भूमि अधिग्रहण पर लड़ाई एक, पर जंतर-मंतर पर सजे तीन मंच
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) राजधानी का विरोध स्थल बन गया जंतर-मंतर का मंजर कल बड़ा अजीब था। वहां पर भूमि अधिग्रहण विधेयक का विरोध करने के लिए तीन मंच लगे थे। एक पर अन्ना हजारे, राजेन्द्र सिंह,अरविंद केजरीवाल,सुनीलम बैठे थे। इसे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चला रही थी। दूसरा मंच यूपी के किसानों का नेतृत्व कर रहे बी.एम सिंह के लिए था। इसी तरह से एक मंच से भाकपा का विरोध हो रहा था विधेयक पर।
नारेबाजी होती रही
तीनों के कार्यकर्ता और समर्थक विधेयक के विरोध में नारे लगा रहे थे। नेता गर्मा-गर्म भाषण दे रहे थे। पर एक सवाल पर तीन मंचों के बनने से कुछ लोग नाराज भी दिखे।
निराशाजनक नजारा
देश के प्रख्यात कृषि मामलों के जानकार डा.देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि उन्हें कल जंतर मंतर पर यह सारा नजारा देखकर बहुत निराशा हुई। इतने बड़े सवाल पर ये सभी एक साथ नहीं आ पाए। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि जनआंदोलन करने वाली शक्तियां एक साथ खड़ी नहीं हो पाईं।
गर्म हुए अन्ना हजारे
इस बीच,अन्ना ने अध्यादेश के खिलाफ तल्ख तेवर दिखाते हुए कहा कि आने वाले 3-4 महीनों में किसान बड़ा आंदोलन करेंगे। अन्ना ने इन बदलावों को किसान विरोधी बताया है। उन्होंने कहा है कि भूमि अधिग्रहण में किए गए बदलावों की वजह से किसानों से सरकार उनका हक छीन रही है।
अन्ना ने सरकार के बदलावों को किसान विरोधी और उद्योगपतियों के लिए फायदेमंद बताया है। नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून में किए गए संशोधन के खिलाफ अन्ना हजारे का साथ देने के लिए किसान भी जंतर मंतर पहुंच रहे हैं।
अन्ना ने कहा कि सरकार ने नारा दिया था कि अच्छे दिन आने वाले हैं, तो वो अच्छे दिन कब आएंगे। क्या ये अच्छे दिन सिर्फ बड़े बिल्डर्स के लिए आने वाले हैं। अध्यादेश उद्योगपतियों के लिए है। इतना अन्याय तो अंग्रेजों ने भी नहीं किया। आप नेता मीरा सान्याल भी यहां पहुंची। उन्होंने कहा कि वो भी इस कानून के विरोध में हैं और जंतर मंतर पर अन्ना का साथ देने आई हैं।
अधिग्रहण कानून में किए जा रहे संशोधन के खिलाफ अन्ना हजारे का आयोजित यह धरना दो दिन का होगा। इस धरने में हिस्सा लेने के लिए हजारों किसानों के दिल्ली पहुंचने की संभावना है।













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