Aisha Sultana:'डर' वो चीज है जो मेरे पास नहीं, ऐसा कहने वाली राजद्रोह के आरोपों में फंसीं अभिनेत्री कौन हैं ?
तिरुवनंतपुरम, 11 जून: लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल को एक टीवी डिबेट में 'बायो-बेपन' कहकर सुर्खियों में आईं आयशा सुल्ताना अब राजद्रोह के आरोपों में घिर चुकी हैं। लेकिन,उनके तेवरों से देखकर लगता है कि वह इस कानूनी हमले से भी डरने वाली नहीं हैं। एक तो वह अपने बयान पर अड़ी हुई हैं और दूसरा ये भी कह रही हैं कि डर नाम की चीज उनके अंदर है ही नहीं। जो भी हो इस विवाद की वजह से वह पूरे भारत में सुर्खियों में आ चुकी हैं और सोशल मीडिया पर भी इस मामले में उनका समर्थन करने वालों की कमी नहीं है। उनपर दर्ज हुए मुकदमे का अंजाम क्या होगा ये कहना तो मुश्किल है, लेकिन उनके बारे में जानने की लोगों की दिलचस्पी बहुत ही ज्यादा बढ़ चुकी है।

'डर' वही चीज है जो मेरे पास नहीं है'
लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल को बायो-वेपन कहने के बाद जब आयशा सुल्ताना के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ है तो उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर मलयालम में तंज कसने की कोशिश की है। उनकी इस प्रतिक्रिया का फेसबुक के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने हिंदी में जो तर्जुमा किया है, उसका शाब्दिक अर्थ कुछ इस तरह से है-" 'डर' वही चीज है जो मेरे पास नहीं है और जो मेरे अंदर है। जय हिन्द।" मतलब साफ है कि उन्होंने अपने खिलाफ शुरू हुए ऐक्शन के विरोध में अपने अंदाज में ऐलान ए जंग कर दिया है। उनकी इस टिप्पणी पर खबर लिखे जाने तक 15 हजार से ज्यादा लाइक्स और 2 हजार से ज्यादा कंमेंट मिल चुके थे और यह सिलसिला लगातार जारी है। लक्षद्वीप और बाहर उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगता है कि फेसबुक पर ही उनके 11 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। लक्षद्वीप के लिए उनके प्रेम इस तरह से समझा जा सकता है कि उन्होंने फेसबुक प्रोफाइल में ही अपना नाम आयशा लक्षद्वीप लिख रखा है।
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कौन हैं आयशा सुल्ताना ?
आयशा सुल्ताना ने फेसबुक पर खुद का परिचय ऐक्ट्रेस और प्रिंट एंड कैमरा शूट का प्रमोशनल मॉडल बताया है। उन्होंने प्रोफाइल पिक्चर में भी जो तस्वीर लगा रखी है, उससे जाहिर होता है कि फोटाग्राफी उनकी पसंदीदा चीज है, जो लक्षद्वीप की खूबसूरती की वजह से शायद उन्हें बचपन से मिली है। आयशा सुल्ताना लक्षद्वीप के चेटियाथ द्वीप की रहने वाली हैं। वो लक्षद्वीप प्रशासक की ओर से वहां के लिए किए जा रहे बदलावों के खिलाफ भी आवाज उठाती रही हैं, जिसकी स्थानीय स्तर से लेकर इस केंद्र शासित प्रदेश के बाहर भी आलोचना हो रही है। वह मॉडल होने के साथ-साथ ऐक्ट्रेस और उभरती हुई फिल्ममेकर भी हैं। वह मलयालम फिल्म उद्योग में कई सारे फिल्मकारों के साथ काम कर चुकी हैं। पहले वह मलयालम फिल्म केट्टोयोलानु एंटे मलाखा में एसोसिएट डायरेक्टर के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। 2020 में वो मलयालम फिल्म 'फ्लश' में डायरेक्टर के तौर पर भी स्वतंत्र रूप से काम कर चुकी हैं। डायरेक्टर के तौर पर यह उनकी पहली फिल्म थी।

आयशा के खिलाफ राजद्रोह का केस क्यों हुआ है?
एक मलयालम टीवी चैनल पर बहस के दौरान आयाशा ने कथित तौर पर कहा कि, 'लक्षद्वीप में कोविड-19 के शून्य केस थे। अब रोजाना 100 केस सामने आ रहे हैं। क्या केंद्र ने बायो-वेपन तैनात किया है। मैं स्पष्ट रूप से कह सकती हूं कि केंद्र सरकार ने बायो-वेपन (जैव-हथियार) तैनात किया है।' उनके इसी बयान के खिलाफ लक्षद्वीप में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल खादर हाजी ने उनके खिलाफ कवरत्ती पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि सुल्ताना ने जो कुछ कहा, वह राष्ट्र-विरोधी कार्य है, जिससे केंद्र सरकार के 'देश भक्त' छवि पर बट्टा लगा है। इसके बाद उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। यह केस आईपीसी की धारा 124 ए(राजद्रोह) और 153 बी (भड़काऊ भाषण) के तहते कवरत्ती थाने में दर्ज की गई है।

अपनी सफाई में क्या कह रही हैं आयशा ?
हालांकि, अपने एक हालिया फेसबुक पोस्ट में सुल्ताना ने अपने बयान को सही ठहराते हुए लिखा है, 'मैंने टीवी चैनल की बहस में बायो-वेपन शब्द का इस्तेमाल किया। मैंने महसूस किया कि पटेल और उनकी राजनीति ने जैव-हथियार की तरह काम किया है। पटेल और उनके प्रभाव की वजह से ही लक्षद्वीप में कोविड-19 फैला है। मैंने पटेल की तुलना जैव-हथियार से की है, न कि सरकार या देश की।......आपको समझना चाहिए। मुझे उनको और क्या कहना चाहिए......' (तस्वीरें- आयाशा सुल्ताना के फेसबुक से साभार)












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