देवी-देवताओं की जाति बताने वालीं जेएनयू VC की सफाई, कहा- मैंने सिर्फ अंबेडकर के दृष्टिकोण का विश्लेषण किया

नई दिल्ली, 24 अगस्त: हिंदू देवी-देवताओं की जाति बताकर नया विवाद खड़ा करने वालीं दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की वाइस चांसलर (वीसी) शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने अपने बयान पर सफाई दी है। सोमवार को जेएनयू में होने वाले एक कार्यक्रम में वीसी शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने कहा था कि अगर मानव विज्ञान के नजरिए से देखें तो कोई भी हिंदू देवी-देवता ऊंची जाति से नहीं है। वहीं अब वीसी ने अपनी सफाई में कहा कि यह सब उन्होंने सिर्फ अंबेडकर के दृष्टिकोण का विश्लेषण किया है।

JNU VC Santishree Dhulipudi Pandit

दरअसल, जेएनयू में डॉ. बीआर अंबेडकर व्याख्यान कार्यक्रम रखा गया था, जहां शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने देवी-देवताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि मानवशास्त्रीय रूप से भगवान उच्च जाति से संबंधित नहीं हैं। जिसके बाद बुधवार उन्होंने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा, "मैं डॉ. बीआर अंबेडकर और लैंगिक न्याय पर बोल रही थी, समान नागरिक संहिता को डिकोड कर रही थी, इसलिए मुझे उनका विश्लेषण करना था कि उनके विचार क्या थे, इसलिए मैं उनकी किताबों में जो कहा गया था, वह मेरे विचार नहीं हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "मैंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म ही एकमात्र धर्म और जीवन का एक तरीका है। सनातन धर्म असहमति, विविधता और अंतर को स्वीकार करता है। कोई अन्य धर्म ऐसा नहीं करता है और यह हिंदू धर्म का श्रेय है कि गौतम बुद्ध से लेकर अंबेडकर तक ऐसे महान असंतुष्टों को मनाया जाता है।

वहीं मनु स्मृति के अनुसार, सभी महिलाएं "शूद्र" हैं, अपनी टिप्पणी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह अंबेडकर के काम का विश्लेषण कर रही थीं। वीसी ने कहा, "उन्होंने मनु स्मृति पर बहुत कुछ लिखा और उन्होंने ही यह सब कहा। मैं केवल उनके दृष्टिकोण का विश्लेषण कर रही था और वे भारतीय संविधान के जनक और मसौदा समिति के अध्यक्ष होने के नाते- उनके दर्शन को समझना अत्यंत आवश्यक है।'

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