Russian Woman News: गुफा में मिली रूसी महिला पर आया बड़ा अपडेट, HC ने बदल दी मां-बच्चों की तकदीर
कर्नाटक हाई कोर्ट ने गोकर्ण के जंगल में एक गुफा में मिली रूसी महिला नीना कुटिना (Nina Kutina) और उनकी दो बेटियों को रूस वापस जाने की अनुमति दे दी है। जुलाई में मिली इस महिला और बच्चों के भविष्य को लेकर दो महीने से जारी कानूनी उठापटक पर विराम लग गया है। जस्टिस बीएम श्याम प्रसाद ने केंद्र सरकार को उनके लिए यात्रा दस्तावेज जारी करने का आदेश दिया है।
कोर्ट का यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मां-बच्चों को एक असामान्य और एकांत वातावरण में बिना किसी सुविधा के रहते हुए पाया गया था, जिसे कोर्ट ने बच्चों के हित में नहीं माना।

DNA रिपोर्ट और पूर्व पति की दलील
मामले में सबसे बड़ी रुकावट बच्चों के पिता, इजरायली नागरिक ड्रोर श्लोमो गोल्डस्टीन द्वारा दायर याचिका थी। नीना कुटिना के एक्स हसबैंड गोल्डस्टीन ने केंद्र सरकार द्वारा बच्चों को तुरंत रूस भेजने के फैसले को रोकने की मांग की थी। उन्होंने बच्चों के कल्याण का हवाला दिया और संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन (UN Convention on the Rights of the Child) का जिक्र करते हुए दावा किया कि वह लंबे समय से बच्चों की देखभाल कर रहे थे।
इस बीच केंद्र सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि भारत में जन्मी 5 वर्षीय बेटी आमा (Ama) के पितृत्व की पुष्टि के लिए DNA रिपोर्ट मास्को के साथ शेयर की गई थी, जिसके बाद रूसी अधिकारियों ने उसे नागरिकता दी और आपातकालीन यात्रा दस्तावेज़ जारी किए।
बच्चों का सर्वोत्तम हित और कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने गोल्डस्टीन की दलीलों को खारिज करते हुए बच्चों के सर्वोत्तम हित (Best Interests of the Children) के व्यापक संदर्भ पर जोर दिया। कोर्ट ने LiveLaw के अनुसार टिप्पणी की कि 'यह निर्विवाद है कि वे तीनों बिना किसी सुविधा के एक अलग-थलग वातावरण में गुफा में थे।'
बेंच ने जोर दिया कि एक बार अधिकारियों ने परिवार का पता लगा लिया, तो उनका पुनर्वास एक प्राकृतिक कदम था। कोर्ट ने कहा कि जब खुद मां नीना कुटिना ने बच्चों के साथ रूस वापस जाने की विनती की है, तो यह निर्णय बच्चों के भविष्य के लिए न्यायसंगत और उचित होगा।
केंद्र सरकार का स्पष्टीकरण
याचिकाकर्ता की चिंता का जवाब देते हुए केंद्र सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया। अतिरिक्त सॉलिसिटर-जनरल के. अरविंद कामथ ने कोर्ट में कहा कि इस मामले में मां और बच्चों को वापस भेजना 'निर्वासन' (Deportation) नहीं कहा जा सकता। यह सिर्फ मां की अपने बच्चों के साथ अपने देश लौटने की इच्छा को मान्यता देना है, जो उनके हित में है।
रूसी अधिकारियों ने भी भारत द्वारा शेयर किए गए सभी खुलासों पर तत्काल प्रतिक्रिया दी और अपने नागरिकों की वापसी के लिए दस्तावेज़ीकरण प्रदान किया। इस प्रकार, हाईकोर्ट की अनुमति से अब रूसी माँ और उनकी बेटियों की वतन वापसी का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है।












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