कहर बनकर जम्‍मू कश्‍मीर में बह रही हैं झेलम, चेनाब और तवी

श्रीनगर। जम्‍मू कश्‍मीर की बाढ़ राज्‍य के लिए 60 वर्षों के बाद काल बनकर सामने आई है। अब तक 250 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोगों को राहत पहुंचाई गई है। खूबसूरती का मिसाल बना यह राज्‍य आज सबसे बड़ी आपदा को झेलने पर मजबूर है।

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चार दिन बाद हुआ आफत का अंदाजा

जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य झेलम, चेनाब, इंडस, सिंधु और तवी के साथ ही कुछ और छोटी-छोटी नदियों से घिरा हुआ है। लेकिन जिन नदियों की वजह से राज्‍य में आफत आई है वह है झेलम, चेनाब और तवी।

यह तीनों ही नदियां जम्‍मू-कश्‍मीर से होती हुई पाकिस्‍तान की ओर बहती है। श्रीनगर के साथ ही झेलम और तवी के आसपास बसे इलाकों में रहने वाले लोगों कोचार दिनों बाद इस बात का अहसास हुआ कि यह नदियां आने वाले दिनों में कहर बरपाने वाली हैं।

श्रीनगर जहां पर इस समय झेलम नदी आफत बनकर बह रही है, वहां के लोगों को इस बात की बिल्‍कुल भी उम्‍मीद नहीं थी कि इसका पानी घरों के अंदर तक दाखिल हो जाएगा। इस नदी का पानी बढ़ने के चार दिनों बाद लोगों को आफत का अंदाजा हुआ।

शुक्रवार को लोग रात भर जाग रहे थे। वह इस उम्‍मीद थे कि पानी श्रीनगर के सामेरबाग और आसपास के इलाकों तक नहीं आएगा और शनिवार तक नदी का बढ़ा हुआ स्‍तर बिल्‍कुल खत्‍म हो जाएगा।

पाकिस्‍तान से आई आफत

जम्‍मू कश्‍मीर में कई लोग तो पहली बार बाढ़ का अनुभव कर रहे हैं। पहली बार उन्‍होंने देखा है कि कैसे यह नदियां बारिश की वजह से विशाल राक्षस के रूप में तब्‍दील हो गई हैं और नदियों ने जमकर तांडव किया है।

राज्‍य में खासतौर पर श्रीनगर में कई लोग इन नदियों के किनारे पर बसे हुए हैं। बाढ़ का पानी दक्षिण कश्‍मीर यानी पाकिस्‍तान की ओर से बढ़ना शुरू हुआ था। दक्षिण कश्‍मीर से इस्‍लामाबाद काफी नजदीक है और बताया जा रहा है कि यहीं से पानी के स्‍तर में वृद्धि होनी शुरू हुई।

बढ़े हुए जलस्‍तर के साथ झेलम का पानी श्रीनगर में दाखिल हुआ और देखते-देखते राज्‍य की राजधानी को तबाह कर डाला।

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