Operation Sindhu: बरसतीं मिसाइलों के बीच ईरान से निकाल लाए 90 कश्मीरी छात्र, कैसे हुआ रेस्क्यू ऑपेरशन?
Iran Israel war : इजरायल और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव के चलते, विदेश मंत्रालय (MEA) और भारत सरकार ने त्वरित कदम उठाते हुए अर्मेनिया में फंसे कश्मीरी छात्रों को सुरक्षित भारत वापस लाने की पहल की है। 18 जून को भारतीय क्शमीरी छात्रों का पहला जत्था अर्मेनिया की राजधानी येरेवन के ज़वार्तनोट्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 90 छात्रों को लेकर रवाना हो गया। यह विशेष विमान बुधवार की देर रात को भारतीय छात्रों को लेकर नई दिल्ली पहुंचेगा।
ये सभी छात्र Urmia University of Medical Sciences में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे और मौजूदा संघर्ष के चलते अर्मेनिया में असुरक्षा की भावना से जूझ रहे थे। अब भारत सरकार की तत्परता और संवेदनशीलता के चलते ये छात्र राहत की सांस ले पा रहे हैं।

ऑपरेशन सिंधु: ईरान से सुरक्षित निकाल रहे भारतीय छात्र
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्वीट किया, "ऑपरेशन सिंधु शुरू हुआ। भारत ने ईरान से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन सिंधु शुरू किया। भारत ने 17 जून को ईरान और आर्मेनिया में हमारे मिशनों की देखरेख में उत्तरी ईरान से 110 छात्रों को निकाला, जो आर्मेनिया में प्रवेश कर गए थे। वे येरेवन से एक विशेष उड़ान से रवाना हुए और 19 जून 2025 की सुबह नई दिल्ली पहुंचेंगे। भारत विदेश में अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।"

Kashmiri students Armenia: छात्रों ने जताया आभार
छात्रों को लेकर विमान आर्मेनिया की राजधानी येरेवन (Yerevan) के Zvartnots इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भर चुका है। यह आज रात लगभग 2 बजे दिल्ली हवाई अड्डे पर लैंड करेगी। यह ईरान से भारतीय नागरिकों की वापसी की दिशा में पहली औपचारिक उड़ान मानी जा रही है।
इन छात्रों में से कई ने ज़वार्तनोट्स हवाई अड्डे से रवाना होने से पहले कहा, "हम भारत सरकार और विदेश मंत्रालय के बहुत आभारी हैं जिन्होंने हमें इतनी जल्दी वापस बुला लिया। हम डर और अनिश्चितता में थे, लेकिन अब घर लौटने की खुशी शब्दों से परे है।"
जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के सहयोग से हुए इस बचाव अभियान की खूब सराहना हो रही है। एसोसिएशन ने अर्मेनिया में फंसे छात्रों की जानकारी इकट्ठा कर MEA को दी थी और लगातार संपर्क बनाए रखा।
Indian students Iran: अर्मेनिया में क्यों फंसे थे कश्मीरी छात्र?
ईरान और इजरायल के बीच छिड़े संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैला दी है। अर्मेनिया, जो इस क्षेत्र के नजदीक स्थित है, परोक्ष रूप से इस भू-राजनीतिक हलचल से प्रभावित हो रहा है। हाल के दिनों में अर्मेनिया में भी सुरक्षा चिंताओं और उड़ानों पर असर की आशंका बढ़ गई थी, जिससे वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों - विशेषकर कश्मीर घाटी से ताल्लुक रखने वाले युवाओं - को डर सताने लगा था।
Urmia University, जो ईरान की सीमा से अधिक दूर नहीं है, में पढ़ रहे ये छात्र तब से MEA और भारत सरकार से संपर्क में थे। तनाव की स्थिति बढ़ते ही सरकार ने तुरंत छात्रों की सूची तैयार कर उन्हें सुरक्षित निकालने की योजना पर काम शुरू किया।
नई दिल्ली में होगी छात्रों की अगवानी
बुधवार की रात जब यह विशेष उड़ान दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेगी, तो MEA के अधिकारियों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर प्रशासन के प्रतिनिधि भी छात्रों की अगवानी करेंगे। मीडिया सूत्रों के अनुसार, छात्रों को अस्थायी रुकावट की व्यवस्था, स्वास्थ्य जांच और आगे उनके गृह जिलों तक पहुंचाने की भी तैयारी की गई है।
जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता ने मीडिया से बातचीत करते हु्ए कहा, "हमने जब छात्रों की चिंता विदेश मंत्रालय के सामने रखी, तो तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। MEA ने हर स्तर पर सहयोग किया। यह भारत सरकार की सजगता और मानवीय दृष्टिकोण का प्रमाण है।"
जम्मू-कश्मीर प्रशासन भी छात्रों के संपर्क में रहा और परिजनों को नियमित जानकारी देता रहा। अधिकारियों ने बताया कि सभी छात्रों की सेहत ठीक है और किसी तरह की आपात स्थिति की सूचना नहीं है।
विदेश नीति में 'मानवीय प्राथमिकता' का उदाहरण
इजराइल-ईरान टकराव के कारण पूरे वेस्ट एशिया में सुरक्षा हालात बिगड़ चुके हैं। ऐसे में भारत सरकार 'ऑपरेशन घर वापसी' जैसे मिशन के जरिए अपने नागरिकों को युद्धग्रस्त क्षेत्रों से निकालने में सक्रिय है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, बाकी छात्रों और नागरिकों को भी तेहरान, मशहद और ईसफहान जैसे शहरों से निकालने की योजना बनाई जा रही है।
भारत ने बीते वर्षों में विभिन्न संकटों के दौरान अपने नागरिकों को विदेशी धरती से निकालने के कई सफल अभियान चलाए हैं - चाहे वह यूक्रेन संकट हो, अफगानिस्तान से वापसी या खाड़ी देशों से बचाव। अब अर्मेनिया से कश्मीरी छात्रों की यह सुरक्षित वापसी भारत की 'नागरिक-प्रथम' नीति और विदेश मंत्रालय की सशक्त व्यवस्था का नया उदाहरण बन रही है।












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