Explainer: सरकार का MSP वाला नया प्रस्ताव क्या है, किसानों ने क्यों किया नापसंद, कौन कर रहा राजनीति?

किसानों के आंदोलन के समाधान के लिए केंद्र सरकार एक नया एमएसपी फॉर्मूला लेकर आई है, जिसमें 5 फसलों को 5 साल तक सीधे किसानों से खरीदने का करार शामिल है। लेकिन, किसान संगठन ने सरकार के प्रस्ताव को सोमवार को ठुकरा दिया है।

बता दें कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने समेत अपनी कई तरह की मांगों को लेकर किसान संगठन दिल्ली कूच का नारा दिए हुए हैं। पंजाब से आ रहे इन किसानों को अभी पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर रोका गया है। सरकार के साथ किसान संगठनों की चार दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन इसका कोई ठोस नतीजा अभी तक नहीं दिख रहा है।

farmers reject msp proposal

केंद्र सरकार का एमएसपी वाला नया प्रस्ताव क्या है?
केंद्र सरकार ने रविवार को किसान संगठनों के साथ बातचीत में कपास, मक्का, अरहर, उड़द और मसूर जैसी 5 फसलों को 5 वर्षों तक एमएसपी पर सीधे किसानों से खरीदने के लिए करार का प्रस्ताव रखा था।

सरकार ने साफ किया था कि इस खरीद के लिए मात्रा की कोई सीमा नहीं होगी और जितनी भी उपज होगी सरकार उसे खरीदने की व्यवस्था करेगी।

केंद्र सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक एनसीसीएफ (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन) और एनएएफईडी (नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया) जैसी केंद्रीय सहकारी एजेंसियां इसके लिए किसानों के साथ 5 साल का करार करेंगी।

इसके साथ ही केंद्र सरकार ने किसानों को गेहूं के बदले अन्य फसलों को बढ़ावा देने के लिए फसल विविधीकरण को अपनाने का भी प्रस्ताव दिया था।

किसानों ने एमएसपी वाला नया प्रस्ताव क्यों ठुकराया?
लेकिन, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने तीन केंद्रीय मंत्रियों कृषि और किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय की ओर से मिले मोदी सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। इसके साथ ही किसानों ने फसल विविधीकरण का प्रस्ताव भी खारिज कर दिया है।

एसकेएम ने साफ किया है कि सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी से कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है। एसकेएम ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने जो 5 साल के लिए 5 फसलों को एमएसपी पर खरीदने के समझौते का जो प्रस्ताव दिया है, वह उनकी मूल मांग से ध्यान भटकाने की कोशिश है।

कौन कर रहा है राजनीति?
एसकेएम की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'अगर मोदी सरकार बीजेपी की ओर से किए गए वादे को पूरा करने में सक्षम नहीं है तो प्रधानमंत्री को ईमानदारी से यह बात लोगों को बताने दें।'

एसकेएम का दावा है कि 2014 के आम चुनावों में बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में यह वादा किया था, जिसका प्रस्ताव मूल रूप से 2006 में एमएस स्वामीनाथन की अगुवाई वाले किसान आयोग ने दिया था।

एसकेएम का यह भी दावा है कि केंद्रीय मंत्री यह स्पष्ट करने के लिए तैयार नहीं हैं कि प्रस्तावित एमएसपी तय करने का आधार क्या होगा। उन्होंने सरकार के साथ हो रही बातचीत में पारदर्शिता नहीं होने का भी आरोप लगाया है।

किसान संगठन ने यह भी कहा है कि मंत्री यह स्पष्ट करें कि ऋण माफी, बिजली का निजीकरण नहीं करने, व्यापक फसल बीमा योजना, 60 साल से ज्यादा उम्र के किसानों को 10,000 रुपए महिने पेंशन, केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के खिलाफ कार्रवाई जैसी मांगों पर मोदी सरकार चुप क्यों है।

अब किसान संगठन ने पूरे देश में बीजेपी और एनडीए सांसदों के चुनाव क्षेत्रों में प्रदर्शन, सभा और टॉर्चलाइट प्रदेशन करने का भी आह्वान किया है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+