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Indian Railways: 2023 तक उत्तर-पूर्व की सभी राजधानियों तक रेल नेटवर्क

नई दिल्ली- रेलवे बोर्ड ने उत्तर-पूर्व में रेल नेटवर्क के विकास को लेकर एक बहुत बड़ी घोषणा की है। इसके मुताबिक तीन साल बाद उत्तर-पूर्वी राज्यों की सभी राजधानियां रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगी। बता दें कि उत्तर-पूर्व में रेल नेटवर्क का हमेशा से अभाव रहा है, जिसमें रेलवे बोर्ड के मुताबिक पिछले 5 वर्षों में काफी विकास देखने को मिला है। इसके अलावा रेलवे बोर्ड ने यह भी भरोसा जताया है कि आने वाले वर्षों में यात्रियों को रेलवे के कंफर्म टिकट लेने में कोई दिक्कत नहीं होगी और यह ऑन डिमांड संभव होगा। इतना ही नहीं भारतीय रेलवे देश के कई रूटों पर राजधानी और शताब्दी जैसी गाड़ियों की तरह ही दूसरी यात्री गाड़ियों की रफ्तार भी 130 से लेकर 160 किलोमीटर प्रति घंटे करने की तैयारियों में जुटी हुई है।

तीन साल में उत्तर-पूर्व की सभी राजधानियों से रेल संपर्क

तीन साल में उत्तर-पूर्व की सभी राजधानियों से रेल संपर्क

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने शुक्रवार को रेलवे की कुछ महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को लेकर बहुत बड़ी जानकारियां दी हैं। इसमें एक बड़ी बात ये है कि उत्तर-पूर्वी राज्यों की सभी राजधानी 2023 तक रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगी। उन्होंने कहा है कि यह भारतीय रेलवे का बहुत ही अहम प्रोजेक्ट है, जिसपर पिछले 5 वर्षों से काफी ध्यान दिया जा रहा है। इस समय उत्तर-पूर्व में असम, त्रिपुरा और अरुणाचल की राजधानियां पहले से ही रेल नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं और आने वाले वर्षों में इंफाल, आइजोल, कोहिमा, शिलॉन्ग और गंगटोक भी जुड़ जाएंगे। यही नहीं उन्होंने यह भी कहा है कि जम्मू-कश्मीर में भी रेलवे नेटवर्क के विस्तार पर पूरा फोकस है और कटरा से बनिहाल सेक्शन का काम 2022 के दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

यात्रियों को किसी भी वक्त मिलेगा कंफर्म टिकट

यात्रियों को किसी भी वक्त मिलेगा कंफर्म टिकट

शुक्रवार को मीडिया से हुई बातचीत के दौरान रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने ये भी बताया कि आने वाले 3-4 वर्षों में पैसेंजर ट्रेनें और मालगाड़ियां ऑन डिमांड चल सकेंगी, यानि यात्रियों को वेटिंग टिकट लेने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। जानकारी के मुताबिक भारतीय रेलवे सबसे पहले दिल्ली और मुंबई रूट के बीच सफर करने वाले यात्रियों को किसी भी वक्त कंफर्म टिकट उपलब्ध करवाने का प्रयास करेगा। इसके बाद अति-व्यस्त दिल्ली-हावड़ा और बाकी रूटों पर भी इस व्यवस्था को सुनिश्चित करने की कोशिश होगी। इसकी वजह ये है कि इन रूटों पर माल गाड़ियों के लिए अलग से फ्रेट कॉरिडोर बन रहा है और जब मालगाड़ियां अलग ट्रैक पर चलने लगेंगी तो यात्री गाड़ियों की संख्या बढ़ाना आसान होगा।

रेलवे की स्पीड भी बढ़ेगी

रेलवे की स्पीड भी बढ़ेगी

यही नहीं, रेलवे निजी ट्रेनों को चलाने की तैयारियां तो कर ही रहा है, यात्रियों का रेल सफर सुहाना बनाने के लिए कुछ रूटों पर राजधानी और शताब्दी ट्रेनों की तरह बाकी ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने की तैयारियों में भी जुटा हुआ है। उम्मीद है कि दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई जैसे बेहद व्यस्त रूटों पर सालभर के अंदर दूसरी पैसेंजर गाड़ियां भी 130 किलोमीटर तक की रफ्तार से दौड़ने लगेंगी। इसके लिए रेल ट्रैक के परीक्षण का काम भी चल रहा है। रेल ट्रैकों के अलावा सिंग्नलिंग सिस्टम और कम्युनिकेशन सिस्टम को भी दुरुस्त किया जा रहा है। माना जा रहा है कि गाड़ियों की स्पीड बढ़ने से हर यात्रा में यात्रियों के कुछ घंटे बच जाएंगे। रेलवे के मुताबिक हाई डेनसिटी नेटवर्क पर 130 किलोमीटर की स्पीड का टारगेट जुलाई, 2021 तक प्राप्त कर लिया जाएगा और मार्च, 2025 तक इसे बढ़ाकर 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक कर लिया जाएगा।

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