केदारनाथ में मौसम का तांडव, बार‍िश के साथ जबर्दस्त ओलावृष्‍िट

kedarnath
नई दिल्ली। चारधाम में मौसम की चंचलता यात्र‍ियों पर भारी पड़ रही है। चारधामों में से एक केदारनाथ में शुक्रवार को जोरदार बारिश के बाद ओलावृष्टि हुई, जिससे लिनचोली की चढ़ाई में फंसे 40 यात्रियों को पुलिस बेस कैंप ले आई। मौसम ठीक होने के बाद उन्हें केदारनाथ धाम में दर्शन के लिए भेजा गया। वहीं दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा समेत उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में गर्मी का प्रकोप जारी है। सूर्य देवता की तपिश बढ़ती ही जा रही है।

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केदारनाथ में मौसम अभी भी ठंडा बना हुआ है। सुबह धूप होने के बाद दोपहर को ओले पड़ने शुरू हो गए जो दो घंटे तक गिरे। केदारनाथ दर्शन के लिए लिनचोली की चढ़ाई पर 40 यात्री फंस गए। सभी यात्रियों को बेस कैंप केदारनाथ लाया गया। इनमें अधिकांश बुजुर्ग और महिलाएं थीं।

मौसम ठीक होने पर यात्रियों को पुलिस केदारनाथ तक लेकर गई। शुक्रवार को 286 यात्रियों ने भोले बाबा के दर्शन किए। अब तक 2500 से अधिक यात्री दर्शन कर चुके हैं। पैदल मार्ग पर रेन शटर न होने से बारिश होने की स्थिति में यात्रियों के पास कोई भी विकल्प नहीं हैं। कड़ाके की ठंड में उन्हें भीगना पड़ता है, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ रही है।

बिना रजिस्ट्रेशन पहुंचे यात्री -

तीर्थयात्री बिना रजिस्ट्रेशन कराए ही केदारनाथ जा रहे हैं। प्रशासन ने यात्रियों को आवश्यक रूप से रजिस्ट्रेशन और मेडिकल फिटनेस कराने के लिए कहा है। इसके लिए पुलिस घोषणा भी करा रही है। यात्रियों की सुविधा को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा पड़ावों के तीन स्थानों पर बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन कार्यालय शुरू कर दिए हैं।

इसके प्रचार-प्रसार के लिए कई स्थानों पर होर्डिग भी लगाए गए हैं। अभी तक 2626 यात्रियों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। पिछले साल जून में आई आपदा से सबक लेकर शासन-प्रशासन ने तीर्थयात्रियों का बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन कराने का निर्णय लिया था।

केदारनाथ धाम के कपाट चार मई को खुलने के साथ ही भगवान भोले के दर्शन को भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। लेकिन, केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग यात्र मार्ग में उपलब्ध सुविधाओं से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लिनचोली से आगे का मार्ग यात्रियों के चलने लायक नहीं है। उधर, उत्तराखंड सरकार ने 12 मई से लिनचोली व केदारनाथ के बीच हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने का फैसला किया है।

इसके अलावा सरकार ने प्रतिदिन करीब पांच सौ श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति देने का फैसला किया है, जिसमें से 100 लोग उत्तराखंड के निवासी होंगे। भीमाशंकर लिंग ने बताया कि आपदा के बाद केदारनाथ धाम व मंदिर तक जाने वाले पैदल मार्ग पर उपलब्ध सुविधाएं बहुत कम हैं। देश व विदेश से बड़ी संख्या में यात्री दर्शनों के लिए केदारनाथ आना चाहते हैं और उनके फोन भी आ रहे हैं।

धाम में व्यवस्था सही नहीं होने से वह उन्हें अभी नहीं आने की सलाह दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि केदारनाथ यात्र के लिए सरकारी स्तर पर अब तक उठाए गए कदम कुछ हद तक संतोषजनक हैं, लेकिन पर्याप्त नहीं। पैदल मार्ग पर केदारनाथ तक घोड़े व खच्चर की व्यवस्था होना जरूरी है।

केदारनाथ में अभी यात्रा लायक व्यवस्था नहीं -

केदारनाथ धाम के कपाट चार मई को खुलने के साथ ही भगवान भोले के दर्शन को भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। लेकिन, केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग यात्र मार्ग में उपलब्ध सुविधाओं से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लिनचोली से आगे का मार्ग यात्रियों के चलने लायक नहीं है। उधर, उत्तराखंड सरकार ने 12 मई से लिनचोली व केदारनाथ के बीच हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने का फैसला किया है।

इसके अलावा सरकार ने प्रतिदिन करीब पांच सौ श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति देने का फैसला किया है, जिसमें से 100 लोग उत्तराखंड के निवासी होंगे। भीमाशंकर लिंग ने बताया कि आपदा के बाद केदारनाथ धाम व मंदिर तक जाने वाले पैदल मार्ग पर उपलब्ध सुविधाएं बहुत कम हैं। देश व विदेश से बड़ी संख्या में यात्री दर्शनों के लिए केदारनाथ आना चाहते हैं और उनके फोन भी आ रहे हैं।

लेकिन धाम में व्यवस्था सही नहीं होने से वह उन्हें अभी नहीं आने की सलाह दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि केदारनाथ यात्र के लिए सरकारी स्तर पर अब तक उठाए गए कदम कुछ हद तक संतोषजनक हैं, लेकिन पर्याप्त नहीं। पैदल मार्ग पर केदारनाथ तक घोड़े व खच्चर की व्यवस्था होना जरूरी है। इन्हीं असुविधाओं के बीच उत्तराखंड की सरकार 'ऑल इज वेल' का गीत गा रही है।

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