'कैश कांड' मामले में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें बढ़ीं, ओम बिड़ला ने बनाई विशेष जांच टीम
Justice Yashwant Verma Cash Scandal Case: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने मंगलवार को संसद में एक अहम ऐलान करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Verma) के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय पैनल का गठन कर दिया। यह फैसला उस सनसनीखेज घटना के बाद लिया गया है, जिसने देशभर में हलचल मचा दी थी।
दरअसल, मार्च 2025 में जस्टिस वर्मा के आवास पर लगी आग को बुझाने के लिए जब दमकलकर्मी पहुंचे, तो उन्हें वहां बड़ी मात्रा में नकदी के ढेर मिले थे। इनमें से कई नोट जले और अधजले हालत में थे।

कैश मिलने के बाद इस पूरे मामले ने तूल पकड़ा और न्यायपालिका की साख पर गंभीर सवाल खड़े हुए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इन-हाउस जांच समिति पहले ही जस्टिस वर्मा को 'दुर्व्यवहार' का दोषी ठहरा चुकी है।
तीन सदस्यीय पैनल में ये लोग होंगे शामिल
पैनल में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनिंदर मोहन और वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य को शामिल किया गया है। यह पैनल पूरे मामले की गहराई से जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपेगा।
इस पूरे मामले में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "प्रक्रिया अपने तरीके से आगे बढ़ेगी। एक तय प्रक्रिया होती है और मुझे नहीं लगता कि इस समय कोई टिप्पणी करने की जरूरत है। महाभियोग समिति गठित करने का फैसला लिया गया है। अब वे सभी सबूतों की जांच करेंगे और निष्कर्ष पर पहुंचेंगे।"
Supreme Court ने खारिज की याचिका
पिछले हफ्ते, सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इन-हाउस इनक्वायरी पैनल की रिपोर्ट को अमान्य घोषित करने की मांग की थी। इस रिपोर्ट में उन्हें 'दुर्व्यवहार' (misconduct) का दोषी पाया गया था।
मामले की शुरुआत कैसे हुई
21 मार्च को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने जस्टिस वर्मा से लिखित जवाब मांगा था। अगले दिन जस्टिस वर्मा ने लिखित जवाब देते हुए आरोपों को खारिज कर दिया। इसके बाद सीजेआई संजीव खन्ना ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच शुरू कराई। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर इन-हाउस इनक्वायरी रिपोर्ट के साथ-साथ मामले से जुड़ी फोटो और वीडियो भी सार्वजनिक किए थे।
30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा को फटकार लगाते हुए कहा कि उनका आचरण "विश्वास जगाने वाला" नहीं है। कोर्ट ने सीजेआई के अधिकारों का भी बचाव करते हुए कहा कि वे सिर्फ एक "पोस्ट ऑफिस" नहीं हैं, बल्कि उनके पास देश और न्यायपालिका के प्रति जिम्मेदारियां हैं।
'XXX बनाम भारत सरकार' के नाम से दर्ज मामला
इस मामले में जस्टिस वर्मा की पहचान कोर्ट रिकॉर्ड में उजागर नहीं की गई है और याचिका 'XXX बनाम भारत सरकार' शीर्षक से दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि जब इन-हाउस कमेटी ने उन्हें दोषी ठहराया, तो उन्होंने उसी समय रिपोर्ट को चुनौती क्यों नहीं दी और अब क्यों कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अब लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित यह नया तीन सदस्यीय पैनल मामले की विस्तृत जांच करेगा। अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक बड़ा और अभूतपूर्व मामला बन सकता है।
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