मैसूर के इस राजा ने की है राजस्थान की राजकुमारी से शादी, 400 साल बाद किया अपने खानदान को श्राप से मुक्त
Yaduveer Krishnadatta Chamaraja Wadiyar : कर्नाटक की मैसूरु लोकसभा सीट से बीजेपी ने इस बार एक पूर्व शाही मैसूरु परिवार के वारिस यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार को टिकट दिया है। जिसके बाद से वाडियार लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।

भले ही आज पहले जैसे राजघराने नहीं होते हैं लेकिन फिर भी चामराजा वाडियार को लोग आज भी एक महाराजा की तरह ही सम्मान देते हैं, आज भी जब यहां दशहरे का उत्सव होता है तो चामराजा वैसे ही उस उत्सव का अंग बनते हैं, जैसे कि पहले शाही समारोह में राजा बना करते थे।
यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार को वेदों का बहुत अच्छा ज्ञान है
24 मार्च 1992 को जन्मे यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा को वेदों का बहुत अच्छा ज्ञान है, उन्हें कन्नड़ संगीत की भी अच्छी जानकारी है तो वहीं वो घुड़सवारी और पोलो का भी शौक रखते हैं। आपको बता दें कि मैसूरु के 26वें शासक श्रीकांतदत्ता नरसिम्हराजा वाडियार का कोई बेटा नहीं था और उनका निधन साल 2013 में हो गया था।
400 सालों से किसी महारानी को नहीं हुआ बेटा
इसी के बाद उनकी पत्नी ने प्रोमोदा देवी ने अपनी ननद गायत्री देवी की बेटी लीला त्रिपुरासुंदरी के बेटे कृष्णदत्त चामराजा को गोद लिया था। श्रीकांतदत्ता की पांच बहनें हैं। आपको बता दें कि ये अपने आप में एक अनोखा राजवंश हैं, जहां पिछले 400 सालों से जो भी राजा की गद्दी पर बैठा है वो दत्तक पुत्र ही रहा है।
महारानी अलमेलम्मा ने श्राप दिया था!
इस राजवंश के बारे में एक कहानी कही जाती है कि इस खानदान को साल 1612 में विजयनगर की तत्कालीन महारानी अलमेलम्मा ने श्राप दिया था कि इस कुल का राजा कभी भी महारानी के कोख से जन्म नहीं लेगा। फिलहाल इस बात में कितनी सच्चाई है ये तो आज तक किसी को पता नहीं है लेकिन इस तरह की बातें इस राजवंश को लेकर होती रहती हैं।
डूंगरपुर राजघराने की राजकुमारी त्रिशिका से की है शादी
फिलहाल यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा को लोग एक तेजस्वी किंग कहते हैं क्योंकि ये काफी पढ़े-लिखे हैं और इन्होंने बेंगलुरु से स्कूली पढ़ाई की थी और इसके बाद इन्होंने अमेरिका के मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक किया है।
आद्यवीर नरसिम्हराजा वाडियार राजकुमार का हुआ जन्म
इन्होंने राजस्थान की राजकुमारी डूंगरपुर राजघराने की राजकुमारी त्रिशिका से साल 2016 में शादी की थी। इसके बाद इस कपल को साल 2017 में त्रिशिका महारानी ने आद्यवीर नरसिम्हराजा वाडियार राजकुमार को जन्म दिया और इस तरह से वाडियार खानदान को 400 साल बाद अपना वारिस मिला।
महारानी के पिता हर्षवर्द्धन सिंह भाजपा नेता हैं
आपको बता दें कि ऐसा कहा जा रहा है कि कृष्णदत्त चामराजा को राजनीति में लाने का श्रेय उनकी पत्नी त्रिशिका को ही जाता है क्योंकि उनके पिता हर्षवर्द्धन सिंह भाजपा नेता हैं और राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। वो खुद भी सोशल प्लेटफार्म पर काफी एक्टिव रहती हैं और बहुत सारे सोशल इवेंट से जुड़ी हुई हैं।
सियासी पिच परकृष्णदत्त चामराजा कमाल करेंगे?
हालांकि कृष्णदत्त चामराजा से पहले श्रीकांतदत्ता भी चार बार कांग्रेस की तरफ से मैसूरू से सांसद रह चुके हैं लेकिन साल 1991 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें विजय नहीं मिली थी, देखते हैं इस बार सियासी पिच पर कृष्णदत्त कमाल करते हैं या नहीं? लेकिन इसमें कोई शक नहीं एक रॉयल एंट्री से मैसूर का चुनावी दंगल काफी रोचक हो गया है।












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