कोरोनो से डाक्टर भी सुरक्षित नहीं, फिलीपींस में अब तक 9 डॉक्टरों की ले चुकी है जान!
मनीला। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण का प्रकोप डाक्टरों के लिए भी बड़ी मुसीबत बन गई है। चीन में कोरोना वायरस के इलाज करने वाले एक डाक्टर की मौत पहले सुर्खियां बनी थी, लेकिन फिलीपींस से बुरी खबर आ रही है, जहां एक नहीं बल्कि 9 कोरोना संक्रमित डाक्टरों की मौत की खबर है।

गुरूवार को फिलीपींस के शीर्ष चिकित्सा संघ ने बताया कि फिलीपींस में कोरोना संक्रमित 9 डॉक्टरों की मौत हो चुकी है। संघ के मुताबिक 9 डाक्टरों की मौत की वजह अस्पताल में रोगियों की भारी भीड़ थी, क्योंकि फ्रंटलाइन पर मौजूद डाक्टरों के पास पर्याप्त सुरक्षा नहीं थी, जिसकी शिकायत मृतक डाक्टरों ने की थी।

माना जा रहा है कि 9 डॉक्टरों की मौतों की घोषणा से आशंका बढ़ गई है कि फ़िलिपींस में स्वास्थ्य संकट का पैमाना बताए जा रहे आधिकारिक तौर आंकड़ों की तुलना में बदतर हो सकता है। हालांकि अभी तक फिलीपींस में कोरोना वायरस संक्रमित 38 मरीजों की मौत की पुष्टि की गई है।

गौरतलब है फिलीपींस के 55 लाख आबादी वाले मुख्य द्वीप लूजॉन में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए किया गया लॉकडाउन अपने दूसरे सप्ताह में है, हालांकि डाक्टर चेतावनी दे रहे हैं कि लुजॉन द्वीप में कोरोना के मामल बढ़ रहे हैं।

फिलीपींस मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक कोरोना वायरस संक्रमित 9वें डॉक्टर की मौत गुरूवार को हुई। एसोसिएशन का कहना है कि फिलीपींस में स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना वायरस संक्रमण से पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही थी।

फिलीपींस मेडिकल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बेनिटो एटिंजा ने कहा कि चिकित्सक कोरोना वायरस के स्वयं वाहक हो सकते हैं, क्योंकि यह डाक्टरों के ऊपर था कि पहले वह फ्रंटलाइनरों का परीक्षण करें और सात दिनों के बाद दोबारा उनका परीक्षण करें।
उल्लेखनीय है गत बुधवार को ही मनीला के तीन बड़े अस्पतालों ने घोषणा की थी कि मरीजों को एडमिट करने की उनकी क्षमता खत्म हो चुकी है और अब नए मामलों को स्वीकार नहीं करेंगे। अस्पतालों ने कहा कि सैकड़ों मेडिकल कर्मचारी अब मरीजों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, क्योंकि कोरोना वायरस की संदिग्धता के बीच वो खुद 14-दिन आइसोलेशन में चले गए थे।

बताया जाता है अभी हाल ही में फिलीपींस में 2,000 लोगों का कोरोना वायरस परीक्षण किया गया था, जिनमें गंभीर लक्षण पाए गए थे, जो COVID -19 संक्रमित मरीज के लिए सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है। इनमें खतरनाक बीमारी से जूझ रहे बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं शामिल थीं।
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