कोई घर का अकेला कमाने वाला, किसी के बच्चे को पिता का इंतजार, रुला देंगी पुंछ में शहीद जवानों की कहानियां

जम्मू कश्मीर: रुला देगी पुंछ में शहीद हुए पांच जवानों की कहानियां

श्रीनगर, 12 अक्टूबर: जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में सोमवार को हुई मुठभेड़ में सेना के पांच जवान शहीद हो गए। जिसमें एक अधिकारी और चार जवान शामिल हैं। सूरनकोट में पांच जवानों की शहादत के बाद देश में गम का माहौल है। इस मुठभेड़ में नायब सूबेदार जसविंदर सिंह, नायक मनदीप सिंह, सिपाही गज्जन सिंह, सिपाही सराज सिंह और सिपाही वैसाख एच की जान गई है। शहीद हुए इन पांचों जवानों और उनके परिवारों की कहानियां रुलाने वाली हैं।

12वीं के बाद सेना में शामिल हुए थे जसविंदर सिंह

12वीं के बाद सेना में शामिल हुए थे जसविंदर सिंह

शहीदों में पंजाब के कपूरथला जिले के माना तलवंडी गांव के रहने 39 साल के नायब सूबेदार जसविंदर सिंह भी हैं। जसविंदर 2001 में 12 वीं कक्षा के बाद ही सेना में शामिल हो गए थे। सिंह को 2006 में कश्मीर में तीन आतंकवादियों को मारने में अपनी भूमिका के लिए सेना पदक से सम्मानित किया गया था। पुंछ में जसविंदर सिंह आतंकियों की गोली का शिकार होकर शहीद हो गए। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे जसविंदर मई में आखिरी बार घर आए थे जब उनके पिता की मृत्यु हुई थी। उनके परिवार में पत्नी सुखप्रीत कौर के अलावा 13 साल का बेटा विक्रजीत और 11 साल की बेटी हरनूर कौर है।

 दो साल पहले ही हुई थी सराज सिंह की शादी

दो साल पहले ही हुई थी सराज सिंह की शादी

25 साल के सिपाही सराज सिंह चार साल पहले अपने बड़े भाइयों गुरप्रीत और सुखवीर सिंह के नक्शेकदम पर चलते हुए सेना में शामिल हुए थे। दो साल पहले दिसंबर 2019 में उनकी शादी हुई थी। रविवार को ही उन्होंने अपनी पत्नी रंजीत कौर से बात की और दीपावली पर घर आने का वादा कर फोन काट दिया था। सोमवार को परिजनों को उनकी शहादत की खबर मिली।

केरल का 23 साल का जवान भी शहीद

केरल का 23 साल का जवान भी शहीद

पुंछ में शहीद सिपाही वैसाख एच केरल के कोल्लम जिले के कुदावट्टूर गांव के रहने वाले थे। 23 साल के वैशाख 2017 में सेना में शामिल हुए थे। वैशाख अपने परिवार ने एकमात्र कमाने वाले शख्स थे। वैशाख के परिवार में उनकी मां बीना कुमारी और छोटी बहन शिल्पा हैं।

मुठभेड़ से कुछ घंटे पहले की थी भाई से बात

मुठभेड़ से कुछ घंटे पहले की थी भाई से बात

शहीद हुए पांच सैनिकों में 30 साल के नायक मंदीप सिंह ने डेढ़ साल पहले अपने भाई जगरूप सिंह से आखिरी बार मुलाकात की थी, जो राजस्थान के गंगानगर में तैनात हैं। अपने भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पंजाब के गुरदासपुर के गांव छठा गांव पहुंचे जगरूप ने बताया कि उनकी पोस्टिंग को देखते हुए, दोनों ने हाल ही में तो केवल वीडियो कॉल पर ही बात की थी। उनकी आखिरी वीडियो कॉल पुंछ मुठभेड़ से कुछ घंटे पहले की थी।

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