेषज्ञों से संपर्क किया गया। हालांकि जब तक वो उसकी देखभाल के लिए आते रात आठ बजे वह अपने बाड़े में बेहोश होकर गिर पड़ा। रात 11 बजे इसे लखनऊ चिड़ियाघर के पशु चिकित्सालय ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। अंगों को विस्तृत जांच के लिए आईवीआरआई भेजा गया था।

महिला चिंपैंजी दुखी है जेसन के जाने से
महिला चिंपैंजी निकिथा भी अपने साथी की मौत पर दुखी नजर आई। जेसन और निकिता काफी सालों तक एक-दूसरे के साथ रहे लेकिन अपना कुनबा ना बढ़ा सके। उत्तर प्रदेश के प्रदेश के प्राणि उद्यानों में अब सिर्फ एक ही चिंपेंजी मादा निकिथा बची हुई है। जेसन की अब कोई भी निशानी लखनऊ के चिंड़ियाघर में नहीं बची है। रिपोर्ट के मुताबिक 7-8 साल पहले निकिता को कानपुर जू के नर चिंपैंजी छज्जू के साथ रहने के भेजा भी गया था, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। इसलिए उसका वापस बुला लिया गया।

गिलास से पीता था जूस, कूलर में सोता था
जेसन अपने सिर्फ अंदाज से ही नहीं बल्कि अपने ठाठबाठ के लिए भी जाना जाता था। जेसन ठंड के मौसम में हीटर में रहता था। वहीं गर्मियों में वह कूलर में रहता था। वह इंसानों की तरह गिलास से जूस पीता था। वह हर सीजन में मौसमी फलों को खाता था। वह गर्मी में मोसंबी का जूस स्टील के बड़े गिलास में पीता था। ठंड में वह मूंगफली, भूने चने और अंडा खाता था।












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