Kota Neelima: विदेशी फंडिंग के आरोपों पर आगबबूला हुई दिग्गज कांग्रेस नेता की पत्नी, किसे दी चेतावनी?
Kota Neelima: सोशल मीडिया पर हाल ही में एक विस्तृत थ्रेड वायरल होने के बाद भारतीय राजनीति और मीडिया गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। इस थ्रेड में कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक कथित 'विदेशी फंडिंग' वाले मीडिया नेटवर्क का दावा किया गया है। इसके सेंटर में लेखिका और कांग्रेस नेता कोटा नीलिमा का नाम प्रमुखता से लिया गया है। कोटा नीलिमा, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा की पत्नी हैं।
नीलिमा ने इन आरोपों को "मनगढ़ंत और मानहानिकारक" करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि वह इन दावों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठा रही हैं। वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि कोटा नीलिमा एक ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का हिस्सा हैं, जो विदेशी संस्थाओं से फंड प्राप्त करता है और मीडिया के माध्यम से विशिष्ट विमर्श (Narratives) को बढ़ावा देता है।

PROTO संगठन का जिक्र
थ्रेड में दिल्ली स्थित एक संगठन PROTO का जिक्र किया गया है। दावा है कि इसकी स्थापना 2018 में अमेरिका के 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर जर्नलिस्ट्स' (ICFJ) से जुड़े लोगों द्वारा की गई थी। आरोप है कि इस माध्यम से विदेशी पैसा भारत में लाया गया और उन पत्रकारों को मंच दिया गया जो केंद्र सरकार के आलोचक रहे हैं।
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विभिन्न प्लेटफॉर्म से जुड़ाव
पोस्ट में आरोप लगाया गया कि नीलिमा 2017 के बाद से Institute of Perception Studies, Rate The Debate, Hakku Initiative और StudioAdda जैसे कई प्लेटफॉर्म के जरिए सक्रिय रहीं। थ्रेड में दावा किया गया कि इस नेटवर्क के वैचारिक तार कुछ धार्मिक संगठनों से जुड़े हैं। कांग्रेस पार्टी की विदेशी यात्राओं और उनके रुख के पीछे इसी नेटवर्क का हाथ है। हालांकि, इन दावों के समर्थन में अब तक कोई आधिकारिक दस्तावेज या सरकारी रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया है।
कौन हैं कोटा नीलिमा? (Who is Kota Neelima?)
कोटा नीलिमा भारत की एक प्रतिष्ठित लेखिका, शोधकर्ता, पत्रकार और राजनीतिज्ञ हैं। नीलिमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पीएचडी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की है। वह जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय, वाशिंगटन डीसी में सीनियर रिसर्च फेलो भी रही हैं।
उन्होंने एक वरिष्ठ पत्रकार के रूप में द इंडियन एक्सप्रेस और द संडे गार्डियन जैसे संस्थानों में काम किया है। वह ग्रामीण संकट और किसानों की आत्महत्या जैसे गंभीर विषयों पर अपनी पकड़ के लिए जानी जाती हैं। उनकी पुस्तक "Widows of Vidarbha" काफी चर्चित रही है।
नीलिमा सक्रिय रूप से कांग्रेस पार्टी से जुड़ी हुई हैं। वह तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) की पूर्व उपाध्यक्ष रह चुकी हैं और कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सदस्य के रूप में भी पहचानी जाती हैं। 2023 में उन्होंने तेलंगाना विधानसभा चुनाव में सनथनगर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। वह 'इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज' (IPS) की निदेशक हैं और 'हक्कू इनिशिएटिव' (Hakku Initiative) जैसे अभियानों के जरिए सामाजिक और नागरिक मुद्दों पर काम करती हैं।
'यह छवि बिगाड़ने की साजिश है'
इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कोटा नीलिमा ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ फैलाई जा रही बातें पूरी तरह झूठी हैं। उन्होंने इसे उनकी छवि खराब करने के लिए रची गई एक "झूठी कहानी" बताया। उन्होंने कहा, "मैं इन अपमानजनक आरोपों के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह की कानूनी कार्रवाई कर रही हूं। जो लोग इस पोस्ट को जानबूझकर फैला रहे हैं, उन्हें भी कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा।"
फिलहाल इस मामले पर कांग्रेस पार्टी या पवन खेड़ा की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। PROTO संगठन और अन्य संबंधित संस्थाओं ने भी अभी तक इन सोशल मीडिया दावों पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है। बिना किसी आधिकारिक पुष्टि या दस्तावेजी सबूत के, ये दावे अभी केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित हैं।












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