लखीमपुर खीरी हिंसा: आशीष मिश्रा की फिर हो सकती है गिरफ्तारी, जमानत रद्द कराने के लिए SC पहुंचे पीड़ित परिवार
नई दिल्ली, फरवरी 21। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में मारे गए किसानों के परिवारवालों ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा टेनी की जमानत का विरोध किया है। पीड़ित परिवारों ने आशीष मिश्रा को दी गई जमानत को रद्द करने की मांग की है और इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। आपको बता दें आशीष मिश्रा लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी हैं और पिछले साल अक्टूबर में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन इसी महीने उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।

प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिका
आशीष मिश्रा की जमानत के विरोध में पीड़ित किसानों के परिवारों ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तमाम सबूतों और गवाहों के होने के बाद भी मंत्री के बेटे को जमानत दे दी, इसलिए ये पीड़ित परिवारों के साथ नाइंसाफी है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इसलिए पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंचे हैं।
पीड़ित परिवारों की याचिका में की गई है ये मांग
- याचिका में आगे कहा गया है कि हाईकोर्ट ने अपराध की जघन्य प्रकृति पर विचार किए बिना आशीष मिश्रा को जमानत दे दी। आरोप पत्र में आरोपी के खिलाफ भारी सबूतों की प्रकृति, पीड़ित और गवाहों के बयान का जिक्र था। इसके अलावा चार्जशीट में आरोपी के कानूनी प्रक्रिया से भागने और सबूतों-गवाहों के साथ छेड़छाड़ की संभावना व्यक्त की गई थी।
- याचिका में यह भी कहा गया है कि पीड़ितों को संबंधित सामग्री को उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाने से रोका गया क्योंकि उनके वकील 18 जनवरी, 2022 को जमानत याचिका पर हुई सुनवाई से अलग हो गए थे।
- याचिका में कहा गया है कि पीड़ित परिवारों ने जब आशीष मिश्रा की जमानत के विरोध में याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की तो उसे खारिज कर दिया गया।
- इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि पीड़ित परिवारों को सुप्रीम कोर्ट का रूख इसलिए करना पड़ा, क्योंकि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल करना जरूर नहीं समझा।












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