LAC पर चीनी जवानों का मुंह तोड़ेगी सेना के 'घातक' कमांडोज की टीम, जानिए इनके बारे में सब-कुछ
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर जारी टकराव को अब दो माह होने को हैं। 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। रविवार को चीनी मीडिया में ऐसी खबरें भी आईं कि तिब्बत में चीनी सैनिकों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देने के लिए कम से कम 20 मार्शल आर्ट ट्रेनर्स भेजे गए हैं। इस खबर के बाद अब भारत ने अपने उन खतरनाक कमांडोज की फौज को एलएसी पर तैनात करने का फैसला किया है जिसका नाम लेने से ही अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं।
Recommended Video

अमेरिकी कमांडोज के बराबर
मार्शल आर्ट में ट्रेनिंग हासिल करने वाले चीनी सैनिकों को जवाब देने के लिए सेना ने घातक कमांडोज को एलएसी पर तैनात कर दिया है। घातक कमांडोज या घातक प्लाटून सेना की वह स्पेशल ऑपरेशन टीम है जिसकी तुलना अमेरिका की स्काउट स्नाइपर प्लाटून और एसटीए प्लाटून से होती है। घातक जिसका अर्थ होता है जानलेवा और यह नाम इस कमांडो को जनरन बिपिन चंद्र जोशी ने दिया था। इस प्लाटून की क्षमता 7,000 सैनिकों की है और ये कमांडोज दुश्मन को चकमा देकर उनका काम तमाम करने में सक्षम होते हैं।

मार्शल आर्ट में भी माहिर घातक कमांडोज
- एक आर्मी ऑफिसर की तरफ से बताया गया है कि घातक कमांडो 43 दिन की खास ट्रेनिंग लेता है।
- उसे यह ट्रेनिंग कर्नाटक के बेलगाम स्थित कमांडो ट्रेनिंग कोर्स में मिलती है।
- घातक कमांडो की ट्रेनिंग में बिना रुके 35 किलोमीटर के वजन के साथ 20 से 60 किलोमीटर तक दौड़ना शामिल होता है।
- इन कमांडोज के हथियारों में एक IWI टैवोर टीएआर-21, इंसास या फिर एके-47 वर्जन की असॉल्ट राइफलें शामिल होती हैं।
- मिशन के मुताबिक कमांडोज हथियार और सामान लेकर लेकर चलते हैं।
- इन कमांडोज के पास रस्सियों के अलावा पहाड़ों पर चढ़ने वाले गियर, ग्रेनेड्स, रॉकेट लॉन्चर्स, लेसर टारगेट डेजीगनेटर्स और नाइट विजन उपकरण होते हैं।
- जहां कुछ उपकरण भारत में ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों में बनता है तो कुछ उपकरण विदेशों से भी आयात होते हैं।
- हथियारों के अलावा इन कमांडोज की ट्रेनिंग में हैंड-टू-हैंड कॉम्बेट भी शामिल होता है।
- ये कमांडोज मार्शल आर्ट में भी माहिर होते हैं और इन्हें इनकी यूनिट में भी ट्रेनिंग दी जाती है।
- ऊंचाई वाली जगहों और रेगिस्तानी इलाकों में ट्रेनिंग अलग-अलग होती है।

कैसी होती है कमांडोज की यूनिट
घातक कमांडो की यूनिट में 22 सैनिक होते हैं जिसमें एक ऑफिसर और जूनियर कमीशंड ऑफिसर शामिल होता है। लेकिन एक पूरी टीम को बैकअप के तौर पर रेडी रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि यूनिट में 40 से 45 कमांडोज हर समय रहते हैं। हर इनफेंट्री ऑफिसर को ट्रेनिंग से गुजरना होता है लेकिन सिर्फ चुने हुए ऑफिसर्स को ही ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है। हर साल 30 से 40 जवान हर यूनिट में आते हैं और कुछ जवानों को कमांडो टीम में रखा जाता है। जो सैनिक इन खतरनाक कमांडोज की जगह लेते हैं, वह यूनिट में ही रहते हैं। इस तरह से घातक कमांडो टीम के अलावा 50 प्रतिशत सैनिक इसमें महारत रखते हैं।

कारगिल की जंग से जारी है इनकी बहादुरी
इन कमांडोज ने साल 1999 में अपना लोहा मनवाया था जब करगिल की जंग जारी थी। घातक प्लाटून में शामिन ग्रेनेडियर्स के सैनिकों ने टाइगर हिल को फतेह किया और आज तक 18 ग्रेनेडियर के योगेंद्र सिंह यादव का नाम सम्मान से लिया जाता है। इस जंग में बहादुरी का प्रदर्शन करने के लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया था। मराठा लाइट इनफेंट्री की 15वीं बटालियन के लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह भी इसी प्लाटून का हिस्सा थे। जिन्होंने जम्मू कश्मीर में घुस आए 17 आतंकियों को एक ऑपरेशन में ढेर किया था। 15 जून को गलवान घाटी में शहीद हुए 23 साल के गुरतेज सिंह भी इसी प्लाटून का हिस्सा थे जिन्होंने एक दर्जन चीनी सैनिकों को ढेर किया था।












Click it and Unblock the Notifications