EVM से लेकर अनुच्छेद 370 तक, जानें देश के होने वाले नए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना के 5 बड़े फैसलों के बारे में?
Justice Sanjiv Khanna: भारत के मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) डी.वाई. चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) ने केंद्रीय कानून मंत्रालय को लिखे एक पत्र में सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को अपना उत्तराधिकारी नामित किया है। यानि अब जस्टिस संजीव खन्ना भारत के नए चीफ जस्टिस होने वाले हैं।
न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने 16 अक्टूबर को न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को अपनी सिफारिश का पत्र सौंपा था। जस्टिस संजीव खन्ना 1 नवंबर को भारत के 51वें चीफ जस्टिस बनेंगे। आइए जानें संजीव खन्ना कौन हैं और उनके अब तक लिए हुए पांच बड़े फैसले?

Who is Justice Sanjiv Khanna: कौन हैं जस्टिस संजीव खन्ना?
- जस्टिस संजीव खन्ना सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस हैं। जस्टिस संजीव खन्ना दिल्ली हाई कोर्ट में भी जस्टिस रह चुके हैं। जस्टिस संजीव खन्ना वर्तमान में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। जस्टिस संजीव खन्ना राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल के गवर्निंग काउंसिल के सदस्य भी हैं।
- जस्टिस संजीव खन्ना ने 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया और तीस हजारी परिसर में जिला अदालतों में प्रैक्टिस की। उसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट और न्यायाधिकरणों में प्रैक्टिस की।
- जस्टिस संजीव खन्ना ने आयकर विभाग के वरिष्ठ स्थायी वकील के रूप में भी काम किया और 2004 में दिल्ली के स्थायी वकील (सिविल) भी बने थे।
- जस्टिस संजीव खन्ना दिल्ली हाई कोर्ट में आपराधिक मामलों में अतिरिक्त लोक अभियोजक और एमिकस क्यूरी के रूप में भी पेश हुए थे। बाद में 2005 में दिल्ली हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश और 2006 में स्थायी न्यायाधीश बने।
- जस्टिस संजीव खन्ना ने दिल्ली न्यायिक अकादमी, दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र और जिला न्यायालय मध्यस्थता केंद्रों में अध्यक्ष/प्रभारी न्यायाधीश जैसे पदों पर भी काम किया है।
- 18 जनवरी 2019 को जस्टिस संजीव खन्ना को किसी भी हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनने से पहले ही सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था।
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Justice Sanjiv Khanna 5 Landmark Judgment: जस्टिस संजीव खन्ना का 5 ऐतिहासिक फैसला
🔴 1. जस्टिस संजीव खन्ना ने 2024 में चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के उपयोग को बरकरार रखने के फैसला देने वाले खंडपीठ का नेतृत्व कर रहे थे। जिसमें ईवीएम पर डाले गए वोटों के 100 प्रतिशत वीवीपीएटी सत्यापन के लिए एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की याचिका को खारिज कर दिया गया था। अपने फैसले में जस्टिस संजीव खन्ना ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा लागू किए गए मौजूदा सुरक्षा उपायों को सही ठहराया था।
🔴 2. 2023 में जस्टिस संजीव खन्ना ने पांच न्यायाधीशों की पीठ के ऐतिहासिक फैसले में योगदान दिया था, जिसने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को बरकरार रखा गया था। न्यायमूर्ति खन्ना ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 370 संप्रभुता का नहीं, बल्कि असममित संघवाद का एक तत्व था और इसे हटाने से भारत के संघीय ढांचे से समझौता नहीं होता।
🔴 3. जस्टिस संजीव खन्ना का सबसे प्रमुख फैसला 2019 में आरटीआई मामले में सामने आया था। जस्टिस संजीव खन्ना ने बहुमत की राय में फैसला सुनाया कि न्यायिक स्वतंत्रता सूचना के अधिकार से टकराती नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जबकि मुख्य न्यायाधीश (ओसीजे) का कार्यालय आरटीआई अनुरोधों के अधीन हो सकता है। उन्होंने कहा था कि हर मामला सिर्फ और सिर्फ गलत और सही के आधार पर तौला जाना चाहिए।
🔴 4. जस्टिस संजीव खन्ना ने 2023 में शिल्पा शैलेश बनाम वरुण श्रीनिवासन तलाक के मामले फैसला सुनाया था। जिसमें संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सीधे तलाक देने की सुप्रीम कोर्ट की शक्ति की पुष्टि की गई थी। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों के बीच पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए "विवाह के टूटने" के आधार पर तलाक दे सकता है।
🔴 5. साल 2024 में जस्टिस संजीव खन्ना सहित पांच न्यायाधीशों की पीठ ने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित करने का भी फैसला लिया था। अपनी सहमति व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति खन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि दानकर्ता की गोपनीयता बैंकिंग चैनलों के जरिए से किए गए दान तक विस्तारित नहीं होती है।












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