Karnataka election:JDS से ओवैसी को झटका, किस डर से गठबंधन की योजना छोड़ी? जानिए

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को जेडीएस से झटका लगा है। पार्टी ने उसके साथ गठबंधन का इरादा टाल दिया है। क्योंकि, पार्टी को इससे नुकसान होने का डर है।

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जेडीएस ने असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के साथ गठबंधन की योजना छोड़ दी है। पार्टी नेताओं ने इस गठबंधन से फायदे से ज्यादा नुकसान की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया है। जेडीएस की नई लाइन ओवैसी की पार्टी के लिए बड़े चुनावी झटके से कम नहीं है।

समर्थन वाली सीटों की लिस्ट से एआईएमआईएम गायब
दरअसल जेडीएस जिन विधानसभा सीटों पर सहयोगी दलों की समर्थन कर रही है, उस लिस्ट में एआईएमआईएम का नाम नहीं है। गौरतलब है कि ओवैसी की पार्टी कर्नाटक में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश में है। यहां उसे समान विचारधारा वाले दलों की तलाश रही है, जिसमें से एक जेडीएस भी हो सकती है।

सीपीएम-आरपीआई के साथ जेडीएस का तालमेल
गुलबर्गा ग्रामीण, बागेपल्ली, केआर पुरा, सीवी रमननगर,विजयनगर और महादेवपुरा में जेडीएस सीपीएम और आरपीआई को समर्थन दे रही है। वहीं, नानजांगुड में पार्टी कांग्रेस के दर्शन ध्रुवनारायण को समर्थन देगी। लेकिन, एआईएमआईएम जहां से चुनाव लड़ रही है, उसका नाम लिस्ट में नहीं शामिल किया गया है।

दोनों दलों के बीच सहमति नहीं- सूत्र
सूत्रों के मुताबिक सीटों के तालमेल को लेकर जेडीएस और एआईएमआईएम के नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाई है। यही कारण है कि पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने गठबंधन के इरादे को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

पार्टी को फायदे से ज्यादा नुकसान की आशंका
जेडीएस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि 'पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की राय थी कि एआईएमआईएम के साथ गठबंधन करने की स्थिति में कुछ विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।'

'दोनों दलों के नेताओं में सहमति नहीं'
जेडीएस के एमएलसी और पार्टी कोर कमेटी के संयोजक केए थिप्पेस्वामी का कहना है कि 'क्योंकि दोनों दलों के नेताओं के बीच आम सहमति नहीं बन पाई, इसलिए हमने यह आइडिया ही छोड़ दिया।'

10 मई को है कर्नाटक में वोटिंग
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 10 मई को एक ही चरण में मतदान होगा और 13 मई को वोटों की गिनती की जाएगी। कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं और यह देश की सातवीं सबसे बड़ी विधानसभा है। बहुमत के लिए 112 विधायकों की आवश्यकता होगी।

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