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कोरोना से जरूरी है डरना, अब तक 99 डाक्टर गंवा चुके हैं जान, 1302 अभी भी हैं संक्रमित

नई दिल्ली। दुनियाभर में 6 लाख से अधिक मौतों का जिम्मेदार नोवल कोरोनावायरस से धरती के भगवान भी सुरक्षित नहीं हैं। भारतीय संदर्भ में भी यह आंकड़े भयावह तस्वीर दिखा रहे हैं। इंडियन मेडिकल एशोसिएसन द्वारा जारी आंकड़े के मुताबिक भारत में अब तक कुल 99 डाक्टरों की मौत हो चुकी है, जबकि 1300 से अधिक डाक्टर कोरोना पॉजिटिव हैं, जिनका इलाज चल रहा है।

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अभी भारत समेत दुनियाभर के वैज्ञानिक वैक्सीन विकसित करने में जुटे हैं

अभी भारत समेत दुनियाभर के वैज्ञानिक वैक्सीन विकसित करने में जुटे हैं

महामारी से निपटने के लिए अभी तक कोई माकूल जवाब तैयार नहीं किया जा सका है। भारत समेत दुनियाभर के वैज्ञानिक एंटी कोरोना वैक्सीन विकसित करने में जुटे हैं, लेकिन वैक्सीन के लोगों तक पहुंचने में अभी दो से चार महीने और लगने तय हैं। हालांकि रूस से कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा किया है, जिसके सितंबर तक बाजार में उपलब्ध होने की बात कही जा रही है।

कोरोना वायरर्स यानी डाक्टरों की मौत एक भयावह स्थिति को दर्शा रहे है

कोरोना वायरर्स यानी डाक्टरों की मौत एक भयावह स्थिति को दर्शा रहे है

अन्य कई देशों ने भी वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल का दावा कर चुके हैं, लेकिन संक्रमितों के इलाज में जुटे कोरोना वायरर्स यानी डाक्टरों की मौत एक भयावह स्थिति को दर्शा रहे है। भारतीय कंपनी बायोटेक और कैडिला हेल्थकेयर ने आगामी 15 अगस्त तक वैक्सीन को लांच करने की तारीख दी है, जिसका अभी ह्यूमन ट्रायल चल रहा है। आशा की जा सकती है कि यह वैक्सीन लांचिंग के एक दो महीने बाद लोगों के लिए उपलब्ध होगा।

भारत में कम से कम 99 डॉक्टरों की कोरोना से मौत हो चुकी है: IMA

भारत में कम से कम 99 डॉक्टरों की कोरोना से मौत हो चुकी है: IMA

IMA का कहना है कि भारत में कम से कम 99 डॉक्टरों की कोरोना से मौत हो चुकी है और संक्रमित होने के बाद मरने वाले डॉक्टरों में महाराष्ट्र राज्य के आंकड़े सबसे अधिका है। कोरोना संक्रमितों के मामले में महाराष्ट्र वैसे भी भारत का सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है, जहां अब तक लगभग 11000 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,75000 से अधिक लोग संक्रमित हैं।

भारत में कोरोना से मरने वाले डॉक्टरों की मृत्यु दर 8 फीसदी है

भारत में कोरोना से मरने वाले डॉक्टरों की मृत्यु दर 8 फीसदी है

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कोरोना से मरने वाले डॉक्टरों की मृत्यु दर 8 फीसदी है, लेकिन महाराष्ट्र में संक्रमित डाक्टरों की मौत का आंकड़ा सर्वाधिक 20 फीसदी है। आईएमए ने बताया कि उन्होंने कोरोना संक्रमितों के लिए जान पर खेले रहे ऐसे सभी डॉक्टरों और चिकित्सा प्रशासकों से ऐहतियात बरतने के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।

मरने वालों में से 73 डॉक्टरों की उम्र 50 साल से अधिक थी

मरने वालों में से 73 डॉक्टरों की उम्र 50 साल से अधिक थी

IMA नेशनल कोरोना रजिस्ट्री डेटा के अनुसार COVID-19 संक्रमित कुल 1302 संक्रमित डाक्टरों में से अब तक कुल 99 डॉक्टर दम तोड़ चुके हैं। मृतकों में 73 डॉक्टरों की उम्र 50 साल से अधिक थी, जबकि मरने वाले 19 डाक्टरों की उम्र 35-40 के बीच थी। वहीं, 8 डॉक्टर 35 साल से कम उम्र के थे। संक्रमित डाक्टरों में 586 डाक्टर नॉन पब्लिक डाक्टर हैं और 566 रेजीडेंट डाक्टर हैं, शेष 150 होम सर्जन हैं।

मुंबई में निजी और गैर-निजी अस्पतालों में 1,000 से अधिक डाक्टर संक्रमित

मुंबई में निजी और गैर-निजी अस्पतालों में 1,000 से अधिक डाक्टर संक्रमित

आईएमए के अध्यक्ष डॉ राजन शर्मा ने कहा, अगर कोरोना की मृत्यु दर में कमी होनी चाहिए और इसकी शुरूआत डाक्टरों और अस्पतालों से होनी चाहिए। मुंबई में निजी और गैर-निजी अस्पतालों में 1,000 से अधिक स्वास्थ्य सेवा कर्मचारी अब तक प्रभावित हो चुके हैं। मुंबई के केईएम और सायन अस्पतालों में 300-300 से अधिक संक्रमण के मामले सामने आए हैं। शहर ने डॉक्स के अलावा 9 मौतों को देखा है।

वरिष्ठ और युवा डॉक्टर कोरोनावायरस से समान रूप से संक्रमित हैं

वरिष्ठ और युवा डॉक्टर कोरोनावायरस से समान रूप से संक्रमित हैं

IMA द्वारा आंकड़ों के किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि वरिष्ठ और युवा डॉक्टर कोरोनावायरस से समान रूप से संक्रमित हैं, जबकि बड़ों में मृत्यु दर अधिक है। आईएमए ने सभी सर्वोत्तम वैज्ञानिक तरीको को अपनाने में डॉक्टरों के नेतृत्व की पुरजोर वकालत किया और संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल सहित अस्पतालों में सभी प्रशासनिक सेट अप की गहन समीक्षा और अपडेट की जरूरत पर बल दिया।

महाराष्ट्रसरकार निजी चिकित्सकों की सुरक्षा के प्रति लापरवाह थी

महाराष्ट्रसरकार निजी चिकित्सकों की सुरक्षा के प्रति लापरवाह थी

आईएमए अध्यक्ष (महाराष्ट्र) डॉ अविनाश भोंडवे ने उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य सरकार निजी चिकित्सकों की सुरक्षा के प्रति लापरवाह थी और उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की उपलब्धता को सुचारू से दिलाने में विफल रही। उन्होंने बताया कि कई छोटे अस्पतालों ने मनमाने ढंग से बिना गांरटी वाले मेडिकल सामग्री उपकरण खरीद लिए।

कोविड अस्पतालों में बदले गए कई कोविद केंद्र के लिए अयोग्य हो चुके थे

कोविड अस्पतालों में बदले गए कई कोविद केंद्र के लिए अयोग्य हो चुके थे

उन्होंने आगे कहा कि कोविड अस्पतालों में बदले गए कई कोविद केंद्र के लिए अयोग्य हो चुके हैं, लेकिन उन्हें फिर भी बरकरार रखा गया। यहां तक कि निजी डॉक्टरों को भी बताया गया कि केंद्रीय इंश्योरेंस कवरेज भी उनके साथ लंबे समय तक नहीं थे। आईएमए ने सफाई और प्रोटोकॉल को सावधानीपूर्वक पालन करने जोर देते हुए कहा कि आईएमए डॉक्टरों और चिकित्सा प्रशासकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए RED ALERT घोषित करता है।

चिकित्सा पेशा राष्ट्र के लिए महामारी से बाहर निकलने की आशा का केंद्र

चिकित्सा पेशा राष्ट्र के लिए महामारी से बाहर निकलने की आशा का केंद्र

आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजन शर्मा ने कहा कि जहां चिकित्सा पेशा राष्ट्र के लिए महामारी से बाहर निकलने की आशा का केंद्र बना हुआ है, वहीं डॉक्टरों के बीच COVID-19 की मौत बहुत चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि डाक्टरों की सुरक्षा की चिंताओं को देखते हुए उनके काम के घंटों को नियंत्रित किया जाना चाहिए और पीपीई, प्रशिक्षण और सैनिटाइटर की दैनिक आधार पर निगरानी की जानी चाहिए।

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