Lok Sabha Election 2024: किन राज्यों में बीजेपी का कंट्रोल अपने हाथों में रखेंगे अमित शाह?
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस बार भी लोकसभा चुनावों में कुछ राज्यों में पार्टी का नियंत्रण पूरी तरह अपने हाथों में रखने वाले हैं। हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पार्टी संगठन पर शाह की सीधी पकड़ थी और ऐसे नतीजे आए, जिसके बारे में चुनावी जानकारों को भी भनक नहीं लग पाई।
2024 के लोकसभा चुनावों में कुछ राज्यों में पार्टी संगठन का नियंत्रण खुद अमित शाह अपने हाथों में रखने वाले हैं। ये पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना जैसे कुछ राज्य हैं। विपक्ष शासित इन राज्यों में 2019 से पहले पार्टी का कोई खास वजूद नहीं था। 2019 में शाह ने इन पर खास जोर लगाया और बीजेपी को बहुत ज्यादा फायदा मिला।

बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना जैसे राज्यों पर शाह का फोकस
2024 के लोकसभा चुनावों की तैयारियों के सिलसिले में शाह 26 दिसंबर को बंगाल और 28 को तेलंगाना जाने वाले हैं। उनका यह दौरा पूरी तरह से पार्टी संगठन के लिए समर्पित है। इस दौरान वह कोई जनसभा संबोधित नहीं करेंगे। उनका पूरा फोकस 2024 के लिए चुनावों की तैयारियों पर रहने वाला है।
संभावना है कि वह इन राज्यों में पार्टी की लोकसभा चुनावों की तैयारियों का जायजा लेंगे और पार्टी के नेताओं को समयबद्ध तरीके से निश्चित किए गए कार्यक्रमों को पूरा करने के निर्देश देंगे।
शाह के 'टारगेट' वाले राज्यों में भाजपा को मिलता है बड़ा फायदा
भाजपा सूत्रों ने ईटी से बातचीत में बताया है कि इस बार भी बंगाल, तेलंगाना और ओडिशा जैसे कुछ राज्यों का नियंत्रण अमित शाह खुद अपने हाथों में रखने वाले हैं। किसी चुनाव का नियंत्रण शाह के हाथों में जाने का नतीजा बीजेपी 2014 से ही लगातार देखती आ रही है।
शाह के नेतृत्व में 303 सीटें जीत चुकी है बीजेपी
उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनावों में पूरी तरह से यूपी की कमान संभाली थी और एनडीए ने राज्य की 80 में से 73 सीटें जीतें ली थी। बीजेपी के लिए यह जीत आज भी ऐतिहासिक है। 2019 में पार्टी अध्यक्ष के तौर पर उनपर पूरे देश में भाजपा को चुनाव जितवाने की जिम्मेदारी थी और पार्टी 543 में से 303 सीटें जीत गई, जो इसके लिए अबतक का रिकॉर्ड है।
2019 में तीनों राज्यों में शाह की रणनीति से भाजपा को मिला था फायदा
तब शाह ने खास तौर पर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना जैसे राज्यों में पार्टी संगठन में जान फूंकने के लिए खुद बहुत मेहनत की थी। इसका परिणाम ये हुआ कि बंगाल में पार्टी 2 से 18 पर पहुंच गई, ओडिशा में भाजपा के 8 सांसद जीत गए और तेलंगाना से पहली बार 4 उम्मीदवार जीतकर लोकसभा में दाखिल हुए।
इस बार भाजपा का टारेगट विशाल है, इसलिए शाह ने अभी से इन तीनों राज्यों में फोकस करना शुरू कर दिया है। पार्टी को लगता है कि अभी भी उसके लिए इन तीनों राज्यों में अपना ग्राफ बढ़ाने की पूरी गुंजाइश है और अगर लक्ष्य कुल 350 सीटों का है तो यहां पिछली बार से भी ज्यादा बेहतर प्रदर्शन की आवश्यकता पड़ेगी।
एमपी और छत्तीसगढ़ में भी दिखा है शाह का कमाल
अभी जिन पांच राज्यों में विधानसभा संपन्न हुए हैं, उनमें एमपी और छत्तीसगढ़ में भाजपा की जीत की संभावनाएं नहीं जताई जा रही थीं। ओपिनियन पोल पार्टी के खिलाफ आ रहे थे। शाह ने चुनावों से पहले दोनों राज्यों में पार्टी संगठन का पूरा नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया था। उन्होंने संगठन को वक्त की जरूरत के हिसाब से चुस्त-दुरुस्त किया; और नतीजा बीजेपी को ऐसी जीत मिली, जिसकी शायद उसने भी उम्मीद नहीं की थी।
यही वजह है लोकसभा चुनावों के लिए भी उनके नेतृत्व में विपक्ष-शासित कुछ राज्यों में इसी तरह की कार्य-योजना पर काम चल रहा है। यहां बूथ से प्रदेश स्तर तक पार्टी कार्यकर्ताओं से ज्यादा से ज्यादा लोगों को बीजेपी के साथ जोड़ने और समर्थकों का एक पूरा नेटवर्क तैयार करने को कहा जा सकता है।
तीसरी बार, मोदी सरकार के लिए शाह का प्लान तैयार
तेलंगाना में अभी-अभी कांग्रेस की सरकार बनी है। यहां पार्टी की कोशिश है कि पिछली बार के प्रदर्शन को और बेहतर किया जा सके। इसके पीछे वजह ये है कि बीजेपी को लगता है कि लोकसभा चुनावों का पैटर्न अलग होता है और इसमें मतदाता राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत और स्थायी सरकार को प्राथमिकता देते हैं।
वे अमित शाह ही हैं, जिन्होंने हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के सामने 2019 के मुकाबले अगले लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी की तीसरी बार भारी बहुमत वाली सरकार बनाने के लिए पार्टी के वोट शेयर में 10% से अधिक की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा है। लिहाजा वे खुद भी इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अभी से एक्शन मोड में आते दिख रहे हैं।












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