कान का मैल क्या है? जानें इसे साफ़ करने का सबसे अच्छा तरीका
ईयरवैक्स या कान का मैल, कई लोगों को इससे घिन आती है.
लेकिन सच तो ये है कि कान का मैल हमारे शरीर से निकलने वाला एक ऐसा प्राकृतिक रिसाव है जिसका एक महत्वपूर्ण काम होता है.
इसलिए इसे साफ रखना कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आपको हल्के में लेना चाहिए.
ब्रितानी ईएनटी सर्जन गैब्रियल वेस्टन ने कान को साफ रखने के सबसे अच्छे और सबसे खराब तरीकों की पड़ताल की है.
किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले डॉक्टर गैब्रियल वेस्टन ये स्पष्ट करती हैं कि कान का मैल एक ऐसा पदार्थ है जो कान के भीतर मौजूद ग्रंथियों में पैदा होता है और इसके कई काम होते हैं.
कान के मैल से जुड़ी पांच अहम बातें
'कान के मैल' का काम
- ये हमारे कान को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करता है.
- ये कर्ण नलिकाओं के ऊपर जमी परत को सूखने या उनमें दरार पड़ने से रोकता है.
- ये कान को धूलकणों और पानी से बचाता है जिससे संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है.
- ज्यादातर समय हमारी कर्ण नलिकाएं खुद ही अपनी सफाई कर लेती हैं.
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'कान का मैल' कब समस्या बन जाता है
जब हम बोलते हैं, कुछ चबाते हैं, अपने जबड़ों को घुमाते हैं तो ये ईयरवैक्स और त्वचा की कोशिकाएं धीरे-धीरे कान के पर्दे से कान के छेद की ओर बढ़ता है. जहां ये सामान्य तौर पर सूखकर बाहर निकल जाता है.
ईयरवैक्स या कान का मैल सामान्य तौर पर कोई समस्या नहीं है. लेकिन अगर ये ज्यादा मात्रा में बनने लगे तो ये ऐसा अवरोधक बन सकता है जिससे कान में दर्द हो सकता है या फिर कुछ मामलों में सुनने की क्षमता कमजोर हो सकती है.
बाजार में ऐसी कई चीजें बिकती हैं जो ये वादा करती है कि इनके इस्तेमाल से कान का मैल साफ किया जा सकता है.
लेकिन सवाल ये उठता है कि इन उत्पादों से क्या वाकई मदद मिलती है?
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कॉटन बड्स
जब हम अपने कान को उंगलियों से साफ करने की कोशिश करते हैं तो अक्सर ही समस्याएं पैदा हो जाती हैं. रुई के फाहों से साफ करना तो और जोखिम भरा है. हालांकि बहुत से लोग इसका इसी मकसद से इस्तेमाल करते हैं लेकिन रुई के फाहे बनाने वाली कंपनियां ये चेतावनी देती हैं कि इसका इस्तेमाल कर्ण नलिकाओं को साफ करने में न करें.
अगली बार जब इसे इस्तेमाल करने को लेकर आपका दिल मचले तो एक बार इसकी पैकिंग के लेबल पर लिखा संदेश जरूर पढ़ लें. हालांकि पहली नजर में ये ऐसी चीज लगती है जिससे किसी नुकसान का गुमान नहीं होता. मुमकिन है कि कॉटन के उस पैक पर आपको ये लिखा मिले कि "रुई के फाहों को कर्ण नलिकाओं में नहीं डालना चाहिए."
जब हम इसका इस्तेमाल करते हैं तो दरअसल होता ये है कि हम ईयरवैक्स को कान के और भीतर धकेल देते हैं. ये कान के उन हिस्सों से चिपक सकता है जो खुद की सफाई में सक्षम नहीं होते हैं. ईयरवैक्स में कान के बाहर की तरफ से ऐसे बैक्टीरिया हो सकते हैं जो संक्रमण की वजह बन सकते हैं.
रुई के फाहों से कान का मैल साफ करने का एक नतीजा ये भी हो सकता है कि ऐसा करने पर कान की अंदरूनी त्वचा में एक तरह की जलन पैदा हो सकती है जिससे बार-बार उस हिस्से को छूने का मन करे. ये एक दुष्चक्र में बदल सकता है.
कुछ मामलों में अगर रुई के ये फाहे ज्यादा गहराई में पहुंच जाएं तो इससे कान का पर्दा फट सकता है, अचानक दर्द बढ़ सकता है, खून निकल सकता है और अस्थाई तौर पर सुनने की क्षमता का ह्रास हो सकता है.
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ईयर कैंडल्स
जो लोग कान के मैल से छुटकारा चाहते हैं, उनके लिए ईयर कैंडल जैसा एक प्रोडक्ट भी बाजार में मिलता है.
इस तकनीक में एक लंबी, पतली और जलती हुई मोमबत्ती को एक शंकु के आकार वाली चीज में रखा जाता है.
शंकु में एक तरफ छेद होता है और इसकी दिशा कान के भीतर होती है.
ये दावा किया जाता है कि इसके इस्तेमाल से कान का मैल और अन्य अशुद्धियां साफ हो जाती हैं.
लेकिन शोध से पता चला है कि ईयर कैंडल्स कान का मैल साफ करने में असरदार नहीं हैं और इनसे खतरा हो सकता है.
इससे कान और चेहरा जल सकता है. इससे मोमबत्ती का वैक्स कर्ण नलिकाओं तक पहुंच सकता है और कान के पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है.
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ईयर ड्रॉप्स
बहुत से लोग ईयर ड्रॉप्स का इस्तेमाल कान साफ करने के लिए पहले विकल्प के तौर पर करते हैं. ये ईयर ड्रॉप्स कान के मैल को इतना नम कर देते हैं कि ये खुद ही बाहर निकलने लगता है.
बाजार में कई तरह के ईयर ड्रॉप्स मिलते हैं. ये जिन चीजों को मिलाकर तैयार किया जाता है, उनमें हाइड्रोजन पेरोक्साइड, सोडियम बाइकार्बोनेट या सोडियम क्लोराइड जैसी चीजे होती हैं.
हालांकि ये ईयर ड्रॉप्स प्रभावशाली हो सकते हैं लेकिन कुछ मामलों में संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में इसके इस्तेमाल से जलन की समस्या देखी गई है. इसके बदले जैतून और बादाम के तेल की बूंदें अन्य महंगे कमर्शल प्रोडक्ट्स की तरह ही असरदार मानी जाती हैं.
अगर आप जैतून या बादाम का तेल ईयरवैक्स को ढीला करने के लिए करना चाहते हैं तो हम आपसे गुजारिश करेंगे कि अपनी पसंद के तेल को आपको हल्का गर्म कर लेना चाहिए और एक बगल करवट करके लेट जाना चाहिए.
तेल का तापमान आपके शरीर के तापमान से ज्यादा नहीं होना चाहिए. इसके बाद ड्रॉपर की मदद से तेल की कुछ बूंदें कान में डालनी चाहिए और उसी करवट 5-10 मिनट लेटे रहना चाहिए. जैतून का तेल आपके कान में जलन नहीं पैदा करेगा लेकिन ये असर करने में लंबा वक्त लेता है.
अगर आपको लगता है कि आपका कान जाम हो गया है तो तेल की बूंदों के इस्तेमाल की प्रक्रिया तीन से पांच दिनों तक हर दिन दो-तीन बार दोहराई जानी चाहिए.
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पानी से सफाई
अगर आपको ईयरवैक्स की लगातार समस्या रहती है तो मुमकिन है कि आपका डॉक्टर आपको अपने कान की पानी से सफाई के लिए सुझाव दे.
मेडिकल साइंस में इस तरीके को सिरिंजिंग भी कहते हैं. इस तकनीक में कान का मैल साफ करने के लिए एक सिरिंज के जरिए कर्ण नलिकाओं पर पानी की फुहारें डाली जाती हैं.
हालांकि इस तरीके से ईयरवैक्स साफ तो हो सकता है लेकिन कुछ मामलों में ये तकलीफदेह साबित हो सकता है और यहां तक कि कान के पर्दे भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं.
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माइक्रोसक्शन
ईयरवैक्स से परेशान मरीजों के लिए कुछ मेडिकल क्लिनिक्स माइक्रोसक्शन का रास्ता भी चुनते हैं.
इस प्रक्रिया में स्पेशलिस्ट डॉक्टर कान के भीतर का हाल देखने के लिए माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल करता है और एक छोटे से औजार के जरिए उसे खींच लिया जाता ह.
ये तरीका काफी सुरक्षित माना जाता है और कान से नियमित रूप से होने वाले स्राव के मामलों में असरदार भी है.
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