ओंकारेश्वर का प्रसिद्ध कार्तिक मेला 30 अक्टूबर से, पुख्ता इंतजाम में जुटा प्रशासन

भोपाल। ओंकारेश्वर का प्रसिद्ध कार्तिक मेला 30 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। आठ दिन तक चलने वाले मेले को लेकर मंदिर संस्थान, नगर परिषद और प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। 31 अक्टूबर देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक 75 किमी की नर्मदा-ओंकार पंचक्रोशी पदयात्रा भी निकाली जाएगी। मेले सहित यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे। प्रशासन कोई रिस्क लेना नहीं चाहता है और इसी वजह से वो इस वक्त पुख्ता इंतजामों में जुटा है। ये मेला यहां हर साल लगता है। कार्तिक मास में आयोजित इस मेले की अपनी खूबियां और महत्व है।

कार्तिक मेला 30 अक्टूबर से, तैयारियां जोरों पर

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फल मिलता है।

बछड़ा दान करने से शिवपद की प्राप्ति होती है

मान्यता यह भी है कि इस दिन पूरे दिन व्रत रखकर रात्रि में वृषदान यानी बछड़ा दान करने से शिवपद की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति इस दिन उपवास करके भगवान भोलेनाथ का भजन और गुणगान करता है उसे अग्निष्टोम नामक यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

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