बेचारे उमर अब्दुल्ला चुनाव से पहले ही हाथ खड़े करने लगे
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। अब जम्मू-कश्मीर में चुनाव सिर पर हैं और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला कह रहे हैं कि कांग्रेस ने उन्हें कभी सही तरह से काम ही करने दिया। इसके साथ ही वे मानने लगे हैं कि आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा जम्मू और लद्दाख में बेहतर प्रदर्शन करने जा रही है। टीवी चैनलों से लेकर तमाम सभाओं में उमर इन दोनों बातों को दोहरा रहे हैं।

सत्ता से होंगे बेदखल
जम्मू-कश्मीर मामलों के जानकार आसिफ सोहाफ कहते हैं कि उमर का भाजपा का बेहतर प्रदर्शन करने की बात करना साफ करता है कि वे सत्ता से बेदखल होने जा रहे हैं। अब उनके सामने कोई विकल्प नहीं बचा है। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी ने अपने मिशन 44 के तहत राज्य में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। उसे उम्मीद है कि विस्थापित कश्मीरी पंडित मतदाता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर की सियासत में कमल का फूल खिला देंगे। जानकार मानते हैं कि राज्य का युवा इस बार मोदी को मौका देने के मूड में लगता है।
87 सदस्यीय राज्य विधानसभा में कश्मीर घाटी से ही 50 सदस्य चुने जाते हैं। इनमें से चार लद्दाख के होते हैं। सूत्रों का कहना है कि जम्मू क्षेत्र में तो जमकर खिलेगा कमल। उसे घाटी में भी कुछ सीटें मिल सकती हैं। भाजपा इस समय अनंतनाग, खानयार, त्राल, कुलगाम, गांदरबल, हब्बाकदल, सोनवार और अमीराकदल के साथ उत्तरी कश्मीर में सोपोर पर फोकस रखे हैं। इधर उसके कार्यकर्ता हैं। इसके अलावा कश्मीरी पंडित भी हैं।
भाजपा को कहीं न कहीं लगता है कि वहहब्बाकदल, अमीराकदल और सोपोर सीटें जीत सकती हैं। इन सबमें कश्मीरी पंडित खासी तादाद में हैं। उसे यकीन है कि कश्मीरी पंडित तो उसे ही वोट देंगे। भाजपा इस बार कश्मीर घाटी में खाता खोलने के लिए बेताब है।
इस बीच, कांग्रेस के नेता सैफउदीन सोज ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। उनका तर्क है कि वे सारे प्रदेश को देख रहे हैं। इसलिए चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि उनके पुत्र सलमान का बारामुल्ला सीट से लड़ना तय है।
उधर, जानकारों का कहना है कि जम्मू एवं कश्मीर के बड़गाम जिले में सेना की गोली से सोमवार को दो युवकों की मौत से भाजपा को चुनावों में नुकसान हो सकता है। प्रदेश की जनता सेना को केन्द्र का ही मानती है। इसलिए भाजपा को नुकसान हो सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी की विकास पुरुष की इमेज के चलते भाजपा के हक में राज्य में भी पहली बार माहौल बना है।












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