जानिए क्यों मनाया जाता है National Endangered Species Day, इससे क्या होंगे फायदे?

नई दिल्ली: जंगलों में इंसानों की दखल दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। जिस वजह से जानवरों का जीना मुश्किल हो गया है। एक ओर उनका घर यानी जंगल खत्म होते जा रहे हैं, तो दूसरी ओर लगातार हो रहे शिकार की वजह से वो विलुप्ति की कगार पर पहुंच गए हैं। इन लुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण के लिए हर साल मई में लुप्तप्राय प्रजाति दिवस (National Endangered Species Day) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद लोगों को विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों के बारे में जागरुक करना है।

National Endangered Species Day

1960-70 के दशक में जंगलों में निगरानी कम हो पाती थी, जिस वजह से बहुत ज्यादा शिकारी सक्रिय थे। इसके बाद कई देशों की सरकारों ने इस पर गंभीरता से विचार किया और इसको लेकर तमाम कानून बनाए। इन कानूनों के जरिए जानवरों के शिकार पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई। आज भी चोरी-छिपे जंगली जानवरों का शिकार जारी है, जिस वजह से गोरिल्ला, चीता, स्नो लेपर्ड समेत कई प्रजातियों का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर है। ऐसे में 2006 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक अधिनियम पारित कर लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए विशेष दिवस मनाने की बात कही थी। जिसके बाद से हर साल मई के तीसरे शुक्रवार को लुप्तप्राय प्रजाति दिवस मनाया जाता है। इस दिन लोगों को विलुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण के लिए जागरुक किया जाता है।

शिकार के अलावा भी हैं कई कारण
जंगलों में शिकारियों पर काफी हद तक लगाम तो लग गई, लेकिन जीव-जन्तुओं के सामने एक और बड़ी समस्या अभी भी खड़ी है, वो है प्रदूषण। कुछ साल पहले आपको आसमान में गौरेया, चील, गिद्ध जैसे कई पक्षी बड़ी संख्या में दिखाई देते थे। आज पर्यावरण प्रदूषण और मोबाइल टॉवरों की वजह से इनकी संख्या बहुत ही कम बची है। समुद्र में भी यही हाल है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 12.7 टन कचरा समुद्र में मिल रहा है। जिस वजह से कई समुद्री प्रजातियां उन्हें खा रही हैं और वो भी विलुप्ति की कगार पर पहुंच गई हैं।

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