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कर्नाटक में सभी 28 सीटें जीतने का लक्ष्य, बीजेपी को कहां से मिल रही है इतनी ताकत?

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा है कि वह राज्य की सभी 28 लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चलें और वह भी प्रत्येक बूथ पर 10% वोट शेयर में बढ़ोतरी के साथ।

कर्नाटक वह राज्य है जहां पिछले साल ही कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में बीजेपी को भारी बहुमत से पराजित किया है। यहां पांच चुनावी गारंटियों के दम पर सरकार बनाने वाली कांग्रेस के दोनों बड़े नेता मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उनके डिप्टी और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुार भी अपने लिए 15 से 20 सीटें जीतने का ही लक्ष्य रख पा रहे हैं।

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मैसूर में अमित शाह ने पार्टी को दिया टारगेट
ऐसे में सारी की सारी सीटें जीतने के मिशन में भाजपा का जुटना आसान नहीं है। मैसूर में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा है कि 'पूरे देश में राजनीतिक माहौल बीजेपी के पक्ष में है। प्रदेश इकाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को वोटों में तब्दील करने के लिए जोर लगाकर काम करना चाहिए ताकि वोट शेयर में बढ़ोतरी हो।'

कर्नाटक के नेताओं ने शाह को दिया टारगेट हासिल करने का भरोसा
शाह के निर्देशों के अनुसार ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा है कि सभी नेताओं ने गृहमंत्री को भरोसा दिया है कि सभी 28 लोकसभा सीटों पर बीजेपी और जेडीएस एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी और सभी सीटें जीतने के लिए 100% जोर लगा देंगे।

बीजेपी को लिंगायतों से मिल रही है नई ताकत!
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं में विपक्षी दल के शासित राज्य में इतना आत्मविश्वास कैसे है। अगर इसके पीछे जाएंगे तो लिंगायतों का वह बड़ा वोट बैंक है, जिसका बड़ा वर्ग विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की ओर लुढ़क गया था। लेकिन, आज हालात बदल चुके हैं।

वोक्कालिगा वोट बैंक के भी झुकाव की उम्मीद
इसी तरह से राज्य के दूसरे सबसे प्रभावशाली समुदाय वोक्कालिगा की भी परिस्थितियों में अंतर आ चुका है। इन दोनों समुदायों ने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का बढ़चढ़ कर साथ दिया था, लेकिन लोकसभा चुनावों में भी ऐसा ही करेंगे, इसपर सवालिया निशान लग चुके हैं।

सुत्तूर मठ से मिली बीजेपी को नई ताकत!
दरअसल, शाह ने इसी दिन मैसूर के प्रसिद्ध सुत्तूर मठ की भी उसकी सेवाओं के लिए जमकर तारीफ की। यह वीरशैव-लिंगायतों की एक महत्वपूर्ण धार्मिक संस्था है, जो समाज सेवा और शिक्षा के लिए विख्यात है। इसके 350 से ज्यादा शिक्षण संस्थानों में एक लाख से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं।

अमित शाह सुत्तूर जथरा महोत्सव में शामिल होने पहुंचे थे, जो 6 दिनों तक चलने वाला सांस्कृतिक-धार्मिक आयोजन है। गृहमंत्री ने अयोध्या में भी मठ के एक ब्रांच खोलने के फैसले की सराहना की है। अगर चुनावी नजरिए से देखें तो वीरशैव-लिंगायत कर्नाटक का सबसे विशाल समुदाय है।

जाति जनगणना पर सिद्दारमैया के रवए से बढ़ी नाखुशी
अमित शाह इस समुदाय के पास ऐसे वक्त में पहुंचे हैं, जब यह राज्य की कांग्रेस सरकार को लेकर काफी नाखुश है। क्योंकि, लिंगायतों और वोक्कालिगा समाज की ओर से प्रदेश में हुई जाति जनगणना की रिपोर्ट नहीं सार्वजनिक करने की लगातार की जा रही मांग के बावजूद मुख्यमंत्री सिद्दारमैया अक्सर इसे स्वीकारने के संकेतों वाले बयान देते रहे हैं।

जबकि, दिसंबर में दावणगेरे में हुए सम्मेलन में इस समुदाय की ओर से एक प्रस्ताव के माध्यम से सीएम सिद्दारमैया से गुजारिश की गई थी कि जाति जनगणना की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डालकर एक नई जाति जनगणना का आदेश दें। क्योंकि, कहा जा रहा है कि जो रिपोर्ट तैयार की गई है, उसमें लिंगायतों और वोक्कालिगा समुदाय की आबादी कम बताई गई है।

भाजपा को लिंगायतों और वोक्कालिगा दोनों समुदायों से बढ़ गई है उम्मीद
मैसूर और आसपास के जिलों में वोक्कालिगा समाज की भी काफी आबादी है और जेडीएस को इस समाज का बड़ा समर्थन मिलता आया है। ऐसे में बीजेपी को उम्मीद है कि इस बार के लोकसभा चुनावों में उसे वापस से लिंगायतों का पूरा समर्थन तो मिलेगा ही, जेडीएस के साथ होने से वोक्कालिगा समाज का भी साथ मिलना तय है।

बीजेपी को क्यों नामुमकिन नहीं लगता 28 का लक्ष्य?
2019 में बीजेपी अपने दम पर राज्य की 28 में से 25 सीटें जीती थी और एक पर उसके समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई थी। यही वजह है कि भाजपा नेताओं का मानना है कि जेडीएस से तालमेल होने की वजह से कुल 27 सीटें तो अभी भी उसके पास हैं और इसलिए इसबार सभी 28 जीतने का लक्ष्य रखा गया है, जो कि नामुमकिन नहीं है।

जबकि, पिछली बार कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के तहत चुनाव लड़े थे, फिर भी उन दोनों को एक-एक सीट ही मिल पायी थी।

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