कर्नाटक के सियासी नाटक में स्पीकर ने निभाया अहम रोल, जानिए कैसे
नई दिल्ली। कर्नाटक में पिछले कई दिनों से चल रहा सियासी ड्रामा आखिरकार खत्म हो गया है। मंगलवार देर शाम को फ्लोर टेस्ट में जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन ढेर हो गया और कुमारस्वामी की सरकार गिर गई। काफी लंबे समय तक चली बहस के बाद सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश किया गया और इसपर वोटिंग कराई गई। विश्वास प्रस्ताव में गठबंधन की सरकार के पक्ष में 99 वोट पड़ें जबकि भाजपा के पक्ष में 105 वोट पड़े। जिसके बाद कर्नाटक में एक और सरकार बिना अपना कार्यकाल पूरा किए गिर गई। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम भूमिका विधानसभा के स्पीकर रमेश कुमार ने निभाई।

अपने फैसले पर रहे अडिग
दिलचस्प बात यह है कि रमेश कमार ने इस पूरी प्रक्रिया को काफी लंबे समय तक लटकाए रखा और राज्यपाल के निर्देश को भी दरकिनार कर दिया। उन्होंने विश्वास प्रस्ताव पर पूरी बहस के बाद ही इसपर वोटिंग कराने का फैसला लिया। रमेश कुमार ने इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट को भी कुछ हद तक दरकिनार किया। कर्नाटक के सियासी संकट के दौरान रमेश कुमार पर कई आरोप लगे, लेकिन इन आरोपों से वह जरा भी विचलित नहीं हुए और लगातार अपने फैसले पर अडिग रहे।
टीवी इंडस्ट्री में कर चुके हैं काम
गौर करने वाली बात है कि रमेश कुमार पहले टीवी इंडस्ट्री में काम कर चुके हैं और वह दूसरी बाद विधानसभा के स्पीकर बने हैं। वह कन्नड टीवी सीरियल में राजनेता की भूमिका भी निभा चुके हैं। ऐसे में सदन के भीतर जब वह अपने बयान दे रहे थे तो उसमे एक अलग झलक देखने को मिल रही थी। कई बार उन्होंने सदन के भीतर पंचलाइन बोलकर लोगों का ध्यानाकर्षण किया। रमेश कुमार के विरोधी आरोप लगाते हैं कि सदन के भीतर अपने विधायकों से ज्यादा तो खुद रमेश कुमार बोलते हैं।
1978 में आए राजनीति में
बता दें कि रमेश कुमार साइंस ग्रैजुएट हैं और उन्होंने राजनीति में 1978 में कदम रखा था। उन्होंने कोलार सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ावे देखे। अबतक वह पांच बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। रमेश कुमार को अपने चिर प्रतिद्वंदी जीवी वेंकटशिवा रेड्डी से चार बार हार का भी सामना करना पड़ा है। पिछले वर्ष हुए चुनाव के बाद उन्हें सर्वसम्मति से विधानसभा का स्पीकर चुना गया था।












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