Jagdeep Dhankhar: किसान के बेटे से उपराष्ट्रपति तक, जानिए जगदीप धनखड़ का राजनीतिक सफर, कितनी मिलती थी सैलरी
Jagdeep Dhankhar Profile: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को अचानक पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों और डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हुए अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा है। जगदीप धनखड़ ने 2022 से भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी।
उपराष्ट्रपति के पद पर धनखड़ का कार्यकाल 2 वर्ष बाद खत्म होने वाला था लेकिन सोमवार को अचानक पद से इस्तीफा देकर उन्होंने सबको हैरान कर दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया है लेकिन उनके यूं अचानक इस्तीफा देने से तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। आइए जानते जगदीप धनखड़ का अब तक का कैसा रहा राजनीतिक सफर...

जगदीप धनखड़ ने 2022 में भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने 6 अगस्त, 2022 को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था। धनखड़ को कुल 725 में से 528 वोट मिले थे, जबकि अल्वा को 182 वोट मिले थे।
- उपराष्ट्रपति बनने से पहले वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। 2019 से 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दी
- जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई, 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से पूरी की। बाद में, छात्रवृत्ति प्राप्त करके वे चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल में पढ़ने चले गए। नेशनल डिफेंस एकेडमी में उनका चयन हुआ था, लेकिन वे वहां नहीं गए।
- जयपुर के महाराजा कॉलेज से बीएससी (ऑनर्स) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई पूरी की। फिर जयपुर में वकालत शुरू की और राजस्थान उच्च न्यायालय के एक जाने-माने वकील बने।
- 1979 में उन्होंने राजस्थान बार काउंसिल की सदस्यता ली और 27 मार्च, 1990 को वे राजस्थान उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता बने। इसी दौरान वे सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस करते रहे। वे 1987 में राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी चुने गए थे।
- जगदीप धनखड़ चौधरी देवीलाल की राजनीति से प्रभावित थे और देवीलाल ही उन्हें राजनीति में लेकर आए थे। 1989 में देवीलाल के 75वें जन्मदिन पर, धनखड़ राजस्थान से 75 गाड़ियों का काफिला लेकर उन्हें बधाई देने दिल्ली पहुंचे थे। उसी वर्ष लोकसभा चुनाव में, वीपी सिंह के जनता दल ने उन्हें उनके गृहनगर झुंझुनू से टिकट दिया। वीपी सिंह की सरकार में देवीलाल उपप्रधानमंत्री बने और धनखड़ को केंद्र में मंत्री पद मिला।
- जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से अचानक क्यों दिया इस्तीफा? सिर्फ खराब स्वास्थ्य या कुछ और भी?
जगदीप धनखड़ को कितनी मिलती थी सैलरी?
उपसभापति और उपराष्ट्रपति के पर रहते हुए जगदीप धनखड़ का वार्षिक वेतन ₹480,0000 था। राष्ट्रपति के तौर पर पर उन्हें प्रति माह 4 लाख रुपये मिलता था । इसके अलावा उपराष्ट्रपति के तौर पर उनको अन्य कई सुविधाएं मिलती थीं।
गौतरलब है कि भारत में उपराष्ट्रपति के पद के लिए कोई सीधा वेतन निर्धारित नहीं है। उन्हें यह वेतन राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में दिया जाता है। यह व्यवस्था 'संसद अधिकारी के वेतन और भत्ते अधिनियम, 1953' के तहत की गई है। 2018 में संशोधन से पहले यह वेतन 1.25 लाख रुपये था, जिसे बाद में बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दिया गया था।












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