ईरान के विदेश मंत्री ने जयशंकर को किया फोन, अमेरिकी प्रतिबंधों पर मांगी मदद
नई दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्री जावेद जारीफ ने सोमवार को अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से बात की। इस दौरान ईरान के विदेश मंत्री जयशंकर के सामने अमेरिका की तरफ से लगाए गए 'गैर-कानूनी और एकतरफा अमेरिकी प्रतिबंधों' का मुद्दा उठाया। दोनो नेताओं के बीच फोन पर हुई वार्ता में कोविड-19 पर भी चर्चा हुई है। महामारी में ईरान सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों की लिस्ट में है। कोरोना वायरस संकट के बीच यह पहला मौका है जब दोनों देशों के नेताओं ने फोन पर बात की है।

कोरोना के बीच प्रतिबंध चुनौती
हाल के दिनों में ईरान ने भारत के अलावा कुछ और देशों से फोन पर बात की है। साथ ही ईरान ने देशों से अपील की है कि वे अमेरिकी प्रतिबंधों को हराने में उसकी मदद करें ताकि वह कोरोना वायरस महामारी को मात दे सके। ईरान में कोरोना वायरस की वजह से 73,000 से ज्यादा लोग संक्रमित हुए और 4,600 लोगों की मौत हुई। ईरान के विदेश मंत्रालय ने जावेद जारीफ और जयशंकर के साथ हुई वार्ता को लेकर एक ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी। जारीफ और जयशंकर ने अफगानिस्तान में ताजा राजनीतिक घटनाक्रम पर भी चर्चा की। दोनों नेताओं ने खासतौर पर इस देश में शांति प्रक्रिया पर भी चर्चा की। जयशंकर ने भी इस बारे में ट्वीट विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने लिखा उनके और जारीफ के बीच कोरोना वायरस चुनौती से निपटने के लिए जरूरी प्रतिक्रियाओं पर भी वार्ता की। हालांकि जयशंकर ने यह नहीं बताया कि उनके और जारीफ के बीच कौन से अमेरिकी प्रतिबंधों पर बातचीत हुई।
IMF से मिलने वाले कर्ज को रोकने का कोई अधिकार नहीं
इस बीच ईरान सरकार के प्रवक्ता अली रबीए ने कहा कि कि अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की तरफ से ईरान को कर्ज दिया जा रहा है, उसे रोकने का अमेरिका को कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आईएमएफ स्वतंत्र तौर पर फैसला लेगा। उन्होंने कहा कि ईरान के लोगों का भी कर्ज पर पूरा अधिकार है। ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई है। अली रबीए ने कहा कि इस मुद्दे पर आईएमएफ किस तरह से प्रतिक्रिया देता है उससे यह पता लगेगा कि उसकी नीति अंतरराष्ट्रीय मामलों में एकतरफा फैसला लेने की नहीं है।












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