SC के फैसले पर टिप्पणी के बाद अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अवमानना की याचिका
नई दिल्ली। उपराज्यपाल बनाम दिल्ली सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने सवाल उठाए थे। अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि ये फैसला संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है। केजरीवाल के इसी बयान पर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका में कहा गया है कि कोर्ट के फैसले को संविधान के खिलाफ बताकर अरविंद केजरीवाल ने अदालत की अवमानना की है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ-केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है। केजरीवाल ने कहा कि जब उनके पास किसी तरह का अधिकार ही नहीं होगा तो वे दिल्ली में सरकार किस तरह से चलाएंगे। अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि मुख्यमंत्री के पास एक चपरासी को भी ट्रांसफर करने की पावर नहीं है, यह गलत जजमेंट है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को 3 सीट मिली उसके पास ट्रांसफर-पोस्टिंग का पावर होगा। ये कैसा जनतंत्र है, ये कैसा ऑर्डर है।

केजरीवाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई
एलजी बनाम दिल्ली सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों के फैसलों में कुछ मुद्दों पर मतभेद दिखाई दिया था। सेवा से जुड़ा मामला बड़ी बेंच के पास भेज दिया गया था। वहीं, जस्टिस सीकरी ने अपने फैसले में कहा था कि एसीबी केंद्र सरकार के अधीन है, उन्होंने कहा कि संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के अधिकारियों की पोस्टिंग-ट्रांसफर एलजी के अधिकार क्षेत्र में हैं और अन्य अधिकारी दिल्ली सरकार के अधीन आते हैं। सेवा के मामले पर जस्टिस भूषण की राय एक नहीं थी।

अरविंद केजरीवाल पर बीजेपी ने बोला था हमला
अरविंद केजरीवाल के बयान के बाद बीजेपी ने उनपर हमला बोला था। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल हमेशा अराजकता फैलाते रहे हैं। वे संविधान को दांव पर लगाकर नियमों के साथ अक्सर छेड़छाड़ करते रहते हैं। जबकि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल को संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है। वे निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हैं, कैग से लेकर सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाते हैं।












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