Budget 2026: हिंदुस्तान 1 फरवरी तो पड़ोसी पाकिस्तान कब पेश करता है बजट? भारत से कितना छोटा है पड़ोसी का खजाना
India vs Pakistan Budget comparison: 15 अगस्त 1947 को अखंड भारत से अलग होकर अस्तित्व में आए पाकिस्तान और भारत की विकास यात्रा में आज जमीन-आसमान का अंतर है। जहां भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है, वहीं पाकिस्तान अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी विदेशी कर्ज पर निर्भर है।
दोनों देशों के बीच यह वित्तीय अंतर उनके सालाना बजट के आंकड़ों और बजट पेश करने की परंपराओं में भी साफ झलकता है। जहां भारत का बजट फरवरी की पहली तारीख को देश की दिशा तय करता है, वहीं पाकिस्तान में जून के महीने में होने वाली बजट घोषणाएं अक्सर कर्ज चुकाने और घाटे को पाटने की जद्दोजहद मात्र बनकर रह जाती हैं।

Pakistan Budget date: बजट पेश करने की अलग परंपरा
भारत में बजट पेश करने की तारीख अब 1 फरवरी तय है, ताकि अप्रैल में नया वित्त वर्ष शुरू होने से पहले सारी प्रक्रियाएं पूरी हो सकें। इसके विपरीत, पाकिस्तान में बजट जून की शुरुआत में पेश किया जाता है। पाकिस्तान का वित्त वर्ष 1 जुलाई से शुरू होता है, इसलिए वहां जून के दूसरे हफ्ते तक नेशनल असेंबली में बजट भाषण दिया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन पाकिस्तान में बजट पेश होता है, उस दिन असेंबली में अन्य किसी गतिविधि की अनुमति नहीं होती।
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Pakistan Budget: भारत के सामने कहीं नहीं टिकता पाकिस्तान
आंकड़ों की तुलना करें तो पाकिस्तान का कुल बजट भारत के मुकाबले बहुत छोटा है। भारत का चालू वित्त वर्ष का बजट लगभग 50 लाख करोड़ रुपये का है, जबकि पाकिस्तान का बजट भारतीय मुद्रा में महज 5.68 लाख करोड़ रुपये के करीब बैठता है। तकनीकी रूप से देखें तो भारत का वार्षिक बजट पाकिस्तान के बजट से लगभग 10 गुना बड़ा है। यह अंतर दोनों देशों की क्रय शक्ति और वैश्विक स्तर पर उनकी आर्थिक हैसियत को साफ बयां करता है।
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कर्ज के बोझ तले दबा पड़ोसी मुल्क
पाकिस्तान के बजट का एक बड़ा और डरावना हिस्सा केवल कर्ज के ब्याज को चुकाने में चला जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अपने कुल बजट का लगभग 45 से 47 फीसदी हिस्सा पुराने कर्ज की किश्तों और ब्याज अदायगी में खर्च कर देता है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश के विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए बजट का आधा हिस्सा भी मुश्किल से बच पाता है, जो उसकी आर्थिक बदहाली का मुख्य कारण है।
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संसद में बजट पारित करने की जटिल प्रक्रिया
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में बजट सत्र के संचालन का पूरा अधिकार स्पीकर के पास होता है। बजट पर सामान्य चर्चा के लिए कम से कम चार दिन का समय दिया जाता है। इस दौरान विपक्षी सदस्यों को 'कटौती प्रस्ताव' (Cut Motion) लाने का अधिकार होता है। अनुदान की मांगों पर विस्तृत चर्चा और मतदान के बाद ही बजट को पारित माना जाता है। हालांकि, राजनीतिक अस्थिरता के कारण अक्सर यह प्रक्रिया भारी हंगामे की भेंट चढ़ जाती है।












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