Jharkhand polls: झारखंड छठवां प्रदेश हो सकता है, जहां बीजेपी नहीं बना पाएगी सरकार!
बेंगलुरू। झारखंड विधानसभा चुनाव के आखिरी दौर का मतदान 20 दिसंबर को खत्म हो गया और अब विपक्ष समेत सत्तासीन बीजेपी को भी 23 दिसंबर का बेसब्री से इंतजार है जब सुबह 6.30 बजे मतगणना शुरू होगी। झारखंड में आखिरी पोल के बाद आए सभी एग्जिट पोल नतीजों में बीजेपी के हारने की संभावना जताई गई है। अगर बीजेपी झारखंड में भी सत्ता से बाहर होती है तो यह छठवां प्रदेश होगा, जहां बीजेपी एक के बाद एक सत्ता से बाहर होने जा रही है।

हालांकि सी वोटर एग्जिट पोल में झारखंड में हंग असेंबली की आशंका व्यक्त की गई है। अगर ऐसा होता है तो बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस, जेएमएम और आरजेडी पूरी कोशिश करती दिख सकती है। महाराष्ट्र का उदाहरण हमारे बीच मौजूद है, जहां कांग्रेस ने सत्ता के लिए परस्पर विरोधी शिवसेना को समर्थन देने से गुरेज नहीं किया और वहां बीजेपी नंबर वन पार्टी रहकर भी सत्ता से बाहर है।

वर्ष 2014 झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी 37 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (AJSU) 5 सीटों की मदद से पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में कामयाब रही थी। रघुबर राव के नेतृत्व में झारखंड में बनी यह पहली बीजेपी सरकार थी, जिसने झारखंड की स्थापना के करीब 19 वर्ष बाद पूरे कुल पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया है।

दरअसल, बीजेपी भी जानती है कि झारखंड में सीएम रघुबर दास ने भले ही 5 साल का कार्यकाल पूरा किया है, लेकिन उनकी छवि जनजातियों इलाकों में अच्छी नहीं रही हैं, जहां बीजेपी को सर्वाधिक नुकसान की संभावना जताई जा रही है। इसका प्रमुख कारण रघुबर दास का बाहरी होना भी हैं। हालांकि अगर रघुबर दास के नेतृत्व में बीजेपी शहरी सीट कब्जाने में कामयाब रही तब एग्जिट पोल फेल हो जाएंगे।

गौरतलब है पिछले विधानसभा चुनाव में झारखंड में बीजेपी की शानदार जीत के नायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरा माना जाता है, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव बीजेपी के प्रचंड जीत के बाद भी महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा के नतीजे बीजेपी के लिए ज्यादा अच्छ नहीं रहे। दोनों राज्यों में बीजेपी की सीटों की संख्या कम हुई है जबकि विरोधी दलों की सीटों और मत फीसदी में उभार हुआ है।

हालांकि महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में बीजेपी के सीटों की संख्या में आई कमी के लिए पीएम मोदी के जादू कम होना इसलिए नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि जनता अब पहले से अधिक समझदार हुई है और विधानसभा चुनाव में केंद्रीय चुनावी मुद्दों मसलन अनुच्छेद 370, राम मंदिर, ट्रिपल तलाक और नागरिकता संशोधन कानून के बजाय स्थानीय मुद्दों को अधिक तरजीह दे रही है।
इसकी तस्दीक लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र और हरियाणा में जबर्दस्त जीत करती है, जहां बीजेपी को बड़ी जीत दिलाने वाले दोनों निवर्तमान मुख्यमत्री क्रमशः देवेंद्र फडणवीस और मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व का बड़ा योगदान था, लेकिन दोनों विधानसभा में दोनों सीएम केद्रीय मुद्दों भुनाने में असफल रहे और दोनों राज्यों में पार्टी पिछले चुनाव से कम सीटों से संतोष करना पड़ा।

झारखंड विधानसभा चुनाव के बाद आए एग्जिट पोल के नतीजे और झारखंड के निवर्तमान मुख्यमंत्री रघुबर दास के चुनावी कैंपेन में केंद्रीय मुद्दों पर आधारित प्रचार सामग्री भी कुछ इसी तरफ इशारा कर रहे हैं कि बीजेपी को झारखंड में भी महाराष्ट्र और हरियाणा के जैसे ही नतीजे हासिल हो सकते हैं। एक सर्वे के दावों पर भरोसा करें तो बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार रघुबर दास इस बार वहां की जनता पंसदीदा मुख्यमंत्री में शुमार नहीं थे, जहां वो जेजेएम कैंडीडेट हेमंत सोरेन से पीछे हैं।

एग्जिट पोल के आंकड़े, पंसदीदी मुख्यमंत्री के लिए किए सर्वे के नतीजों और जनता के मूड भी इशारा करते हैं कि बीजेपी को मौजूदा विधानसभा चुनाव नतीजों में बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। सभी एग्जिट पोलों में बीजेपी को औसतन 29 सीटों पर जीता हुआ दिखाया जा रहा है, जो बहुमत के लिए जरूरी जादुई नंबर 42 से 13 सीट कम है।

जबकि जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन को सभी एग्जिट पोलों में 42 सीटों पर जीता हुआ बताया जा रहा है, जो झारखंड में गठबंधन सरकार बनने की ओर संकेत कर रहा है। हालांकि अभी रिपब्लिक भारत का एग्जिट पोल नहीं जारी किया गया है और सी वोटर ने झारखंड में इस बार त्रिशंकु विधानसभा का अनुमान किया है। त्रिशंकु विधानसभा भी बीजेपी को सत्ता तक पहुंचा पाएगी इसकी गुंजाइश कम दीखती है।
उल्लेखनीय है पिछली झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी सहयोगी दल AJSU के साथ चुनाव में उतरी थी और उस वक्त लोगों के सिर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू चढ़कर बोला था। तब बीजेपी गठबंधन ने 81 सीटों वाले झारखंड विधानसभा में रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए कुल (37+5) 42) सीटें अपने नाम कर ली।

वर्ष 2014 झारखंड विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रही झारखंड मुक्ति मोर्चा ने महज 19 सीटें जीतीं थीं, लेकिन कांग्रेस का हाल बहुत बुरा रहा था और उसके खाते में में महज 6 विधानभा सीटें आईं थी, लेकिन महाराष्ट्र में बीजेपी को सत्ता से बाहर करके कांग्रेस मनोबल का झारखंड में मजबूत हैं।
बीजेपी ने महाराष्ट्र और हरियाणा के नतीजों से सबक लेते हुए झारखंड विधानसभा में आजसू से गठबंधन तोड़कर एकला चलने की रणनीति अपना ली थी। बीजेपी की यह रणनीति कितनी सफल होती है इसका पता तो चुनाव नतीजे के दिन ही पता चल सकेगा। झारंखड में आजसु से गठबंधन से अलग होने के पीछे महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नतीजे हैं, जहां बीजेपी को लगता है कि अगर अकेल लड़ती तो बहुमत का आकंड़ा छू सकती थी।

उधर, कांग्रेस ने महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा नतीजों को देखते हुए ही झारखंड में जेजेएम और आरजेडी गठबंधन करके चुनाव में उतरने का फैसला किया था। कांग्रेस का यह दांव झारखंड में भी बीजेपी पर भारी पड़ता भी दिख रहा है, क्योंकि एग्जिट पोल के नतीजों में कांग्रेस, जेएएम और आरजेडी गठबंधन को बहुमत मिलता दिखाया जा रहा है।
सभी जानते हैं कि वर्ष 2019 में हुए दो राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी है, जहां बीजेपी को वर्ष 2014 विधानसभा चुनाव की तुलना में कम सीटें हासिल हुईं जबकि कांग्रेस समेत क्षेत्रीय दलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी पिछले विधानसभा से कम सीटें मिलीं और हरियाणा विधानसभा में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए जेजेपी का सहयोगी लेना पड़ा।

कमोबेश बीजेपी की यही हालत झारखंड में होती दिख रही हैं। 23 दिसंबर को होने वाली मतगणना के नतीजों में अगर बीजेपी नंबर वन पार्टी बनकर उभरती है, तो सरकार बनाने के लिए उसे ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन चीफ सुदेश महतों की सीटों के जीते हुए सीटों पर निर्भर करना पड़ेगा, जो इस बार बीजेपी के साथ गठबंधन में शामिल नहीं है।
इससे पहले, बीजेपी वर्ष 2017 में पंजाब में सत्ता से बाहर हो गई थी। वर्ष 2018 विधानसभा चुनाव में बीजेपी एक साथ तीन बीजेपी शासित राज्यों में सत्ता से बाहर हो गई थी। इनमें राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। 2019 में महाराष्ट्र में भी बीजेपी सत्ता से बाहर हो गई, क्योंकि उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद के लिए छोड़कर परस्पर विरोधी दल कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बना ली थी। अगर बीजेपी झारखंड में हारती है या त्रिशंकु सरकार की स्थिति बनती है तो यहां भी बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए विपक्षी दल पूरी कोशिश करेंगी।
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सर्वे नतीजों में हेमंत सोरेन से पिछड़े मुख्यमंत्री रघुबर दास
एग्जिट पोल के नतीजे और मुख्यमंत्री रघुबर दास के चुनावी कैंपेन में केंद्रीय मुद्दों पर आधारित प्रचार कुछ इसी तरफ इशारा कर रहे हैं कि बीजेपी को झारखंड में भी महाराष्ट्र और हरियाणा की तरह ही नतीजे हासिल हो सकते हैं। एक सर्वे के दावों पर भरोसा करें तो बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार रघुबर दास से ज्यादा वहां की जनता जेजेएम सीएम कैंडीडेट हेमंत सोरेन का पंसद करती है।

एग्जिट पोलों में बीजेपी को औसतन 29 सीट मिलने का अनुमान
एग्जिट पोल के आंकड़े, सर्वे के नतीजे और जनता के मूड इशारा करते हैं कि बीजेपी को मौजूदा विधानसभा चुनाव नतीजों में नुकसान झेलना पड़ सकता है। सभी एग्जिट पोलों में बीजेपी को औसतन 29 सीटों पर जीता हुआ दिखाया जा रहा है, जो बहुमत के लिए जरूरी जादुई नंबर 42 से 13 सीट कम है जबकि जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन को सभी एग्जिट पोलों में 42 सीटों पर जीता हुआ बताया जा रहा है, जो झारखंड में गठबंधन सरकार बनने की ओर संकेत कर रह है। हालांकि अभी रिपब्लिक भारत का एग्जिट पोल नहीं जारी किया गया है और सी वोटर ने झारखंड में इस बार त्रिशंकु विधानसभा का अनुमान किया है।

सीएम रघुबर दास की छवि जनजातियों इलाकों में अच्छी नही
वर्ष 2014 झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी 37 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (AJSU) 5 सीटों की मदद से पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में कामयाब रही थी। रघुबर राव के नेतृत्व में झारखंड में बनी यह पहली बीजेपी सरकार थी, जिसने झारखंड की स्थापना के करीब 19 वर्ष बाद पूरे कुल पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया है। बीजेपी आलाकमान भी जानती है कि झारखंड में रघुबर दास ने भले ही पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है, लेकिन उनकी छवि जनजातियों इलाकों में अच्छी नही हैं। इसका प्रमुख कारण रघुबर दास का बाहरी होना भी हो सकता हैं।

पिछले चुनाव में झारखंड में शानदार जीत के नायक थे PM मोदी
पिछले विधानसभा चुनाव में झारखंड में बीजेपी की शानदार जीत के नायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरा था, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव के बाद हुए महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा के नतीजे बीजेपी के लिए ज्यादा आशावादी नहीं रह गए है, जहां बीजेपी की सीटों की संख्या कम हुई है जबकि विरोधी दलों की सीटों और मत फीसदी में उभार हुआ है।

झारखंड में केंद्रीय मुद्दों का लाभ नहीं उठा पाएंगे रघुबर दास?
महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी के सीटों की संख्या में आई कमी तय हो चुका है क जनता अब पहले से अधिक समझदार हुई है और विधानसभा चुनाव में केंद्रीय चुनावी मुद्दों मसलन अनुच्छेद 370, राम मंदिर, ट्रिपल तलाक और नागरिकता संशोधन कानून के बजाय स्थानीय मुद्दों को अधिक तरजीह दे रही है। इसलिए माना जा रहा है कि झारखंड में भी बीजेपी को ज्यादा फायदा नहीं होगा।

महाराष्ट्र -हरियाणा के निवर्तमान CM का विधानसभा चुनाव में नहीं चला जादू
लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र और हरियाणा में अपने नेतृत्व में जबर्दस्त जीत दिलाने वाले दोनों निवर्तमान मुख्यमत्री क्रमशः देवेंद्र फडणवीस और मनोहर लाल खट्टर को विधानसभा में केद्रीय मुद्दों भुनाने में असफल रहे और दोनों पार्टियों को पिछले चुनाव से कम सीटों से संतोष करना पड़ा।

पिछले चुनाव में सहयोगी दल AJSU के साथ मैदान में उतरी थी बीजेपी
पिछली झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी सहयोगी दल AJSU के साथ चुनाव में उतरी थी और उस वक्त लोगों के सिर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू चढ़कर बोला था। तब बीजेपी गठबंधन ने 81 सीटों वाले झारखंड विधानसभा में रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए कुल (37+5) 42) सीटें अपने नाम कर ली। दूसरे नंबर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा रही, जिसे महज 19 सीटें हासिल हुईं थी, लेकिन कांग्रेस का हाल बहुत बुरा रहा था और उसके खाते में में महज 6 विधानभा सीटें आईं थी, लेकिन महाराष्ट्र में बीजेपी को सत्ता से बाहर करके कांग्रेस मनोबल का झारखंड में मजबूत है।












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