Lok Sabha Election 2024: तमिलनाडु में बीजेपी रोडशो पर क्यों दे रही है जोर? विरोधियों को लगी मिर्ची!
Tamil Nadu Lok Sabha Election 2024: बीजेपी ने इस बार तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के परंपरागत तरीके में बदलाव की बड़ी कोशिश की है। पार्टी ने द्रविड़ राजनीति के लिए मशहूर रही बड़ी जनसभाओं की जगह, रोडशो पर ज्यादा जोर दिया है।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी तमिलनाडु में बिल्कुल ही बड़े नेताओं की जनसभाएं आयोजित नहीं कर रही है। लेकिन, ऐसी सभाएं बहुत कम आयोजित की जा रही हैं और उसकी जगह रोडशो पर पार्टी पूरी जोर लगा रही है।

तमिलनाडु में बड़े नेताओं के रोडशो पर बीजेपी का जोर
यहां तक कि जब एनडीए के लिए वोट मांगने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तमिलनाडु पहुंच रहे हैं तो पार्टी उनसे भी रोडशो करवाने पर ही ज्यादा ध्यान दे रही है।
बीजेपी के रोडशो से विरोधियों को क्यों लगी मिर्ची?
स्थिति यहां तक हो गई है कि भाजपा-विरोधी पार्टियों ने इस तरह के रोडशो की आलोचनाएं भी शुरू कर दी हैं। मसलन, एआईएडीएमके प्रमुख ईके पलानीस्वामी (EPS) ने हाल ही में एक जनसभा में बीजेपी के रोडशो को लेकर उसपर जोरदार हमला किया है। उन्होंने सवाल किया है कि क्या सिर्फ रोडशो में आकर लोग बीजेपी को वोट दे देंगे?
एआईएडीएमके के साथ-साथ डीएमके के नेताओं को भी लगता है कि भाजपा की इस तरह की कोशिशें बेकार हैं, क्योंकि जनता बिना जोरदार भाषण सुने कोई वोट नहीं देने वाली। लेकिन, रोडशो के पीछे भाजपा का मकसद और रणनीति अलग है।
बीजेपी को रोडशो में इस वजह से दिख रहा है फायदा
बीजेपी को लगता है कि अगर बड़े नेता रोडशो में शामिल होंगे तो उन्हें करीब से देखकर जनता आसानी से उनके साथ जुड़ सकेगी। पार्टी के रणनीतिकारों की उम्मीद है कि इससे चुनावों में काफी फायदा मिलेगा। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और कोयंबटूर से उम्मीदवार के अन्नामलाई ने तो पलानीस्वामी पर जोरदार पलटवार भी किया है।
पलानीस्वामी रोडशो करने आएंगे तो कितने लोग पहुंचेंगे- अन्नामलाई
अन्नामलाई ने कहा है कि अगर ईपीएस रोडशो करने आएंगे तो कितने लोग पहुंचेंगे। उन्होंने कहा, 'पलानीस्वामी अगर रोडशो करेंगे तो लोग उन्हें देखने नहीं आएंगे। इसलिए, वे लोगों को लेकर आते हैं, उन्हें टेंट में बिठाते हैं, जो भी लिखा होता है, उसे पढ़ देते हैं और उन्हें सुनने को मजबूर करते हैं।'
हम इसे 'जन दर्शन यात्रा' कहते हैं- कोयंबटूर से बीजेपी प्रत्याशी
उनका आगे कहना है, 'लेकिन, पीएम मोदी लोगों को देखने आते हैं और वे उन्हें देखने के लिए पहुंचते हैं। हम रोडशो को 'जन दर्शन यात्रा' कहते हैं।' उनके मुताबिक रोडशो जनसभाओं की ही एक विकल्प है।
राजनीति के जानकारों में रोडशो को लेकर बंटी है राय
बीजेपी के प्रदेश कोषाध्यक्ष एसआर शेखर का कहना है कि रोडशो से जनता और उनके नेताओं के बीच एक जुड़ाव बनता है। हालांकि, राजनीति के जानकारों की राय इसपर बंटी हुई है। मसलन, एक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीति के एक्सपर्ट आर मणि ने टीएनआईई से कहा है कि तमिलनाडु में रोडशो से अच्छा परिणाम नहीं लाया जा सकता है।
उत्तर भारत में कामयाब रहा है रोडशो- पॉलिटिकल एक्सपर्ट
लेकिन, राजनीति के जानकार रवींद्रन दुरईसामी शेखर के विचार से असहमत हैं। वे कहते हैं, 'परंपरागत राजनीति के एक विकल्प के रूप में तमिलनाडु बीजेपी ने रोडशो शुरू किया है, जो कि उत्तर में कामयाब रहा है।'
'पीएम की हीरो वाली छवि का निर्माण होगा'
वे कहते हैं, 'पर्याप्त वक्ताओं की कमी की वजह से हो सकता है कि बीजेपी रोडशो अपनाने के लिए मजबूर हुई हो। नरेंद्र मोदी के अलावा कोई भी नेता लोगों को आकर्षित नहीं कर पाएंगे। रोडशो से पीएम की हीरो वाली छवि का निर्माण होगा। इससे बीजेपी को फायदा होगा, क्योंकि जनता तक पहुंचने का यह आसान रास्ता है।'












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