Lok Sabha Elections: 49 सीटों पर मतदान के बीच 3 गांवों की चर्चा, जहां पसरा सन्नाटा, वोटर के घर पहुंचे अधिकारी
Lok Sabha Elections 2024: भारत में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनका समाधान करने में वर्षों लग जाते हैं। आम तौर पर इसकी बड़ी वजह सिर्फ शासन और प्रशासन स्तर कपर की गई लापरवाही ही होती है, जिसके लिए स्थानी नेता से लेकर बड़े अधिकारी तक जिम्मेदार होते हैं, और जब चुनाव आता है और नेताओं को दौरे होते हैं तो उन्हें जनता की खरी खोटी जमकर सुनने को मिलती है। लोकसभा चुनाव के तहत पांचवें चरण की वोटिंग के दौरान कुछ ऐसी ही सीटों का जिक्र करना जरूरी है। क्योंकि इस चरण में तीन ऐसी सीटें है, जहां कुछ मतदान केंद्रों पर वोटर्स ने चुनाव का पूरा तरह से बहिष्कार कर दिया है। हालांकि अधिकारी सुबह से उनके मुद्दों के समाधान के आश्वासन के साथ वोट की अपील करते रहे।
लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के तहत 6 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 49 सीटों पर मतदान हुआ। इस दौरान उत्तर प्रदेश की 2 और झारखंड में एक मतदान केंद्र ऐसे रहे जहां ग्रामीणों ने वोटिंग का बहिष्कार कर दिया। इन गावों में पहले से ही वोटिंग के बहिष्कार का ऐलान किया था, जिसमें कहा गया कि जब तक गांव में विकास नहीं होता, वोटिंग नहीं की जाएगी।

कौशांबी का हिसामपुर मरहो गांव
जिन गांव के लोगों को वोटिंग का बहिष्कार किया उनमें से एक कौशांबी जिले के हिसामपुर मरहो गांव हैं। जहां हजारों वोटर बूथ पर नहीं पहुंचे। वोटिंग के बहिष्कार को लेकर गांव के एक प्रमुख चौराहे पर पोस्टर भी लगाए गए। वोटिंग शुरू होने बाद ग्रामीणों का एक ग्रुप ने बूथ से कुछ दूरी पर विरोध प्रदर्शन भी किया।
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों को मुताबिक, हिसामपुर मरहो गांव में कोई विकास नहीं हुआ। क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों से बार-बार इसकी चर्चा की गई। लेकिन सरकारों ने अनसुना कर दिया। हिसामपुर मरहो के ग्राम प्रधान वीरेंद्र यादव ने कहा, "गांव के लिए कोई सड़क नहीं है। कहीं भी जाने के लिए रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए ट्रैक पार करना पड़ता है। लगभग एक दर्जन लोग ट्रेन से कटकर मर चुके हैं, लेकिन ओवरब्रिज बनाने का वादा पूरा नहीं हुआ।"
हालांकि यहां मतदान शुरू होने के बाद जब कोई वोटर पोलिंग बूथ पर नहीं पहुंचा तो उपमंडल मजिस्ट्रेट महेंद्र श्रीवास्तव और अन्य अधिकारियों को ग्रामीणों से मतदान करने का अनुरोध करते देखा गया। लेकिन वोटर इस बात अड़े रहे कि विकास नहीं तो वोट नहीं।
फैजाबाद लोकसभा सीट का परहाजी गांव
यूपी में बाराबंकी जिले का परहाजी गांव फैजाबाद लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है। यहां भी कौशांबी के हिसामपुर मरहो जैसा दृश्य है। दरअसल, परहाजी में कल्याणी नदी पर पुल की लंबे समय से मांग की जा रही है। लेकिन अब तक स्थानीय प्रशासन से लेकर किसी भी जन प्रतिनिधि या सरकार ने इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया। वहीं परहाजी के निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने एक पोंटून पुल बनाकर समस्या को शीघ्र हल करने की बात कही है। बता दें कि परहाजी गांव फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जिसका प्रतिनिधित्व 2014 से भाजपा के लल्लू सिंह कर रहे हैं।
झारखंड का कुसुम्भा गांव
झारखंड की हजारीबाग लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले कुसुम्भा गांव में भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही। जहां लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के तहत ग्रामीणों ने वोटिंग का बहिष्कार किया। हालांकि 2009 के चुनाव के बाद से यहां लगातार बीजेपी जीत दर्ज करती आई है। लेकिन इस बार गांव के 2,000 से अधिक मतदाताओं ने पोलिंग बूथ पहुंचने से इनकर दिया।
डिप्टी कमिश्नर नैन्सी सहाय ने मीडिया को बताया कि कुसुंभा में दो मतदान केंद्रों पर मतदाताओं ने चुनाव का बहिष्कार किया है। डीसी ने कहा, "एसपी अरविंद कुमार के साथ उन्हें वोट देने के लिए मनाने के लिए गांव गई थी। ग्रामीणों ने कहा था कि अगर पुल की उनकी मांग पूरी हो गयी तो वे मतदान करेंगे।"
वोटिंग के बहिष्कार की वजह
अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीणों ने नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन का हजारीबाग में एक संयंत्र है। जहां से ग्रामीओं ने एक पुल की मांग की थी। लेकिन एनटीपीसी ने एक अंडरपास बनाने का निर्णय लिया था। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग पूरी ना होने के चलते उन्हें पीने का पानी, आवश्यक सामान और चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच मुश्किल हो जाएगी। जिला प्रशासन ने कहा कि वह पिछले दो महीने से इस मुद्दे पर एनटीपीसी से बात कर रहा है।












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