माधबी पुरी बुच को लेकर बोले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, कहा-'सेबी में जाने के बाद भी अगोरा से करोड़ों कमाए'
कांग्रेस पार्टी ने सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच पर अगोरा के ज़रिए 2 करोड़ 95 लाख रुपए कमाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का दावा है कि सेबी की पूर्णकालिक सदस्य होने के बावजूद वह और उनके पति अपनी सलाहकार फर्म अगोरा प्राइवेट लिमिटेड से लगातार मुनाफा कमा रहे हैं। माधबी बुच ने पहले कहा था कि सेबी में उनके कार्यभार संभालने के बाद से कंपनी निष्क्रिय हो गई है।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट में अगोरा एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी का नाम आया था। जो 7 मई 2013 को रजिस्टर हुई थी। यह कंपनी माधबी पुरी बुच और उनके पति की है। लेकिन हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद माधबी ने इस बात से इनकार किया। इसमें उन्होंने लिखा कि जब से वे सेबी के पास गई हैं। तब से यह कंपनी डॉरमेंट हो गई है। लेकिन माधबी के पास अभी भी इस कंपनी की 99% हिस्सेदारी है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि माधबी बुच ने सेबी में काम करते हुए नियमों की अनदेखी की। उन्होंने दावा किया कि जब आप कहीं काम करते हैं तो कुछ नियम होते हैं। लेकिन माधबी ने सभी नियमों की अनदेखी की। माधबी ने अगोरा के जरिए 2 करोड़ 95 लाख रुपए कमाए। इसमें सबसे ज्यादा 88% पैसा महिंद्रा एंड महिंद्रा से आया। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पति धवल बुच को 2019-21 के बीच महिंद्रा एंड महिंद्रा से 4 करोड़ 78 लाख रुपए मिले। जबकि वह सेबी की पूर्णकालिक सदस्य थी।
खेड़ा के मुताबिक यह स्थिति हितों के टकराव और नियमों के उल्लंघन को सामने लाती है। इस दौरान सेबी ने महिंद्रा एंड महिंद्रा के पक्ष में कई आदेश जारी किए। कांग्रेस पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या माधबी बुच को सेबी अध्यक्ष नियुक्त करने से पहले उचित जांच की गई थी।
कांग्रेस पार्टी ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई सवाल किए हैं। पवन खेड़ा ने पूछा कि क्या आपको पता था कि माधबी की अगोरा में 99% हिस्सेदारी है। जब आपने माधबी को सेबी का अध्यक्ष बनाया था। तब क्या किसी एजेंसी ने आपको रिपोर्ट नहीं दी थी। क्या जांच एजेंसियों ने आपको नहीं बताया कि अगोरा के उन कंपनियों से आर्थिक-व्यापारिक संबंध हैं। जिनकी सेबी जांच कर रही है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सवाल करना जारी रखा कि क्या माधबी बुच के खिलाफ अन्य कंपनियों के साथ उनके वित्तीय लेन-देन के बारे में कोई सबूत पेश किया गया था। उन्होंने पूछा कि ऐसे सबूतों को क्यों नजरअंदाज किया गया और उन्हें बचाने से किसे फायदा हो सकता है।
कांग्रेस ने यह भी जानकारी मांगी कि किन कंपनियों ने अगोरा से सेवाएं ली गई और क्या ये कंपनियाँ सेबी की जांच के दायरे में हैं। उन्होंने बताया कि इसमें शामिल कुछ कंपनियों में महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, सेम्बकॉर्प इंडस्ट्रीज और विसू लीजिंग एंड फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
कांग्रेस पार्टी के आरोपों ने सेबी और सरकार दोनों पर दबाव बढ़ गया है। विपक्ष मांग कर रहा है कि हितों के टकराव को बिना किसी हस्तक्षेप के कैसे जारी रहने दिया गया।












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