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दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज क्या-क्या आदेश दिए, जानिए

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    Delhi में Pollution पर SC सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार को फटकारा | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। गैस चैंबर बन चुकी देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण से बिगड़ते हालात पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कई अहम आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली के प्रदूषण को लेकर गठित किए गए 'पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण' के एक पैनल की ओर से जमा की गई रिपोर्ट को सामने रखते हुए पंजाब और हरियाणा में पराली जलाए जाने के मुद्दों पर भी संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सभी निर्माण गतिविधियों और कचरा जलाने पर प्रतिबंध लगाते हुए, इनका उल्लंघन करने पर क्रमश: 1 लाख रुपए और 5,000 रुपए का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। जानिए, प्रदूषण रोकने के लेकर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें-

    'पराली जलाए जाने पर अधिकारी हटाए जाएं'

    'पराली जलाए जाने पर अधिकारी हटाए जाएं'

    1:- सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'दिल्ली हर साल घुट रही है और हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं। ऐसा हर साल हो रहा है और 10-15 दिनों तक जारी रहता है। सभ्य देशों में ऐसा नहीं होता है। जीवन का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है।'

    2:- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'इस तरह से हम लोग नहीं जी सकते। केंद्र सरकार को करना चाहिए... राज्य सरकार को करना चाहिए... ऐसे नहीं चल सकता। अब बहुत हो चुका है। यहां तक कि इस शहर में घरों के अंदर भी जीने के कोई कमरा सुरक्षित नहीं बचा है। इस प्रदूषण के कारण हम अपने जीवन के बेशकीमती साल खो रहे हैं।

    3:- पराली जलाए जाने की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा, 'हम राज्यों के मुख्य सचिवों को समन करेंगे। ग्राम प्रधानों, स्थानीय अधिकारियों, पुलिस और उन सभी अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया जाना चाहिए, जो पराली जलाने की घटनाओं को नहीं रोक पा रहे। स्थिति बहुत गंभीर है, केंद्र और दिल्ली सरकार के रूप में आप इसके लिए क्या कर सकते हैं? इस प्रदूषण को कम करने के लिए आपका क्या इरादा है? पंजाब और हरियाणा भी बताएं कि वो पराली जलाना कब रोकेंगे?'

    4:- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हर साल हमारी नाक के नीचे ये सब हो रहा है। लोगों से कहा जा रहा है कि वो दिल्ली ना आएं, या अगर दिल्ली में हैं तो इसे छोड़ दें। इसके लिए राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं। लोग अपने राज्यों में, पड़ोसी राज्यों में मर रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम हर चीज का मजाक बना रहे हैं।'

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    'दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और यूपी में ना हो बिजली कटौती'

    'दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और यूपी में ना हो बिजली कटौती'

    5:- सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में निर्माण और विध्वंस पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन करते पाए जाने वाले लोगों पर 1 लाख रुपए और कचरा जलाने पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। कोर्ट ने नगर निकायों को कचरे के खुले डंपिंग को रोकने का भी निर्देश दिया।

    6:- सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कोई बिजली कटौती नहीं होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी डीजल जनरेटर का उपयोग ना किया जाए। इस मामले पर राज्यों की उच्चाधिकार प्राप्त समिति आज बैठक करेंगी और 6 नवंबर को रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंपी जाएगी।

    7:- सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'जीवन के मौलिक अधिकार का यह घोर उल्लंघन है। अलग-अलग राज्य सरकारें और नगर निकाय अपने कर्तव्यों का पालन करने में असफल साबित हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण और पराली जलाए जाने के मुद्दे पर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को भी तलब किया।

    'ऑड ईवन के पीछे क्या लॉजिक है'

    'ऑड ईवन के पीछे क्या लॉजिक है'

    8:- जस्टिस अरुण मिश्रा ने दिल्ली सरकार के ऑड ईवन नियम पर सवाल उठाते हुए कहा, 'कारें कम प्रदूषण पैदा करती हैं। इस ऑड-ईवन से आपको क्या मिल रहा है? ऑड ईवन योजना लागू करने के पीछे क्या लॉजिक है? डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाते, तो हम समझते, लेकिन ऑड-ईवन स्कीम का क्या मतलब है?'

    9:- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वह आने वाले शुक्रवार तक का डेटा या रिकॉर्ड देकर यह साबित करे कि ऑड ईवन स्कीम से दिल्ली में प्रदूषण कम हुआ है, जबकि ऑटो और टैक्सी सड़कों पर चल रही हैं।

    10:- अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार विशेषज्ञों की मदद लेकर वायु प्रदूषण कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को करेगा।

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    English summary
    Key Points Of Supreme Court Decision On Air Pollution In Delhi.
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