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Leader of Opposition: लोकसभा में LOP के पास क्या है अधिकार? 10 साल से खाली था पद, अब कांग्रेस को मौका

Leader of Opposition in Lok Sabha: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद पिछले 10 वर्षों से खाली था। 18वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को नेता प्रतिपक्ष के पद पर अपने किसी सांसद को नियुक्त करने का मौका मिला है। पहली लोकसभा से अबतक ऐसा 8 बार हो चुका है, जब निम्न सदन का यह महत्वपूर्ण पद खाली रहा है।

लोकसभा में सत्ताधारी बीजेपी के 240 सांसदों के बाद प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के पास सबसे अधिक 99 सांसद हैं। कांग्रेस सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है और इस नाते उसे नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के पद पर अपने किसी सांसद को नियुक्त करने का अधिकार है।

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कौन बन सकता है नेता प्रतिपक्ष?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को नियुक्त किया जा सकता है। यह पद विपक्षी गठबंधन के नेता को नहीं दिया जाता, बल्कि सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता के लिए ही निर्धारित है।

10 साल से क्यों खाली था नेता प्रतिपक्ष का पद?
नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए यह आवश्यक है कि सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के सांसदों की संख्या लोकसभा के कुल सांसदों की संख्या के 10वें भाग से कम ना हो। 2014 और 2019 यानी 16वीं और 17वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के सांसदों की संख्या सत्ताधारी बीजेपी के बाद सबसे ज्यादा तो थी, लेकिन यह सदन के कुल सदस्य संख्या 543 के 10वें भाग से कम थी।

2014 में कांग्रेस महज 44 सीटें जीती थी और 2019 में 52 सीटों पर सिमट गई थी। लेकिन, इस बार उसे कुल 99 सीटें मिली हैं और उसे नेता प्रतिपक्ष के पद पर अपने सांसद को बिठाने का अधिकार मिल गया है।

कब-कब खाली रहा नेता प्रतिपक्ष का पद?
पंडित जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में पहली, दूसरी और तीसरी लोकसभा में कोई भी विपक्षी दल नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए योग्य नहीं था, इसीलिए यह पद खाली रह गया।

इसी तरह पांचवीं, सातवीं, आठवीं, सोलहवीं और सतरहवीं लोकसभा में भी सत्ताधारी दल के प्रचंड बहुमत की वजह से कोई भी विपक्षी दल कुल सदस्य संख्या के 10% के मानदंड को पूरा नहीं कर पाया और यह पद खाली ही रखना पड़ा।

इस तरह से कुल 8 बार ऐसे मौके आए, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद खाली रहा। पहली बार चौथी लोकसभा में निम्न सदन को नेता प्रतिपक्ष का पद हासिल हो पाया और राम सुभाग की इस पद पर नियुक्ति की गई।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LOP) के अधिकार और शक्तियां?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष विभिन्न महत्वपूर्ण वैधानिक पदों के प्रमुखों और सदस्यों की नियुक्ति समितियों का सदस्य होता है। इनमें चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के साथ-साथ केंद्रीय सतर्कता आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, सीबीआई, एनएचआरसी और लोकपाल जैसी वैधानिक संस्थाओं में शीर्ष पदों पर नियुक्तियां शामिल हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष लोक लेखा समिति, सार्वजनिक उपक्रम, अनुमान समितियों जैसी महत्वपूर्ण समितियों का सदस्य होता है, साथ ही विभिन्न संयुक्त संसदीय समितियों का भी सदस्य होता है।

नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा
कुल मिलाकर नेता प्रतिपक्ष लोकसभा में विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा होता है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद के बारे में संविधान में तो जिक्र नहीं है, लेकिन इसे केंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है और संसद में विपक्ष के नेता के वेतन और भत्ता अधिनियम, 1977 के तहत उसी के (कैबिनेट मंत्री) समान वेतन, आवास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं।

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