Lok Sabha Election 2024: नीतीश को 'संयोजक' पद से ज्यादा चाहिए? 'इंडिया' पर दबाव बनाने लगा JDU

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इंडिया ब्लॉक का संयोजक बनाए जाने की बात लगभग तय मानी जा रही है। लेकिन, लगता है कि जेडीयू सुप्रीमो की नजर अब उससे भी ज्यादा पर चली गई है, जिसकी मांग उनकी पार्टी के नेताओं की ओर से काफी समय से हो रही है।

ललन सिंह को हटाकर नीतीश के जेडीयू अध्यक्ष बनते ही पार्टी ने जो तेवर दिखाने शुरू किए हैं, उसने कांग्रेस को हैरानी में डाल दिया है और इंडिया ब्लॉक में खलबली मचने लगी है।

nitish kumar and india bloc
  • नीतीश के निर्देश पर अरुणाचल वेस्ट से जेडीयू ने किया प्रत्याशी का एलान।
  • 2019 में अरुणाचल वेस्ट में दूसरे नंबर पर रही थी कांग्रेस।
  • सीतामढ़ी सीट से देवेश चंद्र ठाकुर को दिया टिकट का भरोसा।
  • नीतीश को इंडिया ब्लॉक का संयोजक बनाए जाने की है चर्चा।
  • अध्यक्ष बनने के बाद जेडीयू ने नीतीश को बताया इंडिया ब्लॉक के विचारों का 'प्रधानमंत्री'।

एकतरफा उम्मीदवारों के एलान में जुटा जेडीयू
जेडीयू ने न सिर्फ अरुणाचल वेस्ट लोकसभा सीट से प्रत्याशी के नाम का एकतरफा एलान किया है, बल्कि बिहार में भी बिना सीट तय हुए उसने अपनी पार्टी के नेताओं को मौखिक टिकट बांटना शुरू कर दिया है।

दबाव की रणनीति में जुटे नीतीश?
विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक में बिहार को लेकर सीटों के बंटवारे पर बातचीत अभी ठीक से शुरू भी नहीं हो पायी है, ऐसे में नीतीश के पैंतरे देखकर लग रहा है कि वह विपक्षी गठबंधन की अगली बैठक से पहले दबाव की रणनीति में जुट गए हैं।

तेजस्वी ने की है नीतीश को संयोजक बनाने की पैरवी
एक दिन पहले ही नीतीश के डिप्टी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने उनके बारे में कहा है कि वे बहुत अनुभवी नेता हैं और उन्हें इंडिया गठबंधन का संयोजक बनाने का प्रस्ताव आता है तो अच्छा रहेगा।

तेजस्वी ने गया में कहा 'नीतीश कुमार काफी वरिष्ठ नेता हैं। अगर ऐसा प्रस्ताव आता है, तो यह बिहार के लिए बहुत अच्छा होगा।'

संयोजक पद से आगे की सोच रहे हैं नीतीश?
जब नीतीश को विपक्षी दल इतनी अहम जिम्मेदारी देने की सोच रहे हैं, तब जेडीयू बिना सीटों का बंटवारा किए जिस तरह से एकतरफा प्रत्याशियों के नाम तय कर रहा है, उससे लगता है कि नीतीश कुमार के मन में कुछ बड़ा चल रहा है।

क्योंकि, अरुणाचल प्रदेश की दोनों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस 2019 के चुनावों में दूसरे नंबर पर रही थी। जबकि, बुधवार को जेडीयू ने अरुणाचल वेस्ट सीट पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रूही तागुंग का नाम प्रत्याशी के रूप में घोषित कर दिया।

इसके बारे में जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्वोत्तर में पार्टी के इंचार्ज अफाक अहमद खान ने कहा, 'यह घोषणा जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के निर्देश के अनुसार की जा रही है।'

अरुणाचल की दोनों सीटों पर हमारा मजबूत जनाधार- कांग्रेस
स्वभाविक तौर पर कांग्रेस नीतीश के इस फैसले से हैरान है। अरुणाचल में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बोसीराम सिरम ने टीओआई से कहा है, 'अरुणाचल प्रदेश में लोकसभा की दो सीटें हैं- अरुणाचल पश्चिम और अरुणाचल पूर्व। दोनों सीटों पर कांग्रेस का एक मजबूत जनाधार है और पार्टी दोनों ही सीटों से अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है।'

हालांकि, उन्होंने जेडीयू के फैसले पर टिप्पणी करने से इकार कर दिया। अरुणाचल वेस्ट सीट से अभी केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता किरेन रिजिजू सांसद हैं और पिछली बार उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश अद्यक्ष नबाम तुकी को हराया था।

नीतीश के फैसले से बिहार के कांग्रेस नेता भी चिंतित
नीतीश के फैसले ने बिहार में भी कांग्रेस नेताओं को चिंता में डाल दिया है। क्योंकि, बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष देवेश चंद्र ठाकुर पहले ही दावा कर चुके हैं कि जेडीयू ने उन्हें सीतामढ़ी लोकसभा सीट से टिकट देने का वादा किया है।

बिहार कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा है, 'इंडिया ब्लॉक के एक महत्वपूर्ण सहयोगी होने के नाते जेडीयू को सीटों के बंटवारे से पहले उम्मीदवारों के नाम नहीं घोषित करने चाहिए।'

उन्होंने कहा कि 'सिर्फ अरुणाचल में ही नहीं, बल्कि बिहार में भी जेडीयू के कुछ सीनियर नेता लोकसभा चुनावों के लिए खुद को उम्मीदवार घोषित कर रहे हैं। सहयोगियों में इससे गलत संकेत जा रहा है।'

सीटों के बंटवारे की नीतीश को ही मिली है जिम्मेदारी
तथ्य यह है कि जेडीयू के अध्यक्ष बनने के साथ नीतीश को इंडिया ब्लॉक में सीटों के बंटवारे पर बातचीत और फैसला लेने की जिम्मेदारी भी मिली हुई है। ऐसे में उन्हें पूरा पता है कि पार्टी जिस तरह से गठबंधन में बात किए बिना एकतरफा फैसले ले रही है, उससे इसकी सेहत पर क्या असर पड़ सकता है।

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इंडिया ब्लॉक के विचारों के 'प्रधानमंत्री'- जेडीयू नेता
अब नीतीश के अध्यक्ष बनने वाले दिन पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता केसी त्यागी के बयान पर गौर कीजिए। नीतीश सार्वजनिक तौर पर यही कहते रहे हैं कि उन्हें तो किसी पद का मोह नहीं है। लेकिन, उस दिन त्यागी ने उन्हें इंडिया ब्लॉक का 'संयोजक' और इसे आगे बढ़ाने वाले विचारों का 'प्रधानमंत्री' बताया था।

त्यागी का यह बयान बहुत ही चतुराई से पार्टी के उन्हीं नेताओं के बयान का समर्थन है, जो काफी समय से नीतीश को इंडिया ब्लॉक का पीएम उम्मीदवार बनाए जाने की मांग करते आ रहे हैं।

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