क्या बिहार में बीजेपी को नहीं मिल रहा कोई 'अजित पवार'?
महाराष्ट्र में बीते रविवार यानी 2 जुलाई को अजित पवार ने अपने ही चाचा और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार का तख्ता पलट कर दिया। अगले दिन यानी 3 जुलाई को को सीबीआई ने बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का नाम 'लैंड फॉर जॉब घोटाले' की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में डाला।
इस केस में लालू यादव, राबड़ी देवी और इनकी बड़ी बेटी और राज्यसभा सांसद मीसा भारती का नाम पहले से ही दर्ज था। तेजस्वी पहले से ही जांच एजेंसियों पर भाजपा का एक्सटेंशन ऑफिस होने का आरोप लगाते आ रहे थे। चार्जशीट में उनका नाम आने पर लालू ने पीएम मोदी को 'सबसे बड़ा भ्रष्ट' कहकर हमला किया।

बिहार में महाराष्ट्र वाली स्थिति के किए गए दावे
इस घटना के साथ ही बिहार के सत्ताधारी गठबंधन के अगुवा नीतीश कुमार और उनकी पार्टी को लेकर कई तरह की अटकलें शुरू हो गईं। 45 एमएलए वाली उनकी जेडीयू में टूट के दावे शुरू हो गए। कई टीवी चैनलों में बिहार में भी 'अजित पवार' की तरह के संभावित विद्रोह की खबरें चलने लगीं।
केंद्रीय मंत्री और आरपीआई नेता रामदास अठावले ने भी दावा किया कि बिहार में भी महाराष्ट्र वाली स्थिति पैदा हो सकती है। भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने यह कहकर कि नीतीश नाक भी रगड़ें तो भी पार्टी उन्हें नहीं स्वीकार करेगी, जेडीयू में खलबली की आशंका को और हवा मिली।
नीतीश के वन-टू-वन मुलाकात ने दी खबरों को हवा
इन अटकलों के जोर पकड़ने के पीछे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से अचानक अपनी पार्टी के एमलए, एमएलसी और लोकसभा-राज्यसभा सांसदों के साथ अकेले में मुलाकात का दौर शुरू करना भी रहा। ऐसे भी कयास लगाए गए कि जदयू का राजद में विलय हो सकता है। पार्टी विधायकों में कथित डर के पीछे यह भी वजह बताई गई।
आरसीपी सिंह का भी उछल चुका है नाम
बिहार में जेडीयू में टूट के ऐसे दावे पहली बार नहीं हुए हैं। पिछले साल जब महाराष्ट्र में जून के महीने में सीएम एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दिया था। लगभग, उसी समय ऐसे आरोप लगे थे कि बीजेपी बिहार में भी जेडीयू को तोड़ने की कोशिश कर रही है। तब इसके लिए तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह का नाम उछला था, जो जेडीयू कोटे से मंत्री बनाए गए थे और नीतीश के बहुत ही खास माने जाते थे। आरोप लगे थे कि भाजपा उन्हें ही पार्टी में बगावत का मोहरा बनाना चाह रही थी।
आरसीपी सिंह अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं
इन दावों के बीच नीतीश ने आरसीपी को राज्यसभा में तीसरी बार जाने का मौका तो नहीं ही दिया जिससे उनकी कुर्सी चली गई, ऊपर से उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दल से भी बाहर कर दिया। पूर्व आईएएस अधिकारी रामचंद्र प्रसाद सिंह या आरसीपी आज भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
जेडीयू में टूट के लिए 30 एमएलए की जरूरत
जेडीयू के पास बिहार में 45 एमएलए हैं। ऐसे में इसे दल-बदल विरोधी कानून से बचते हुए तोड़ने के लिए कम से कम 30 एमएलए की आवश्यकता है। नीतीश मुख्यमंत्री हैं और उनकी सरकार और संगठन में स्वाभाविक पकड़ है। ऐसे में यह संख्या जुटाना मामूली काम नहीं है। न ही जदयू में नीतीश ने किसी को अपने मुकाबले में उभरने दिया है, जो उनके लिए ही चुनौती बन जाए।
आरपीसी की तरह एक और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा भी पहले ही नीतीश की ओर से साइडलाइन किए जा चुके हैं। ऐसे में अभी की परिस्थितियों में न ही नीतीश के जनता दल यूनाइटेड की स्थिति शरद पवार की एनसीपी वाली है और न ही उसमें 'अजित पवार' जैसा कोई कद्दावर नेता बचा है, जिसके दम पर कोई दूसरी पार्टी अपनी दल दाल गलाने की कोशिश कर सके।












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