Indian Railways: 2024 तक माल ढुलाई से दोगुनी कमाई करने की ये है रेलवे की तैयारी
नई दिल्ली- भारतीय रेलवे कमाई बढ़ाने के लिए माल गाड़ियों की आवाजाही पर ज्यादा भरोसा कर रहा है। यही वजह है कि रेलवे ने आने वाले चार साल में माल ढुलाई की क्षमता लगभग दोगुनी करने की योजना तैयार की है। इसके तहत 2024 तक माल ढुलाई दो हजार मिट्रिक टन से ज्यादा करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। गौरतलब है कि लॉकडाउन की शुरुआत से जब से यात्री ट्रेनों की आवाजाही की रफ्तार धीमी हुई है, रेलवे ने माल ढुलाई के क्षेत्र में कई कामयाबी हासिल किए हैं और लगता है कि रेलवे को इसमें ज्यादा राजस्व जुटाने का स्थायी समाधान नजर आ रहा है।

दि प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे ने 2024 तक माल ढुलाई की क्षमता दोगुनी करने के लिए एक बड़ी योजना तैयार की है, जिसे 'रीइंवेंशन' का नाम दिया गया है। रेलवे बोर्ड से सभी डिविजनों और जोन के जेनरल मैनेजरों को 3 नवंबर को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि इस योजना के लिए '2024 तक 2,024 मिट्रिक टन लोडिंग का लक्ष्य' हासिल करना है। मौजूदा समय में रेलवे की लोडिंग कैपिसिटी करीब 1,200 से 1,300 मिट्रिक टन है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बोर्ड ने प्राथमिकता के आधार पर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की एक पूरी लिस्ट तैयार की है। इसमें 11,000 किलो मीटर के हाई डेंसिटी नेटवर्क (एचडीएन) और 23,000 किलो मीटर के हाइली यूटिलाइज्ड नेटवर्क (एचयूएन) में पटरियों के दोहरीकरण और 3,000 हाई डेंसिटी नेटवर्क (एचडीएन)रूट को तिगुनी और चौगुनी किया जाना है। गौरतलब है कि इस साल लॉकडाउन के दौरान रेलवे ने डबल डेकर माल ट्रेन चलाने में पहले ही कामयाबी पा ली है।
इसके साथ ही गोल्डन क्वार्डिलैटेरल रूट पर और पूरे एचडीएन और एचयूएन पर स्पीड बढ़ाकर अगले साल दिसंबर तक 130 किलो मीटर प्रति घंटा किया जाना है। यही नहीं नई दिल्ली-मुंबई और नई दिल्ली कोलकाता फ्रेट ट्रेनों की स्पीड 2024 तक 160 किलो मीटर प्रति घंटा करने की भी तैयारी है। चिट्टी में रेलवे बोर्ड के मेंबर, इंफ्रास्ट्रक्चर ने कहा है, 'जैसा कि स्पष्ट है, विजन महत्वाकांक्षी है और इस विजन को प्राप्त करने के लिए भारतीय रेलवे को खुद को रीइंवेंट करना होगा।' खत में आगे लिखा गया है कि इसके लिए प्रोजेक्ट के लिए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म योजना बनाकर उसे बेहतर मॉनिटरिंग के साथ सही तरीके से कम से कम समय में तामील करने की जरूरत होगी।
इसके लिए फंड को एक बड़ी चुनौती माना गया है और कहा गया है कि इसका भी इंतजाम इन्हीं चार वर्षों के दौरान किया जाएगा। इसके लिए फंड रेलवे के आंतरिक संसाधनों से, वित्त मंत्रालय की बजट सहायता से और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन के जरिए बाजार से जुटाया जाएगा। खत में साफ कहा गया है कि उधारी या कर्ज के मद्देनजर प्रोजेक्ट को वक्त पर पूरा करना आवश्यक होगा। किसी भी कीमत पर लागत और समय में छूट नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, इसमें यह भी भरोसा जताया गया है कि फंड जुटाने में कोई समस्या नहीं होगी। रेलवे के एक अधिकारी ने यह भी बताया है कि यह योजना रेलवे की इंसेंटिव-ड्रिवेन योजना होगी और रेलवे के परफॉर्मेंस के आधार पर ही फंड उपलब्ध होगा।
इसके तहत प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी जेनरल मैनेजरों के ऊपर निजी तौर पर होगी और उसी आधार पर आगे के फंड जारी किए जाएंगे। इससे प्रतियोगिता भी बढ़ेगी और टारगेट पूरा करने पर जोर रहेगा। दरअसल, रेलवे अब खुद को बाजार के अनुकूल ढालने की कोशिश कर रहा है, जिससे वह बिजनेस को भी अपनी ओर आकर्षित कर सके। इस साल की शुरुआत में रेलवे ने सभी जोन और डिविजन स्तर पर बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट गठित करने का फैसला किया था, ताकि वह उद्योगों के और बाकी जरूरत के क्षेत्रों के संपर्क में रह सकें।












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