Lok Sabha Election 2024: कांग्रेस ने तय किया सीट-शेयरिंग का फॉर्मूला, इन सभी राज्यों में अकेले लड़ेगी?
लोकसभा चुनावों के लिए विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया में सीटों के बंटवारे पर अबतक किसी तरह की तस्वीर सामने नहीं आ पाई है। सभी दल अपने-अपने हिसाब से फॉर्मूले तय करनें में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस का भी एक रोचक फॉर्मूला सामने आया है।
सत्य हिंदी डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने जो 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए अपना फॉर्मूला तय किया है, उसके हिसाब से पार्टी 10 से ज्यादा बड़े राज्यों, पूर्वोत्तर के सभी 7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (एक को छोड़कर) में अकेले चुनाव लड़ेगी।

- कांग्रेस 20 राज्यों और एक को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेशों में अकेले लड़ेगी!
- करीब 234 सीटों पर किसी के साथ तालमेल नहीं करेगी!
- 10 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में ही तालमेल की तैयारी!
- सहयोगी दलों के साथ तालमेल के तहत 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी!
- पूर्वोत्तर के किसी भी राज्य में कोई गठबंधन नहीं करेगी!
20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में अकेले लड़ेगी
इस तरह से कांग्रेस 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 234 सीटों पर किसी भी सहयोगी के साथ सीटों का तालमेल नहीं करेगी और अपने दम पर बीजेपी या क्षेत्रीय दलों के साथ दो-दो हाथ करना चाहेगी।
10 राज्यों और लक्षद्वीप में गठबंधन में चुनाव लड़ेगी
जिन राज्यों में कांग्रेस फिलहाल सहयोगी दलों के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ने का इरादा रखती है, उनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु, जम्मू और कश्मीर और झारखंड जैसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप शामिल हैं।
ये सारे वे राज्य हैं, जहां सीटों के बंटवारे को लेकर इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों की बीच बातचीत चल रही है। इनमें भी केरल की स्थिति बहुत ही दिलचस्प है।
यहां सत्ताधारी गठबंधन एलडीएफ और विपक्षी गठबंधन यूडीएफ दोनों इंडिया अलायंस के पार्टनर हैं; और कांग्रेस की ओर से गठबंधन का मतलब उसी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के सहयोगियों के बीच तालमेल से है, जिसकी अगुवा कांग्रेस खुद है। यहां इंडिया अलायंस के सहयोगियों में पूर्ण तालमेल लगभग 'असंभव' लग रहा है।
गठबंधन वाली सीटों पर करीब 100 सीटों है लड़ने का टारगेट
कांग्रेस आलाकमान की ओर से सीटों के बंटवारे की बातचीत में लगे प्रदेश नेताओं को यह तो हिदायत दी गई है कि वह सहयोगी दलों से चर्चा के दौरान लचीला रुख अपनाएं।
साथ ही यह भी कह दिया गया है कि किसी भी सूरत में उन सीटों पर समझौता न करें, जहां पार्टी 2019 में दूसरे नंबर पर रही थी। इस तरह से पार्टी इन राज्यों में सहयोगी पार्टियों से अपने लिए कम से कम 100 सीटें हासिल करने का टारगेट लेकर चल रही है।
इन 20 राज्यों में अकेले चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
अब उन राज्यों की बात जहां कांग्रेस सिर्फ अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने का मंसूबा लेकर चल रही है। इनमें 13 बड़े राज्य, पूर्वोत्तर के सभी 7 राज्य और लक्षद्वीप के अलावा सभी केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
कांग्रेस जन राज्यों में अकेले चुनाव लड़ना चाहती है, वे हैं- मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, गोवा, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के 7 राज्य।
इस तरह से ऐसे राज्यों की संख्या 20 है, जहां कांग्रेस सहयोगी दलों के साथ कोई तालमेल नहीं करेगी। अगर इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों की संख्या की बात करें तो यह 234 सीटें होंगी, जिसपर कांग्रेस खुद चुनाव लड़ना चाहेगी।
कांग्रेस के मंसूबे को जेडीयू ने लगाया पहला पलीता
यानी कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने लिए मिशन 300 से कहीं आगे निकलने का मंसूबा लेकर चल रही है। वैसे जिस तरह से बुधवार को इंडिया अलायंस की एक सहयोगी जेडीयू ने अरुणाचल वेस्ट में अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, उससे कांग्रेस के इरादे को पलीता लगता दिख रहा है।
इस तरह से कांग्रेस ने जिन राज्यों में अकेले चुनाव लड़ने का इरादा जाहिर किया है, उनमें से अरुणाचल प्रदेश, गुजरात और गोवा (आम आदमी पार्टी की दावेदारी हो सकती है) के अलावा इंडिया अलायंस में उसे शायद बहुत ज्यादा दिक्कत शायद न भी हो, लेकिन जिन राज्यों में तालमेल के तहत पार्टी 100 सीटें लड़ना चाहती है, वह फिलहाल मुश्किल ही नहीं बहुत ही ज्यादा मुश्किल लग रहा है।












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