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Karnataka Bandh: कर्नाटक बंद के पीछे कौन लोग हैं, इसकी वजह और इसके आयोजकों की मांगें क्या हैं?

Karnataka Bandh: आज कर्नाटक में एक व्यापक बंद (हड़ताल) बुलाया गया है। यह बंद कन्नड़-समर्थक संगठनों की ओर से आयोजित किया गया है, जिसमें प्रमुख रूप से कन्नड़ ओक्कूटा (Kannada Okkoota) शामिल है। सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक रहने वाला 12 घंटे का यह बंद मुख्य रूप से कन्नड़ और मराठी भाषी समुदायों के बीच बढ़ते भाषाई तनावों की प्रतिक्रिया में बुलाया गया है।

इस बंद के दौरान पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रभावित होने की सबसे ज्यादा संभावना है। कई स्कूलों ने एहतियातन पहले ही छुट्टियों की घोषणा कर दी है। खासकर राजधानी बेंगलुरू में इसका ज्यादा असर दिखने की आशंका है। हालांकि, कुछ स्कूलों में परीक्षाएं आयोजित भी की जा सकती हैं।

karnataka bandh

बंद के आयोजकों की ओर से मॉल,मल्टीप्लेक्स और ऐसे अन्य ठिकानों को भी बंद करवाने की कोशिशें की जा सकती हैं। इसी तरह से बाजारों और दुकानों को भी बंद करवाया जा सकता है।

Karnataka Bandh 22 March reason: कर्नाटक बंद के पीछे की वजहें

1. बेलगावी में KSRTC बस कंडक्टर पर हमला

इस बंद का पहला कारण बेलगावी में कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के एक बस कंडक्टर पर कथित रूप से मराठी समर्थकों के हाथों हमला बताया जा रहा है।

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इसी साल फरवरी में हुई इस घटना की मुख्य वजह यह थी कि बस कंडक्टर मराठी भाषा नहीं बोल रहा था। इस हमले ने दोनों ही राज्य में भाषाई विवाद को और अधिक भड़का दिया है।

2. कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद और भाषाई तनाव

कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद विवाद दशकों पुराना है। 1960 में महाराष्ट्र राज्य के गठन के बाद से, उसने 865 गांवों (जिनमें कर्नाटक के बेलगावी, कारवार और निपानी शामिल हैं) पर दावा कर रखा है।

महाराष्ट्र का कहना है कि इन इलाकों में बड़ी संख्या में मराठी भाषी लोग रहते हैं, इसलिए इन्हें महाराष्ट्र में शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि, कर्नाटक सरकार ने इसे लगातार खारिज किया है। यह मामला लगभग दो दशकों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

बेलगावी, जो इस विवाद का केंद्र रहा है, वहां मराठी और कन्नड़ भाषी आबादी के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। कर्नाटक ने इसी वजह से वहां विधानसभा की स्थापना की है और वहां भी सत्र आयोजित की जाती है।

3. ग्रेटर बेंगलुरु गवर्नेंस बिल का विरोध

इस बंद का एक और महत्वपूर्ण कारण ग्रेटर बेंगलुरु गवर्नेंस बिल का विरोध भी है। इस प्रस्तावित बिल के तहत बेंगलुरु को कई प्रशासनिक क्षेत्रों में विभाजित किया जाना है। कन्नड़-समर्थक संगठन मानते हैं कि इससे कन्नड़ संस्कृति और भाषा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

Karnataka Bandh demand: कर्नाटक बंद के आयोजकों की मांगें?

1.मराठी संगठनों पर प्रतिबंध: आयोजकों की प्रमुख मांग है कि महाराष्ट्र एकीकरण समिति (MES) जैसे मराठी संगठनों पर कर्नाटक में प्रतिबंध लगाया जाए। उनका आरोप है कि ये संगठन राज्य में भाषाई तनाव भड़का रहे हैं।

2.कन्नड़ भाषी लोगों की सुरक्षा: विशेष रूप से बेलगावी जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में कन्नड़ भाषी आबादी की सुरक्षा की मांग की जा रही है।

3.बेंगलुरु के प्रशासनिक विभाजन का विरोध: आयोजकों का मानना है कि बेंगलुरु को कई प्रशासनिक क्षेत्रों में विभाजित करने से कन्नड़ पहचान और संस्कृति कमजोर हो जाएगी, इसलिए वे इसका पुरजोर विरोध किया जा रहा है।

Karnataka Bandh effect: कर्नाटक बंद का प्रभाव क्या हो सकता है?

इस बंद के कारण कर्नाटक के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है। परिवहन सेवाएं, व्यापार, स्कूल और कॉलेज बंद रहने की संभावना है। खासतौर पर यात्रियों और छात्रों को इस बंद से असुविधा हो सकती है।

Karnataka Bandh likely to be unaffected services: कर्नाटक बंद का कहां असर नहीं पड़ेगा?

नम्मा मेट्रो: बेंगलुरु सिटी मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी, हालांकि अंतिम गंतव्य तक जाने में मुश्किलें आ सकती हैं।

आवश्यक सेवाएं: पेट्रोल पंप, दूध के बूथ, सुपरमार्केट, अस्पताल और दवाई की दुकानें खुली रहेंगी।

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रेलवे और हवाई सेवाएं: बंद का असर ट्रेनों और हवाई यातायात पर भी नहीं पड़ने की संभावना है। अलबत्ता, यात्रियों को रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट आने-जाने में असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए अपनी यात्रा उसी के अनुसार सुनिश्चित करें।

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