चीन पर एक और शिकंजा कसने की तैयारी में मोदी सरकार
केंद्र सरकार और पावर ट्रांसमिशन सेक्टर के अधिकारियों के मुताबिक संवेदनशील सेक्टर्स में चीन की बढ़ती पैठ पर नियंत्रण करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
नई दिल्ली। सिक्किम के डोकलाम सेक्टर से लेकर लद्दाख तक भारत चीन को मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। इसी बीच भारत ने एक ऐसा प्लान बनाया है जो चीन की कमर तोड़ सकता है साथ ही चीन के सारे प्लान को फेल कर सकता है। भारत पावर ट्रांसमिशन सेक्टर में नई कंपनियों की एंट्री में नियम सख्त करने जा रहा है। पावर और टेलिकॉम उपकरणों में मालवेअर की आशंका के चलते भी इस प्रक्रिया को कड़ा करने की तैयारी है।
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केंद्र सरकार और पावर ट्रांसमिशन सेक्टर के अधिकारियों के मुताबिक संवेदनशील सेक्टर्स में चीन की बढ़ती पैठ पर नियंत्रण करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। आपको बता दें कि हार्बिन इलेक्ट्रिक, डॉन्गफैंग इलेक्ट्रॉनिक्स, शंघाई इलेक्ट्रिक और सिफांग ऑटोमेशन जैसी कंपनियां देश के 18 शहरों में उपकरणों की सप्लाइ कर रही हैं या फिर विद्युत वितरण का प्रबंधन कर रही हैं।
क्रेंद्र सरकार सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट पर विचार कर रही है, जिसमें उसने पावर ट्रांसमिशन कॉन्ट्रेक्ट्स की बोली के नियमों में बदलाव करने की बात कही है। अथॉरिटी का कहना है कि ऐसे प्रयास किए जाने चाहिए, जिससे स्थानीय कंपनियों को ज्यादा अवसर मिल सकें।
सूत्रों के मुताबिक भारत में निवेश करने की इच्छुक कंपनियों के लिए कुछ नियम तैयार किए गए हैं। जिसके तहत संबंधित कंपनी का 10 साल तक भारत में काम करने का रिकॉर्ड होना चाहिए साथ ही उस कंपनी में सीनियर अधिकारी के तौर पर किसी भारतीय का होना जरुरी है। इसके अलावा विदेशी फर्म के एंप्लॉयीज का एक निश्चित समय तक भारत में रहना जरूरी होगा।












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