Narayana Murthy बोले- '...मैंने गलत फैसला लिया', Infosys की लीडरशिप पर नंदन नीलेकणि क्या बोले ?
Infosys Narayana Murthy के विजन का ऐसा मजबूत उदाहरण है जिसकी दूसरी मिसाल मुश्किल है। हालांकि, ऐसा क्या हुआ जो लीडरशिप पोजिशन के बारे में नारायणमूर्ति ने कहा, 'मैं मानता हूं, मैंने गलत फैसला लिया।' जानिए पूरा माजरा

भारत में आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Infosys Narayana Murthy की दूरदर्शिता का नतीजा है। उद्यमियों और युवा कर्मचारियों के लिए इंफोसिस ड्रीम कंपनी से कम नहीं। अब इंफोसिस में नेतृत्व के पदों से परिवार को दूर रखने पर नारायण मूर्ति ने पुराने फैसले पर कहा, 'मैं मानता हूं कि मैं गलत था।'
कंपनी के संस्थापकों के परिवार के सदस्यों को नेतृत्व के पदों से दूर रखने की कंपनी की नीति का जिक्र करते हुए, इंफोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने स्वीकार किया कि वे "पूरी तरह से गलत" थे। ये घटना इसलिए भी अहम है क्योंकि नारायणमूर्ति ने इससे पहले सार्वजनिक रूप से अपने पिछले फैसलों या रुख पर ऐसी टिप्पणी नहीं की है।
नारायणमूर्ति ने जो भूल स्वीकार की है इस बारे में मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में कहा गया, इसका एकमात्र कारण 9 साल पुराना हो सकता है। इसमें लिखा गया कि इंफोसिस में नारायणमूर्ति के बेटे रोहन मूर्ति का कार्यकाल बेहद छोटा रहा। उन्होंने अपने पिता के कार्यकारी सहायक के रूप में कार्य किया। हालांकि, पिता और पुत्र दोनों ने 2014 में कंपनी छोड़ दी। खुद मूर्ति नेतृत्व वाली भूमिका में नहीं रहे, और संस्थापक के अन्य बच्चों ने भी कंपनी में काम नहीं किया।
यदि संस्थापकों के बच्चों को अनुमति दी जाए, तो क्या इंफोसिस के उत्तराधिकार की चिंताओं को दूर किया जा सकेगा ? इस सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए पर नारायण मूर्ति ने कहा कि कंपनी में उनकी भूमिका को लेकर उन्होंने गलत फैसला लिया था। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि मैं इस संगठन को वैध प्रतिभा से वंचित कर रहा था। मैंने जो कुछ भी कहा, मैं वापस लेता हूं। मुझे लगता है कि यदि व्यक्ति को किसी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति माना जाता है तो प्रत्येक व्यक्ति के पास अन्य व्यक्तियों के समान ही अवसर होने चाहिए।
इंफोसिस में उत्तराधिकारी के बारे में नारायणमूर्ति ने कहा, उन्होंने खुद को दूर रखने का विचार अपनाया क्योंकि उन्हें "डर था कि कुछ लोग अयोग्य उम्मीदवारों को ला सकते हैं और उन्हें पदों पर बिठा सकते हैं।" वह चाहते थे कि कंपनी का भविष्य मजबूत हो। हालांकि, ये फैसला सही नहीं थी। बकौल नारायणमूर्ति, "मैं पूरी तरह से गलत था, मैं इसे वापस लेता हूं। मैं मानता हूं कि मैं गलत था। आज, जब तक कि आपके पास किसी पद के लिए सबसे अच्छी क्षमता है, मेरा विचार यह है कि आपको इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि आप किस राष्ट्रीयता, किस विरासत, या किसके पुत्र या पुत्री हैं। उपयुक्त पद या जिम्मेदारी दिए जाने से पहले आपको संगठन में परिपक्व होने की उचित प्रक्रिया से गुजरना ही होगा।
वर्तमान में इंफोसिस को लीड कर नंदन नीलेकणि ने भी नारायणमूर्ति के बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा, इसका मतलब यह नहीं है कि ये भेदभाव को बढ़ावा देने वाली प्रथा होगी। इंफोसिस की उत्तराधिकार योजना 14 दिसंबर को कंपनी की 40 वीं वर्षगांठ के मौके पर सुर्खियों में रही। ऐसा इसलिए क्योंकि गैर-कार्यकारी अध्यक्ष नंदन नीलेकणि ने कहा कि अगर वह किसी को बागडोर सौंपें और वह कंपनी के लिए काम नहीं करे तो इस परिस्थिति के लिए कोई प्लान बी नहीं है।
बकौल नीलेकणि, "...मैं किसी भी बिंदु पर एक अध्यक्ष को कार्यभार सौंप दूंगा ताकि मैं बाहर निकलूं। वह गैर-संस्थापक अध्यक्ष होगा। इसके बाद कोई प्लान बी नहीं है। उन्होंने कहा, जब तक जरूरत होगी वह कंपनी में बने रहेंगे, लेकिन वह भी बहुत लंबे समय तक नहीं रहना चाहते हैं।
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