'राहुल से पूछे बिना खड़गे..': बिहार में भी कांग्रेस को झटका, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने 4 दशक पुराना नाता तोड़ा
Bihar Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में भी कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है। रविवार को कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा ने पार्टी छोड़ दी है। उनका दावा है कि पार्टी आरजेडी के साथ 'विनाशकारी' पार्टनर्शिप में फंस चुकी है। उन्होंने हाल ही में विवादास्पद छवि वाले पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की पार्टी से जुड़ने पर भी नाराजगी जताई है।
'राहुल से पूछे बिना चुने हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष कोई कदम नहीं उठा सकते'
रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में शर्मा ने कांग्रेस छोड़ने की घोषणा करते हुए कहा कि, 'आज पार्टी नेतृत्व दिल्ली में एक रैली में व्यस्त है, जहां यह लोकतंत्र बचाने की जरूरत बता रही है। हालांकि दुख की बात है कि कांग्रेस में कोई लोकतंत्र नहीं देखा जा सकता, जहां हमारे चुने हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष (मल्लिकार्जुन खड़गे) बिना राहुल गांधी या उनके करीबी केसी वेणुगोपाल से पूछे कोई कदम नहीं उठा सकते।'

पिछले एक दशक में चौथे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने छोड़ी पार्टी
पिछले करीब एक दशक में अनिल शर्मा बिहार के चौथे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी है। इससे पहले अशोक चौधरी ने पार्टी के आंतरिक मतभेदों की वजह से कांग्रेस छोड़ दिया था और 2018 में जेडीयू में शामिल हो गए थे। इससे पहले 2015 में राम जनत सिन्हा भी कांग्रेस से निकल गए थे।
उससे एक साल पहले महबूब अली कैसर कांग्रेस छोड़कर रामविलास पासवान की एलजेपी में शामिल हो गए थे। इस पार्टी से उन्हें लगातार दो बार खगड़िया से लोकसभा के लिए चुने जाने का मौका मिला। हालांकि, शर्मा ने अभी इस तरह की कोई मंशा नहीं जाहिर की है।
अभी किसी पार्टी में जाने की बात नहीं कही
उन्होंने कहा, 'मैं 1985 में कांग्रेस में शामिल हुआ। करीब चार दशकों में मैं दो बार संगठन के पद पर रहा, प्रदेश महासचिव और फिर प्रदेश अध्यक्ष के रूप में। कभी भी मैंने टिकट या मेरे लिए विधान परिषद की सीट के लिए लॉबिंग नहीं की। न ही मैंने कांग्रेस छोड़ने से पहले किसी दूसरी पार्टी को लेकर संभावनाएं तलाशी हैं।'
आरजेडी से तालमेल का विरोध किया
लोकसभा चुनावों से पहले इस फैसले के बारे में उनका कहना है कि 'मेरे प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल के दिनों से ही मैं आरजेडी के साथ गठबंधन का विरोधी रहा हूं, जिससे उन्हें हमारे दम पर फलने-फूलने में मदद मिली। जनता की नजरों में हम हमेशा लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के जंगलराज के समर्थन के लिए दोषी रहे।'
पप्पू यादव के आने पर आखिरी झटका लगा
शर्मा के मुताबिक उन्हें आखिरी झटका तब लगा जब पप्पू यादव को पार्टी में शामिल किया गया। उनके मुताबिक, 'नेशनल हेडक्वार्टर में एक तरह से उनका अभिनंदन किया गया। पार्टी इस बात से अपसेट है कि लालू ने यादव को टिकट देने की उसकी कोशिश को बेकार कर दिया है। इसके बजाय, उसे कुछ बेहतर प्रत्याशियों के बारे में सोचना चाहिए था, जिन्हें मौका नहीं मिल रहा है, क्योंकि कांग्रेस लीडरशिप दबंग सहयोगी के सामने अपनी बात रख नहीं सकती है।'
लालू की बीजेपी से 'मूक सहमति' की जताई आशंका
शर्मा का दावा है कि आरजेडी ने जिस तरह से टिकट बांटे हैं, उससे लगता है कि 'टिकट बेचने के लिए छोड़ दिया गया, बिना जीतने की संभावना को तलाशे हुए' और संभवत: बीजेपी की 'मूक सहमति' के साथ। जैसा कि उत्तर प्रदेश में मीडिया के कुछ वर्ग में मायावती को लेकर अटकलें लगाई जा रही है, 'इसे भी खारिज नहीं किया जा सकता है।'
एक कायरतापूर्ण पलायन- कांग्रेस
हालांकि, प्रदेश कांग्रेस की मीडिया सेल के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने एक बयान जारी करके उनपर 'एक कायरतापूर्ण पलायन की कोशिश करने और 'नरेंद्र मोदी के चरणों में गिरने का बहाना" खोजने का आरोप लगाया है। (इनपुट-पीटीआई)












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